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नहीं होगी मोहनलालगंज रेप की CBI जांच, बच्चे बोले- कैसे मिलेगा इंसाफ ?

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AdminBy Admin

Published on 18 March 2016 4:46 AM GMT

नहीं होगी मोहनलालगंज रेप की CBI जांच, बच्चे बोले- कैसे मिलेगा इंसाफ ?
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लखनऊ: दो साल पहले उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले मोहनलालगंज रेप और मर्डर मामले में सीबीआई जांच का इंतजार कर रहे परिजनों को जब इस बात का पता चला कि अब इस मामले की सीबीआई जांच नही हो सकेगी तो उनका हौसला टूट गया। मृतका के देवर और मासूम बच्चों ने newztrack.com से बात-चीत में बताया कि उन्हें सिर्फ सीबीआई से ही न्याय की उम्मीद थी, लेकिन एक दिन पहले पता चला कि सीबीआई ने जांच न करने की बात एक साल पहले ही सरकार को बता दी थी।

मृतका के देवर ओमप्रकाश (काल्‍पनिक नाम) ने कहा कि वक्त कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। लगभग दो साल इसी इंतजार में बीत गए कि कभी न कभी सच दुनिया के सामने आएगा, लेकिन अब तो सच आने से रहा। हां इस उम्मीद के टूट जाने के बाद से रातें लम्बी सी लगने लगी हैं। कल से पूरे परिवार पर ना उम्मीदी छायी हुई है। दो साल पहले अक्टूबर 2014 में जब हम अखिलेश यादव से मिले थे तो उस समय यह लगता था कि जांच होकर रहेगी और इस घिनौने काम में जितने लोग भी शामिल थे वे सभी के सभी सामने आएंगे।

अब हिम्मत नहीं है इसलिए सब कुछ किस्मत पर छोड़ना पड़ रहा है

ओम प्रकाश ने बताया कि हम उतने समर्थ नहीं हैं कि मामले की जांच के लिए उच्च अदालतों में अपील कर सकें और ना ही मेरे अलावा भाभी के बच्चों का पालन पोषण करने वाला कोई है। इसलिए हमें अब हर चीज किस्मत पर छोड़ देनी होगी, हालांकि उन्होंने इस बात को फिर दोहराया कि उन्हें आज भी पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।

सीबीआई ने जांच से कर दिया था मना

दो बार सीएम अखिलेश यादव द्वारा सीबीआई से पूरे मामले की जांच के बाद ओम प्रकाश को यकीन था कि जांच जल्द से जल्द होगी, लेकिन आरटीआई द्वारा खुलासा हुआ है कि सीबीआई ने २३ जुलाई 2015 हो ही मुख्य सचिव को को पत्र लिखकर जांच करने से मना कर दिया था।

जांच न करने का सीबीआई ने बताया था यह कारण

भारत सरकार ने 23 जुलाई 2015 को यूपी के मुख्य सचिव को सूचित किया कि मामले की समीक्षा सीबीआई के साथ की गई जिसमें सीबीआई ने बताया कि स्थानीय पुलिस ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से विवेचना कर आरोपपत्र प्रेषित कर दिया है जो फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित है। साथ ही सीबीआई के पास पूर्व में ही विवेचना के लिए कई केस लंबित हैं। अतः यह केस सीबीआई विवेचना के लिए उचित नहीं पाया गया और राज्य सरकार के निवेदन को नहीं माना जा रहा है।

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