सनातन धर्म का उत्थान होगा, हिंदुत्व समझ रहे हैं लोग-मोहन भागवत

इससे पूर्व प्रयागराज में आयोजित हुए कुंभ के बाद  भगवान श्री कृष्ण  की नगरी वृंदावन से एक बार फिर संतों ने  राम मंदिर निर्माण और  समान  नागरिक संहिता की अपनी मांग बुलंद की संतों ने अपनी यह मांग राष्ट्रीय स्वयंसवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के सामने रखी।

मथुराः राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि हमें हराने का समय गया। जनता ने हमको जिता जिता कर सब सिखा दिया है। अब समय के चौथे हिस्से में सब काम होने वाले है। सब कामों के सम्पन्न होने के पीछे भक्ति की शक्ति है। उन्होंने कहा कि हम धीरे धीरे जात पात को भी भूल रहे हैं। आने वाले समय में सनातन धर्म का उत्थान होगा। लोग आरएसएस के कार्यक्रम में आकर हिंदुत्व को सीख रहे है। संस्कृत हमारी राष्ट्र भाषा है।

इससे पूर्व प्रयागराज में आयोजित हुए कुंभ के बाद  भगवान श्री कृष्ण  की नगरी वृंदावन से एक बार फिर संतों ने  राम मंदिर निर्माण और  समान  नागरिक संहिता की अपनी मांग बुलंद की संतों ने अपनी यह मांग राष्ट्रीय स्वयंसवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के सामने रखी।

वक्त पूरी करेगा आपकी सब मांगें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आज वृंदावन पहुंचे जहां उन्होंने परिक्रमा मार्ग स्थित सुदामा कुटी में आयोजित 14 वा पुण्यतिथि वार्षिक उत्सव में भाग लिया । वहीं उत्सव में आए संतों द्वारा राम मंदिर और जम्मू कश्मीर से धारा 370 के साथ साथ गौ हत्या बंद होने की मांग की जिसके बाद मंच से लोगों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत बोले की जो आप चाहते हैं वह सब होगा मगर यह मैं नहीं करूंगा समय अपने आप करेगा ।

जिसके बाद उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता है भारत की आत्मीयता है जो भारत दुनिया को समय-समय पर देता रहा है वही उन्होंने यह भी कहा कि अब हमें हराने का समय गया और हम को जिता जिता कर सब सिखा दिया है ।

हम जात पात भूल रहे हैं

संघ प्रमुख ने कहा हम धीरे धीरे जात पात को भी भूल रहे हैं, सनातन धर्म का उत्थान होगा तो देश का भी उत्थान होगा। कई प्रदेशों के लोग भी अब बदल रहे हैं जो कि आर एस एस के कार्यक्रम में आकर आकर हिंदुत्व के बारे में सीख रहे हैं जान रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत हमारी राष्ट्रभाषा है विद्यालय और महाविद्यालय में संस्कृत का विषय रखा जाए समय-समय पर जो कार्य होने हैं वह है समय के चौथे हिस्से में सब काम होने वाले हैं और यह सब भक्ति की शक्ति है ।