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Etawah News: प्रतिबंध के बावजूद भी यमुना में शिकार कर रहे मछली माफिया

इटावा जसवंतनगर क्षेत्र में मछली माफियाओं का दबदबा यमुना एवं अन्य नदियों में कायम है।

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यमुना में मृत मछलियों की फाइल तस्वीर (फोटो साभार-सोशल मीडिया) 

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Etawah News: इटावा जसवंतनगर क्षेत्र में मछली माफियाओं का दबदबा यमुना एवं अन्य नदियों में कायम है। इन लोग बेखौफ नदियों के तटों और मछली उत्पादन इलाकों पर कब्जा जमाए हुए हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारी और प्रशासन की अनदेखी उन्हें शह दिए है। बरसात के महीने में मत्स्य आखेट का यह खेल देखना है तो यमुना किनारे आ जाइए। बताते हैं कि बलरई इलाके में स्थित यमुना के लंबे चौड़े इलाके में मछलियों का शिकार धड़ल्ले से हो रहा है। यहां लाखों के बारे न्यारे हो रहे हैं। पुलिस की मिली भगत भी इसमें शामिल है। क्विंटलों मछली इस इलाके से रोज लद रही हैं। माफिया मछुआरे मत्स्य आखेट के लिए नावों का प्रयोग कर रहे हैं। जो यमुना में जालों के साथ देखी जा सकती हैं।

बरसात के मौसम में मछलियों के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। इसका पालन कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। फिर भी मछलियों का शिकार हो रहा है। किसी के पकड़े जाने की अब तक खबर नहीं है। कुछ दिनों पूर्व ही हजारों की संख्या में मृत मछलियां यमुना किनारे मिली थी। संभव है कि इसे शिकारियों ने अंजाम दिया हो।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बलरई के ग्राम घुरहा, जाखन के पास नावों पर सवार शिकारी मछलियों को मारने का काम कर रहे हैं। यमुना नदी में मछली नीलामी के ठेका पर रोक लगी है, बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से मछलियों का अवैध शिकार हो रहा हैं। यमुना के घाटों पर सुबह से दिनभर शिकारियों का जमावड़ा लगा रहता है। नदी में जाल व कांटे बिछाकर मछलियों का शिकार किया जाता है।

यमुना के लबालब होने से घाट "मछली शिकारगाह" में तब्दील हो गये हैं। पानी बढ़ने से मछलियों की तादाद निरन्तर बढ़ रही है। इससे पेशेवर शिकारी तेजी से सक्रिय हो गए हैं। कई मछुआरे गहराई वाले इलाके में जाल फैलाते देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों की आपत्ति यह है कि नदी से मछली पकड़ने के बाद किनारे पर ही साफ करते हैं, जिससे घाटों पर गंदगी और बदबू फैलती है।

ग्रामीणों ने बताया कि यमुना नदी पर राजघाट घाट से लेकर कचौरा घाट से एक किलोमीटर आगे तक और यमुना नदी के खारजा झाल मिलान घाट पर राज घाट तक शिकारी शाम के वक्त जाल फैलाते हैं। नदी में जाल बिछाने के बाद सुबह बड़ी मात्रा में मछली पकड़कर इटावा, आगरा, फिरोजाबाद आदि जगहों पर मछली मार्केट के लिए भेजी जाती है। मछुआरों ने अपना नेटवर्क खड़ा कर रखा है। अलग अलग लोकेशन पर लोग मछली की परिवहन में भूमिका निभाते हैं। कभी सेंचुरी की टीम इलाके में सर्चिंग करने आती है, तो इसकी भनक पहले से ही इन मछुआरों को लग जाती है, जिससे वह कार्रवाई से बच जाते हैं।

बलरई थाना क्षेत्र के फकीरे की मड़ैया, खंदिया, कछपुरा, सरामई, लुंगे की मड़ैया, पूंछरी, घुरा, कीरतपुर गाँव के यमुना घाट से लेकर खूबे की मड़ैया कचौरा घाट के तट पर विभिन्न प्रजाति की मछलियों का शिकार करते हुए मछली माफिया देखे जा सकते हैं।

यद्यपि इस क्षेत्र में शिकार करना तो दूर नदी में पैर रखना भी दंडनीय अपराध है। इन दिनों मछलियों का प्रजनन का समय है इससे और ज्यादा पाबंदी है। अवैध शिकार की हकीकत परखने मौके पर पहुंचे पत्रकारों को तो कुछ शिकारी नदी में धड़ल्ले से जाल डालते मिले। कुछ तो नौकाओं में मछली भरे बोरे लादकर किनारों पर ला रहे थे। कछुओं का भी शिकार वास्तु शास्त्रियों की सलाह पर घरों और एक्वॉरियम में रखने का लेकर चलन बढ़ रहा है। कछुओं की भारी मांग के कारण मछलियों के साथ इस क्षेत्र में कछुओं का भी धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है।

शिकार बड़े पैमाने पर हो रहा है लेकिन अधिकारियों की मानें तो उनको मामला पता ही नहीं। जब एसडीएम नन्द प्रकाश मौर्य से मछलियों के अवैध शिकार को लेकर पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मामला सज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो सख्त क़ानूनी कारवाही की जाएगी।

Raghvendra Prasad Mishra

Raghvendra Prasad Mishra

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