Ramadan 2025: मस्जिद ए कूफा से 19वीं रमजान को निकाला गया जुलूस

Ramadan 2025: मस्जिदे कूफा काजमैन से निकाला गया, यह ताबूत इमामबाड़ा हकीम सैयद मोहम्मद तकी ले जाया गया। जुलूस को निकलवाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किया गये थे।

Ashutosh Tripathi
Published on: 20 March 2025 11:48 AM IST
Ramadan 2025: मस्जिद ए कूफा से 19वीं रमजान को निकाला गया जुलूस
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सआदतगंज स्थित मस्जिद ए कूफा से 19वीं रमजान को निकाला गया जुलूस   (photo: Newstrack.com )

Ramadan 2025: अमीर-उल-मोमेनीन हजरत अली (अ.स.) को जरबत (तलवार) मारे जाने की याद में गुरुवार को तड़के बड़ी अकीदत के साथ गिलीम में ताबूत का जुलूस निकाला गया। जिसमें में हजारों पुरूषों के अलवा पर्दानशीन महिलाओ व बच्चों ने काले लिबास पहने शिरकत की। जुलूस में ताबूत की जियारत करने के लिए अकीदतमंदों का सेलाब नजर आया। मस्जिदे कूफा काजमैन से निकाला गया यह ताबूत इमामबाड़ा हकीम सैयद मोहम्मद तकी ले जाया गया। जुलूस को निकलवाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किया गये थे। जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरा से की जा रही थी। जुलूस से पूर्व सुबह मस्जिद में कारी ताहिर जाफरी ने फज्र की अजान दी। अजान होते ही मस्जिद परिसर नमाजियों से खचा-खच भर गया।

मौलाना जहीर अहमद इफतकारी ने नमाजे जमाअत पढ़ायी। इसके बाद मौलाना मुत्तकी जैदी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने जब 19वीं रमजान को हजरत अली (अ.स.) पर सुबह की नमाज के दौरान अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम ने जहर से बुझी तलवार से वार करने का मंजर बयान किया तो अजादारों के रोने की आवाजे बुलन्द हो गयीं।


मजलिस के बाद काजमैन से जैसे ही कंबल में लिपटा ताबूत बाहर आया तो अजादार ताबूत का बोसा लेने लगे। अब यह ताबूत अपनी मंजिल के लिए बढ़ने लगा। जुलूस के आगे 'जुलूसे शबीह ताबूत" का काला बैनर चल रहा था और मर्सियाख्वानी हो रही थी। मर्सियाख्वानी और आंसुओं के साथ यह जुलूस मंसूर नगर पहुंचा।


ताबूत की जियारत करने वालों का हुजूम

यहां से गिरधारी सिंह इंटर कालेज, बिल्लौचपुरा होते हुए नक्खास पहुंचा। जहां रास्ते के दोनों ओर ताबूत की जियारत करने वालों का हुजूम था। ताबूत देख हर आंख से आंसू जारी हो जाते थे। जुलूस के साथ हजरत अब्बास (अ.स.) के अलम चल रहे थे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चल रहा जुलूस नक्खास, अकबरी गेट होते हुए पाटानाला के पास पहुंचा। जहां पुरुषों ने ताबूत महिलाओं को सौंप दिया।


वह ताबूत इमामबाड़ा हकीम सैयद मोहम्मद तकी में ले गयी। इसके बाद अलविदायी मजलिस हुई। जिसे मौलाना मीसम जैदी ने खिताब किया। मजलिस खत्म होते ही हैदर मौला-या अली मौला की आवाजे गूंजने लगी।



Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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