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Mohan Bhagwat Speech: विभाजन के इतिहास का दोहराव नहीं होने देंगे, खंडित भारत को अखंडित बनाना ही लक्ष्य

Mohan Bhagwat Speech in Noida: आरएसएस प्रमुख (RSS chief) ने नोएडा में कहा कि 'हम ही सही बाकी गलत की मानसिकता विभाजनकारी है। दूसरों के लिए भी वही आवश्यक मानना जो खुद को सही लगे गलत मानसिकता है।

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NetworkNewstrack NetworkShashi kant gautamPublished By Shashi kant gautam

Published on 25 Nov 2021 2:15 PM GMT

Mohan Bhagwat Speech in Noida: The history of partition will not be repeated, the goal is to make a fragmented India unbroken
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: photo - social media

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Mohan Bhagwat Speech in Noida: देश का विभाजन (partition of country) ना मिटने वाली वेदना है, यह तभी मिटेगी जब विभाजन निरस्त होगा। मेरा जन्म विभाजन के बाद हुआ, इस बात को समझने में बचपन के कुछ साल और लगे। मैंने काफी अध्ययन के बाद जाना जिस मातृभूमि की स्वतन्त्रता (freedom of the motherland) के लिए अनेकों बलिदान (Sacrifice) हुए उसका विभाजन हुआ।

भारत एक जमीन का टुकडा नहीं हमारी मातृभूमि है। संपूर्ण दुनिया को कुछ देने लायक हम तब होंगे, जब विभाजन हटेगा। यह राजनीति नहीं हमारे अस्तित्व का विषय है। यह बात गुरुवार को मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान कही, उन्होंने कहा कि खंडित भारत को अखंडित बनाना होगा यह हमारा राष्ट्रीय एवं धार्मिक कर्तव्य है।

आक्रमणकारियों की मनोवृत्ति अलगाव एवं स्वयं को बेहतर साबित करने की रही-भागवत

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा विभाजन इस्लामिक आक्रमण (Islamic attack), अंग्रेजों के आक्रमण का नतीजा है। इसकी पृष्ठभूमि इन आक्रमणों से जुड़ी है। आक्रमणकारियों की मनोवृत्ति अलगाव एवं स्वयं को बेहतर साबित करने की रही। अंग्रेजों (British rule) ने समझा कि बिना लोगों में अलगाव किए यहां राज नहीं कर सकते।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख ने कहा भारत के उत्थान में धर्म का हमेशा स्थान रहा है। 1947 की खंडित स्वतन्त्रता के बाद भी अलगाव की मानसिकता से टकराव जारी है। कैसे देश टूटा उस इतिहास को पढ़ना होगा। अप्रिय हो लेकिन जो सत्य हो वही इतिहास पढना जरूरी है। इतिहास को समझकर सीखकर आगे बढ़ना होगा। लेकिन जब एक बार अलगाव हो गया तो अब दंगें क्यों होते हैं।

राजा सबका होता है सबकी उन्नति उसका धर्म है- आरएसएस प्रमुख

आरएसएस प्रमुख (RSS chief) ने कहा हम ही सही बाकी गलत की मानसिकता विभाजनकारी। दूसरों के लिए भी वही आवश्यक मानना जो खुद को सही लगे गलत मानसिकता है। अपने प्रभुत्व का सपना देखना गलत है। राजा सबका होता है सबकी उन्नति उसका धर्म है। 2021 है 1947 नहीं अब विभाजन संभव नहीं है। भारत विभाजन को भूलेगा नहीं, अब विभाजन का प्रयास करने वालों का नुकसान तय है, यह मेरा आत्मविश्वास है।

उन्होंने कहा हिदू समाज को संगठित होने की आवश्यकता है। हमने समझौता कर लिया इसलिए विभाजन हुआ। हमारी संस्कृति कहती है विविधता में एकता है, इसलिए हिंदू यह नहीं कह सकता कि मुसलमान नहीं रहेंगे। सब मिलकर अनुशासन में रहेंगे यही हमारी संस्कृति है। अनुशासन का पालन सबको करना होगा। अशफाक उल्ला खान जैसे मुसलमान देश में हुए हैं जो जन्नत की जगह भारत में दोबारा जन्म की चाह रखते थे।

विभाजनकालीन भारत के साक्षी का लोकार्पण

कार्यक्रम में लेखक कृष्णानन्द सागर द्बारा लिखित एवं जागृति प्रकाशन द्बारा प्रकाशित पुस्तक विभाजनकालीन भारत के साक्षी का लोकार्पण मुख्य अतिथि मोहनराव भागवत ने किया। लेखक कृष्णानंद सागर ने कहा कि उनकी पुस्तक विभाजन के दौर में हुए षड्यंत्रों पर आधारित है।

शम्भू नाथ श्रीवास्तव पूर्व न्याधीश प्रयाग उच्च न्यायालय ने कहा कि इतिहास को बदल कर प्रस्तुत किया गया है। विभाजन के दौर में भारी नरसंहार हुआ। जिसके लिए पाकिस्तान पर मुकदमा दायर होना चाहिए। कृष्णानंद सागर की पुस्तक इतिहास के कई पक्षों को उजागर करेगी।

कार्यक्रम के दौरान श्रीराम आरावकर महामंत्री विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान (All India Institute of Education) , कुमार राम सदस्य सचिव भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, सुशील कुमार जैन अध्यक्ष भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर , रमन चावला भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर , योगेश शर्मा समन्वयक जागृति प्रकाशन सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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