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Mainpuri By-Election: मुलायम की विरासत बचाने में अखिलेश कामयाब, कुनबे की एकजुटता से डिंपल को मिली बड़ी जीत

Mainpuri By-Election Result: लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव की बड़ी जीत के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव की विरासत बचाने में कामयाब रहे हैं।

Anshuman Tiwari
Published on: 8 Dec 2022 12:23 PM GMT
Akhilesh Yadav succeed in saving Mulayam Yadav legacy
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Akhilesh Yadav succeed in saving Mulayam Yadav legacy (Image: Social Media)

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Mainpuri By-Election 2022: मैनपुरी के सियासी रण में आखिरकार मुलायम कुनबा अपनी सियासी ताकत दिखाने में कामयाब रहा। लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव की बड़ी जीत के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव की विरासत बचाने में कामयाब रहे हैं। डिंपल यादव ने भाजपा के प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य को 2,88,461 मतों के बड़े अंतर से हराया है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद ही इस सीट पर उपचुनाव कराया गया है। इसलिए अखिलेश यादव के ऊपर इस विरासत को बचाने की बड़ी चुनौती थी जिसमें वे कामयाब साबित हुए हैं।

मैनपुरी के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के सामने परिवार को एकजुट रखने के साथ ही जातीय समीकरण को साधने की भी बड़ी चुनौती थी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इन दोनों चुनौतियों का कामयाबी के साथ मुकाबला किया है। डिंपल की इस जीत में अखिलेश के साथ ही उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव की ओर से की गई मेहनत को भी बड़ा कारण माना जा रहा है।

डिंपल की उम्मीदवारी से परिवार एकजुट

मुलायम कुनबे के लिए मैनपुरी का लोकसभा उपचुनाव प्रतिष्ठा की जंग बना हुआ था। 1996 में मुलायम सिंह यादव ने पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की थी और उसके बाद लगातार सपा का ही सीट पर कब्जा बना हुआ है। मैनपुरी के लोकसभा उपचुनाव में सपा के टिकट को लेकर मुलायम कुनबे के कई नेताओं की दावेदारी थी मगर अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को चुनाव मैदान में उतारकर परिवार में चल रही खींचतान को पूरी तरह खत्म कर दिया था।

अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से पहले अखिलेश यादव की तनातनी चल रही थी मगर डिंपल को चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद शिवपाल सिंह यादव भी उन्हें चुनाव जिताने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गए। अखिलेश और शिवपाल की इस एकजुटता ने बड़ा असर दिखाया और भाजपा की जोरदार कोशिशों के बावजूद सपा मैनपुरी का अपना किला बचाने में कामयाब साबित हुई है।

सपा का गढ़ मानी जाती है मैनपुरी सीट

मैनपुरी लोकसभा सीट को समाजवादी पार्टी का गढ़ यूं ही नहीं माना जाता। यदि मैनपुरी लोकसभा सीट के सियासी इतिहास को देखा जाए तो 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद मुलायम सिंह यादव ने 1996 में पहली बार इस सीट से जीत हासिल की थी। इसके बाद वे 2004, 2009, 2014 और 2019 में भी इस लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर भी मुलायम का विजय रथ नहीं रोक सकी थी। 2019 के चुनाव में भी भाजपा ने उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में अपनी सियासी ताकत दिखाई थी मगर भाजपा मुलायम की जीत का सिलसिला नहीं रोक सकी थी। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलायम की जीत का मार्जिन घटकर 94,000 पर पहुंच गया था।

मुलायम सिंह के अलावा चौधरी बलराम सिंह, धर्मेंद्र यादव और तेजप्रताप यादव भी मैनपुरी लोकसभा सीट से सपा के सांसद चुने जा चुके हैं। मुलायम के निधन के बाद रिक्त हुई सीट पर अखिलेश ही नहीं पूरे यादव कुनबे की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। डिंपल यादव की जीत के साथ आखिरकार अखिलेश यादव ने इस सीट पर अपनी ताकत दिखा दी है।

विधानसभा चुनाव में हुआ था कड़ा मुकाबला

मैनपुरी लोकसभा सीट में विधानसभा की पांच सीटें आती हैं। इनमें चार सीटें- मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल मैनपुरी जिले की हैं। इसके साथ ही इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट भी इस लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में मैनपुरी जिले की दो सीटों पर जीत हासिल करके भाजपा ने अपनी ताकत दिखाई थी जबकि दो सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को जीत मिली थी।

