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हिंदुत्व की राह चली मनसे

Mayank Sharma

Mayank SharmaBy Mayank Sharma

Published on 23 Jan 2020 1:10 PM GMT

हिंदुत्व की राह चली मनसे
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मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने आज अपने पहले राज्यव्यापी सम्मलेन में अपने नए ध्वज का अनावरण किया। क्या मात्र ध्वज परिवर्तन ही मनसे का लक्ष्य है। नहीं, बिलकुल नहीं, और भी बहुत से परिवर्तन आज के मनसे अधिवेशन में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचित हुए। मंच शिवाजी महाराज की मूर्ति के साथ विनायक दामोदर सावरकर का चित्र भी दिखा जो कि पहले कभी नहीं दिखा था। हिन्दू विचारधारा पर मनसे का आगे बढ़ना लगना तय है। पिछले कई दिनों से जब भी हमने किसी वरिष्ट मनसे नेता से बात की तब उनका जवाब यही था कि हम कब हिंदूवादी नहीं थे। हिन्दुओं के खिलाफ जब भी कुछ घटा है, तब तब राज ठाकरे ने उसका मुखर रूप से किया है।

अमित राज ठाकरे का राजनीति में औपचारिक प्रवेश भी अधिवेशन के प्रमुख घटनाओं में से एक है। अमित राज ठाकरे मंच पर दिखते तो पहले भी रहे हैं, लेकिन आज पहली बार वो मंच से बोले भी। अधिवेशन का चौथा प्रस्ताव "शिक्षा" पर उन्होंने ही प्रस्तुत किया। अमित राज ठाकरे ने जल्द ही शैक्षिक परिषद् या सम्मलेन के आयोजन का भी प्रस्ताव रखा है। और सूत्रों के हवाले से खबर यही है कि इस शिक्षा सम्मेलन का नेतृत्व मनसे के युवा नेता अमित ठाकरे ही करेंगे।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अपने "महाराष्ट्र धर्म" का पालन करते हुए अब आगे बढ़ने जा रही है। नई लड़ाई का मुहूर्त प्रारम्भ हो चुका है, नए प्रारम्भ के लिए, शिवाजी की ओर मनसे अपना रुख कर लिया है। हिन्दू स्वराज्य निर्धारण की बात अब सभी मनसे सैनिक कहते नजर आये और शाम को राज ठाकरे अपने भाषण से इस चित्र को और भी साफ़ कर देंगे।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अब ऐसा लग रहा है कि शिवसेना के खिलाफ आक्रामक भी हो सकती है। क्योंकि कॉंग्रेस और एनसीपी के साथ शिवसेना का जाना बहुत से कार्यकर्ताओं एवं मराठी मानुसों को नागवार गुजर रहा है। शिवसेना का यह कदम शिवसेना के वोट बैंक में निश्चित रूप से सेंध लगाने वाला हो सकता है। कम से कम उन लोगों पर तो असर पड़ ही रहा है, जिन्होंने बाला साहेब को देखा हुआ है। ऐसा बहुत से शिवसैनिकों से बात करने के बाद ही कह रहे हैं हम। युवाओं पर इस गठजोड़ का असर हुआ है या नहीं, पता नहीं पर 45 + के शिवसैनिक इस फैसले दिग्भ्रमित दिख रहे हैं।

शायद इसी दुखती रग को राज ठाकरे ने टटोल लिया है और उस पर ही वे वार कर सकते हैं। शिवसेना भवन के ठीक सामने मनसे का भगवा बिलबोर्ड जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था, "सत्ता की खातिर 1760, महाराष्ट्र धर्म के लिए बस एक सम्राट" सीधी चुनौती देने जैसा था। और उस बिलबोर्ड से आगे के राज जल्द खुलेंगे जब राज ठाकरे आज शाम महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के सैनिकों को सम्बोधित करेंगे।

इन सब होने वाले परिवर्तनों से एकदम स्पष्ट है कि शिवसेना और मनसे अब आमने सामने होंगे। हिंदुत्व के मुद्दे पर जहाँ एक ओर शिवसेना कांग्रेस एवं एनसीपी के साथ जाकर अपनी जमीन खो रही है, वहीं मनसे अपनी खो चुकी जमीन को वापस पाना चाह रही है। सावरकर के मुद्दे पर कांग्रेस का मुखर विरोध और शिवसेना का साथ होने के कारण इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से बोल न पाना भी शिवसेना के विरुद्ध ही गया है। वहीं मनसे ने आज मंच पर सावरकर की तस्वीर का प्रवेश कराकर इस मुद्दे पर भी बाजी जीतने की कोशिश की है।

विचारधारा परिवर्तन के साथ अब मनसे - भाजपा के काफी करीब होगी। पिछले दिनों देवेंद्र फड़णवीज के साथ राज ठाकरे की मुलाकात पहले ही ऐसे संकेत दे चुकी है, कि भाजपा मनसे के रूप में नए दोस्त को अपना सकती है। जहाँ तक अधिवेशन की बात है, तो अधिवेशन में कुछ भाजपा नेताओं के पहुँचने के भी संकेत मिल रहे हैं।

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