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Farrukhabad News: बरसात की कमी ऊपर से डीजल की महंगाई, किसानों का धान की रोपाई से मोहभंग

उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में बरसात न होने व डीजल की महंगाई की मार से किसानों का धान की रोपाई से मोहभंग होने लगा है।

Dilip Katiyar

Dilip KatiyarReport Dilip KatiyarShashi kant gautamPublished By Shashi kant gautam

Published on 13 July 2021 6:48 AM GMT

Inflation of diesel from above due to lack of rain, farmers disillusioned with paddy transplantation
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फर्रुखाबाद किसान: फोटो- सोशल मीडिया

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Farrukhabad News: उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में बरसात न होने व डीजल की महगाई की मार से किसानों का धान की रोपाई से मोहभंग होने लगा है। मौसम अधिक गर्म होने से धान की पौध पीली पड़कर खराब हो रही है। जिले के कई किसानों तो धान की फसल करने से दूरी बना रहे हैं । इससे जिले में धान की पैदावार कम होने का अनुमान है। पहले से महंगाई और सस्ती बिक रहीं फसलों से किसान कराह रहा है। अब बारिश किसानों को रुलाने का काम कर रही है।

फर्रुखाबाद जिले के अमृतपुर क्षेत्र में अधिकांश किसान फसलों की सिचाई पंपिग सेट से ही करते हैं। तापमान अधिक होने व उमस भरी गर्मी के कारण धान की पौध खराब हो रही है। जिससे किसान चितित हैं। साल दर साल बारिश कम होने से किसानों का धान की फसल से मोहभंग हो रहा है।लगभग आधी जुलाई बीतने को है लेकिन अभी तक ऐसी बारिश नहीं हुई है। बरसात कम होने से धान का उत्पादन कम हो जाता है और लागत बढ़ जाती है। जिससे किसानों को लागत भी नहीं मिल पाती है।

बारिश कम होने से धान का उत्पादन घट जाता है

गांव जिठौली के किसानो ने बताया कि बरसात के इंतजार के बाद सबमर्सिबल के पानी से धान की रोपाई शुरू करा दी है, लेकिन बारिश कम होने से धान का उत्पादन घट जाता है। कुम्हरौर के प्रभाकर त्रिवेदी कहते हैं कि एक खेत में सबमर्सिबल लगा है। पंपिग सेट से सिचाई बहुत महंगी पड़ती है और उत्पादन भी कम हो जाता है।



बिजली बिल बढ़ गया और डीजल महंगा हो गया

बिजली बिल बढ़ने और डीजल महंगा होने के चलते सिंचाई महंगी हो गई है इसलिए किसान निजी नलकूप के सहारे धान की फसल करने से कतरा रहे हैं। जिले में सरकारी नलकूपों का संचालन ठीक नही हो पा रहा है। इसलिए सरकारी संसाधन भी किसानों को कोई राहत नहीं दे पा रहे हैं। किसान बताते हैं कि बारिश न होने से फसलें मुरझा रहीं हैं। जो सिंचाई निजी नलकूप से कर रहे हैं वह अधिक महंगी पड़ रही है।

Shashi kant gautam

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