इस बार के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी और भोगांव सीट पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। करहल सीट पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव खुद चुनाव जीते थे जबकि इटावा के जसवंतनगर विधानसभा सीट पर सपा के टिकट पर शिवपाल सिंह यादव विधायक चुने गए थे।

चुनाव जिताने में शिवपाल की बड़ी भूमिका

डिंपल यादव की चुनावी जीत में शिवपाल सिंह यादव की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। डिंपल यादव को जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी लीड मिली है जिसे शिवपाल सिंह यादव का गढ़ माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में शिवपाल सिंह ने सपा के टिकट पर जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। लोकसभा उपचुनाव के दौरान अपनी चुनावी सभाओं में शिवपाल ने लोगों से जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में डिंपल को भारी जीत दिलाने की अपील की थी।

सियासी जानकारों का मानना है कि शिवपाल की अपील ने काफी असर दिखाया है। जसवंतनगर के अलावा अन्य चुनाव क्षेत्रों में भी शिवपाल ने काफी मेहनत की थी। चुनावी जंग में उतरने से पहले डिंपल अपने पति अखिलेश यादव के साथ शिवपाल सिंह यादव के घर पहुंची थीं और उनका आशीर्वाद मांगा था। अखिलेश और डिंपल के इस कदम के बाद शिवपाल सिंह यादव डिंपल को जिताने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गए थे। उन्होंने अखिलेश के साथ भी चुनावी सभाएं संबोधित करके परिवार की एकजुटता का नमूना पेश किया था।

खत्म हो गई रिश्तों की खटास

मैनपुरी के सियासी रण में मिली जीत ने अखिलेश यादव को भी बड़ा सबक सिखाया है। दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को जसवंतनगर सीट से विधानसभा का टिकट तो जरूर दिया था मगर चाचा के चुनाव जीतने के बाद उनके शिवपाल से तनातनी के रिश्ते रहे हैं। सपा विधायकों की बैठक में भी शिवपाल सिंह यादव को नहीं बुलाया गया था। इस प्रकरण के बाद अखिलेश और शिवपाल के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी।

इस प्रकरण के बाद अखिलेश यादव ने भी शिवपाल को मनाने की कोई कोशिश नहीं की थी। हालांकि मुलायम के निधन के बाद चाचा और भतीजे में नजदीकी आई है और एक बार फिर परिवार एकजुट होता दिख रहा है। डिंपल को बड़ी जीत दिलाकर अखिलेश यादव एक तीर से कई निशाने साधने में कामयाब रहे हैं। चाचा और भतीजे के रिश्तों में आई खटास पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

डिंपल की जीत से सपा को मिली नई ताकत

सियासी जानकारों का मानना है कि मैनपुरी के जीत से मिले सबक के बाद अब अखिलेश यादव की ओर से शिवपाल को पूरा सम्मान मिलने की संभावना है। अखिलेश को भी इस बात का बखूबी एहसास हो चुका है कि मैनपुरी में डिंपल को जीत दिलाने में शिवपाल सिंह यादव की बड़ी भूमिका रही है। मैनपुरी के शुरुआती रुझान में डिंपल की स्थिति मजबूत होने के तत्काल बाद अखिलेश यादव खुद शिवपाल सिंह यादव के घर पहुंच गए और उन्हें समाजवादी पार्टी का झंडा थमाया।

सपा के लिए इस जीत का सबसे सुखद परिणाम यह रहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय हो गया है। शिवपाल सिंह यादव के भतीजे और जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक उर्फ अंशुल यादव ने शिवपाल की गाड़ी से प्रसपा का झंडा निकालकर समाजवादी पार्टी का झंडा लगा दिया। इसके बाद शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के पूरी तरह एकजुट होने और 2027 तक इसी तरह सक्रिय रहकर संघर्ष करने का ऐलान कर दिया है। डिंपल की जीत के साथ ही मुलायम का कुनबा पूरी तरह एकजुट हो गया है और आने वाले दिनों में इसका सियासी असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Snigdha Singh

Snigdha Singh

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