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लोगों की अपार आस्था का केन्द्र बना बंदरे बाबा का अनोखा मंदिर

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raghvendraBy raghvendra

Published on 9 Feb 2018 8:19 AM GMT

लोगों की अपार आस्था का केन्द्र बना बंदरे बाबा का अनोखा मंदिर
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तेज प्रताप सिंह

गोंडा। भारत देश विविधताओं से भरा है। यहां हर गली-कूचे में अजीबोगरीब किस्से-कहानियां सुनने को मिल जाती हैं। यहां देवी-देवताओं से लेकर पशु-पक्षियों तक की पूजा होती है। गोंडा जिला भी इसका अपवाद नहीं है। जिले में एक ऐसा अनोखा मंदिर बना है जहां लोग किसी देवी-देवता की नहीं बल्कि एक मृत बंदर की समाधि पर हर रोज पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं।

कर्नलगंज तहसील क्षेत्र का रायपुर फकीर गांव अपने आप में काफी अनोखा है। इस गांव के मजरे लालापुरवा के निकट एक ऐसा मंदिर है जिसमें देवता के रूप में एक बंदर को पूजा जाता है। गोंडा-कटरा मार्ग पर गांव से बमुश्किल 200 मीटर दूर यह अनोखा मंदिर बना हुआ है। लोगों का विवास है कि इस मंदिर पर पूजा करने से बंदर देवता उनकी मनोकामना पूर्ण करने के साथ उनके संकट दूर कर देते हैं। मंगलवार को इस मंदिर पर मेला लगता है और खास पूजा होती है। इस दिन काफी संख्या में लोग अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए इस मंदिर में प्रार्थना करते हैं।

बंदरे बाबा मंदिर की कथा

मंदिर के पुजारी काली प्रसाद दूबे ने बताया कि वर्ष 1989 में एक बंदर कहीं से आया था जो रायपुर फकीर और लालापुरवा गांव के बीच रहता था। वह किसी को परेशान नहीं करता था। सितम्बर माह में गांव में ही राम चरित मानस का पाठ चल रहा था। तभी पता चला कि दूसरे सम्प्रदाय के लोगों ने उक्त बंदर की हत्या कर दी गई है। मानस पाठ कर रहे लोगों ने इसकी शिकायत थाने में की।

पुलिस ने बंदर के मृत शरीर को कब्जे में लेकर पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम कराया और हत्या का मुकदमा दर्ज किया। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस सतर्क हुई और आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गांव के लोगों ने हत्या वाले स्थान पर पंचायत बुलाई और सर्वसम्मति से बंदर के शव को दफनाकर कच्ची समाधि का निर्माण कर दिया। इस पर लोगों ने माथा टेककर मन्नतें मांगनी शुरू कर दी।

जनभावना को देखते हुए गांव के शिव कुमार श्रीवास्तव के पिता जगदीश प्रसाद ने अपनी खेती की भूमि में मंदिर निर्माण की मंजूरी दे दी। दो साल बाद इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण की भी योजना बनी और बंदर बाबा की मूर्ति स्थापित कर गांव के लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कर दिया गया। मंदिर के पास ही विशालकाय वट वृक्ष भी है।

बंदरे बाबा पूरी करते हैं मनोकामना

बंदरे बाबा के नाम से विख्यात मंदिर पर आसपास के गांवों की महिलाएं व पुरुष प्रतिदिन मत्था टेकने आते हैं और यहां पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं। वैसे तो आबादी से दूर यह छोटा सा मंदिर सुनसान जगह पर बना है मगर यहां के लोगों की बंदरे बाबा के प्रति अपार श्रद्घा है।

ग्रामीणों के मुताबिक बंदरे बाबा का यह मंदिर उनकी आस्था का केंद्र है। बुर्जुग जगदम्बा प्रसाद तिवारी बताते हैं कि लोगों का विश्वास है कि यहां पूजा करने से बंदर देवता उनकी मनोकामना को पूरा करते हैं और संकट दूर कर देते है। मंगलवार के दिन इस मंदिर पर मेला लगता है और लोग पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए बंदर देवता से प्रार्थना करते हैं। इस दिन जिले के दूरदराज के तमाम लोग भी आते हैं। यहां पर पूजा के साथ भजन-कीर्तन, ब्राह्मïण भोज, कन्या भोज का आयोजन भी होता है। मन्नत पूरी होने पर लोग श्रीमद्भागवत महापुराण सुनकर भंडारे का आयोजन करते है।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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