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सूर्या ड्रोन टेक-2025: भारतीय सेना और SIDM का सहयोग, 29-30 अप्रैल को होगा ड्रोन तकनीकी सम्मेलन
Surya Drone Tech 2025: जैसे-जैसे ड्रोन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, यह आधुनिक युद्ध और नागरिक अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सूर्या ड्रोन टेक-2025: भारतीय सेना और एसआईडीएम का सहयोग (photo: social media )
Lucknow Today News: भारतीय सेना की मध्य कमान और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के सहयोग से उत्तराखंड के देहरादून कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड में आगामी 29-30 अप्रैल को सूर्या ड्रोन टेक-2025 का आयोजन किया जाएगा। बता दें कि यह सम्मेलन सुबह 9 बजे से शुरू होगा और इसका उद्देश्य ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीनतम विकास को प्रदर्शित करना है।
ड्रोन उद्योग में हो रही तेजी से वृद्धि और भारत की स्थिति
गौरतलब है कि जैसे-जैसे ड्रोन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, यह आधुनिक युद्ध और नागरिक अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ड्रोन के क्षेत्र में चपलता, गतिशीलता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का समावेश, इसे और अधिक प्रभावी बना रहा है। सूर्या ड्रोन टेक-2025 में एआई एकीकरण और काउंटर-ड्रोन रणनीतियों समेत कई नवाचारों की प्रदर्शनी होगी। जो भारत की वैश्विक ड्रोन प्रौद्योगिकी परिदृश्य में अग्रणी भूमिका को और मजबूती प्रदान करती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य और भारतीय रक्षा क्षेत्र में योगदान
सूर्या ड्रोन टेक-2025 का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों के बीच नवाचार, सहयोग और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के दौरान ड्रोन प्रणालियों की नवीनतम प्रगति का प्रदर्शन किया जाएगा, विशेषकर उनकी रात्रि उड़ान क्षमताओं और थर्मल इमेजिंग प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में यह भारत की तकनीकी स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके अलावा कार्यक्रम का लक्ष्य उत्पाद संवर्धन के लिए सिफारिशें प्रदान करना और भविष्य के स्वदेशीकरण प्रयासों को मार्गदर्शन देना भी है।
सभी भारतीय निर्माता और छात्र भाग ले सकते हैं
भारतीय सेना मध्य कमान और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की ओर से यह आयोजन इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों, एनसीसी, पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सरकारी संगठनों के छात्रों के लिए खुला रहेगा। इसके अलावा, ड्रोन और मानव रहित स्वायत्त प्रणालियों के सभी भारतीय निर्माता इसमें भाग ले सकते हैं।