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Farrukhabad News : टोकरी में सेहरा, हाथ में पैंट लेकर दुल्हन लेने निकला दूल्हा, जानें क्या है वजह

Farrukhabad News :फर्रुखाबाद में एक वीडियो वारयल हुआ है जिसमें दूल्हे ने पैंट हाथ में लेकर पैदल बाढ़ का पानी पार किया।

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ShraddhaBy Shraddha

Published on 4 Aug 2021 6:35 AM GMT

बाढ़ के पानी में चलकर लेने गए बारात
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बाढ़ के पानी में चलकर लेने गए बारात 

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Farrukhabad News : फर्रुखाबाद जिले (Farrukhabad District) में बाढ़ ग्रस्त गांव में कोरोना से कुछ निजात मिली ही थी कि बाढ़ (Flooding) ने घेर लिया। वहीं उनके जनजीवन के साथ साथ वैवाहिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। फर्रुखाबाद में एक वीडियो वारयल हुआ है जिसमें दूल्हे ने पैंट हाथ में लेकर पैदल बाढ़ का पानी पार किया। बराती व परिजन भी इसी तरह बाढ़ के पानी में चलकर गांव बिलावलपुर तक पैदल गए। बिलावलपुर में दूल्हे को पैंट और सेहरा पहनाया गया। इन सारी दिक्कतों को पार करते हुए दूल्हा अपने परिजनों के साथ दुल्हन लेने निकल पड़ा साथ ही साथ धूमधाम से निकाह हुआ।

विवाह हो या निकाह, शानदार लिबास पहनना, खुद को बेहद खूबसूरत दिखाना हर दूल्हे का सपना होता है। लेकिन कुदरत के आगे किसी का जोर नहीं चलता। फर्रुखाबाद जिले में बाढ़ का कहर इस तरह से है कि लोगों को अब शादी ब्याह में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ऐसा ही वाकया बाढ़ के पानी से घिरे गांव पंखिया नगला में देखने को मिला।

दूल्हे ने पैंट हाथ में लेकर बाढ़ का पानी पार किया


बता दें कि टोकरी में सेहरा, हाथ में पैंट लेकर दुल्हन लेने निकला दूल्हा, दो-दो फीट पानी में चले बराती। बाढ़ की वजह से बगैर पैंट और सेहरे के दूल्हा घर से निकला। बराती भी आधे कपड़ों में बाढ़ के पानी के बीच दूसरे गांव तक पैदल गए। वहां दूल्हे को पैंट व सेहरा पहनाया गया फिर बरात उन्नाव के लिए रवाना हो गई।

बराती व परिजन भी बाढ़ के पानी में चलकर पैदल गए


दरसल, मऊदरवाजा थाने के गांव पंखिया नगला के यासीन खां ने बेटे मोहसिन का निकाह जनपद उन्नाव के शुक्लागंज में तय किया गया। काजी ने निकाह के लिए मंगलवार की तारीख तय की। लेकिन न तो दूल्हे को पता था और न दुल्हन को कि इस तारीख को दोनों परिजनों को किस दौर से गुजरना होगा। इन दिनों गांव में गंगा की बाढ़ का पानी भरा है उसके एक किमी दूर तक दो-दो फीट पानी है। मोहसिन की बरात की रवानगी हुई तो बहनोई न तो शेरवानी और न ही सेहरा पहनाने की रश्म अदा कर सके। दूल्हे को पैदल ही हाथ में पैंट थाम कर बाढ़ का पानी पार करना पड़ा। बराती व परिजन भी कुछ इसी तरह बाढ़ के पानी में चलकर गांव बिलावलपुर तक पैदल ही गए. वहीं पैंट और सेहरा पहना गया। यहां तक दूल्हे का सेहरा एक टोकरी में रखकर परिवार के लोग लेकर आए इसके बाद बरात कारों से रवाना हुई।

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