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गेहूं खरीद योजना में अधिकारियों ने लगाया सरकार को करोड़ों का चूना

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 19 July 2018 4:27 AM GMT

गेहूं खरीद योजना में अधिकारियों ने लगाया सरकार को करोड़ों का चूना
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कुशीनगर: छोटे और मझोले किसानों के किसान कोड के सहारे प्रदेश के कुशीनगर जिले में गल्ला माफियाओं ने अधिकारियों से सांठगांठ करके सरकार को बड़ा चूना लगा दिया है। लगभग एक माह पूर्व पूरे हुए सरकार की महत्वाकांक्षी गेहूं खरीद योजना को लेकर प्रदेश की योगी सरकार अपना पीठ खुद थपथपाने में लगी हुई है।

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वहीं दूसरी ओर कुशीनगर जिले में हुए गेहूं खरीद में अधिकारियों द्वारा किए गए गोलमाल का जिन्न बाहर आने लगा है। गेहूं खरीद के गड़बड़झालों के जानकारों द्वारा किए जा रहे छानबीन में अभी तक सामने आ चुके आँकड़े बड़े घोटाले की चुगली करते दिख रहे हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि ऑनलाइन जारी हो चुके आँकड़ों में लघु सीमान्त और सीमान्त किसानों से लाखों लाख रुपये की गेहूं की खरीद दिखाई गयी है। कुशीनगर से हमारे संवाददाता की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

गेहूं खरीद की क्या प्रक्रिया थी

शासन द्वारा निर्धारित इस योजना में किसानों को उनके गांव के नजदीक एक क्रय केंद्र खोलकर गेहूं को खरीद किए जाने की बात कही गयी थी। भारत सरकार की भारतीय खाद्य निगम सहित यूपी सरकार की कुल सात बड़ी एजेंसियों को इस खरीद का जिम्मा दिया गया।

इन एजेंसियों ने सरकार की मंशानुरूप क्रय केन्द्र खोले। इनकी निगरानी के लिए सम्बन्धित एजेंसियों ने विभागीय लोगों को नोडल अधिकारी बनाया हुआ था। इन नोडल अधिकारियों के प्रगति की अनवरत निगरानी व समीक्षा के लिए जिला स्तर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व), उप संभागीय खाद्य व विपड़न अधिकारी और उप निबंधक सहकारी समितियां को जिम्मा दे रखा था।

कैसे हुआ गोलमाल

किसानों के गेहूं खरीद की आड़ में क्रय केन्द्र के प्रभारियों ने अपने उच्चस्थ अधिकारियों को मिलाकर ऐसा खरीद का रिकॉर्ड बनाया जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। कुशीनगर जिले में पड़ोसी जिले देवरिया, महराजगंज और यहां तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जिला गोरखपुर के किसानों का गेहूं का भी तौल हुआ दिखाया गया है।

आंकड़े साफ तौर पर चुगली कर रहे हैं कि गेहूं के इस खरीद में किसानों के गेहूं की तौल किए जाने के साथ ही तौल केन्द्र पर माफियाओं ने गल्ला माफियाओं के सहयोग से बड़ा गोलमाल किया है। माफियाओं ने करोड़ों रुपये का चूना सरकार को लगा दिया है।

विशुनपुरा ब्लॉक के दांदोपुर साधन सहकारी समिति पर पेशे से सरकारी राशन की दुकान के कोटेदार और मात्र 40 डिसमिल खेत के मालिक रामपाल और उनकी पत्नी वन्दना के नाम पर 355 क्विंटल गेहूं की खरीद चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी केंद्र पर कुल चार एकड़ जमीन जोतने वाले किसान गोरखनाथ यादव से 175 क्विंटल गेहूं का खरीद होना दर्शाया गया है जबकि इस किसान ने चार में से तीन एकड़ जमीन पर गन्ने की फसल लगा रखी है।

हाटा तहसील क्षेत्र के प्रक्रियात्मक सहकारी समिति के सचिव ने पड़ोसी जिले देवरिया के एक गांव के दो दर्जन से अधिक किसानों का गेहूं खरीद होना दर्शाया है। बताया जा रहा है कि उक्त सचिव भी उन्ही किसानों के मूल गांव का ही निवासी है।

इसी प्रकार रामकोला विकास खण्ड के आदर्श उप. सह. समिति,लाला छपरा और सुकरौली ब्लॉक के किसान उपभोक्ता सह. समिति लि., पड़री में एक ही किसान के किसान आईडी नम्बर पर दो दो बार और दो दो जगह खरीद होना दर्शाया गया है जबकि सम्बन्धित किसान के कृषि योग्य जमीन की खतौनी दूसरी कहानी बयाँ करती नजर आ रही है।

खरीद एजेंसी पैक्स के बाघनाथ (हाटा) और मिश्रौली बाजार (सुकरौली) खरीद केंद्र का प्रभार एक ही सचिव के पास है, यहां एक ही नाम और किसान आईडी के किसान का नाम दोनो जगह चढा होना सचिव के कारस्तानी की कहानी खुद बता रहा है।

उदाहरण के तौर पर कुछेक आँकड़े यहां लिखे जा रहे हैं लेकिन ईटीवी भारत को इस फर्जीवाड़े के जो ऑनलाइन दस्तावेज मिले हैं वो बेहद चौंकाने वाले हैं। गन्ना बाहुल्य क्षेत्र में दो लाख और तीन तीन लाख रुपए के गेहूं बेचने वाले किसानों की एक बड़ी संख्या बड़े गोलमाल का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।

कैसे हुआ खुलासा

गेहूं खरीद के इस गड़बड़झाले की कहानी आसानी से किसी से समझ मे नही आने वाली है। जिले के डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव फेडरेशन के अध्यक्ष और भाजपा के सहकारिता प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश सह संयोजक विजय प्रकाश दीक्षित की माने तो बड़ी ही चतुराई से सहकारी समितियों से जुड़े सचिवों और अधिकारियों ने करोडों रुपये का चूना सरकार को लगा दिया है।

श्री दीक्षित ने इसे सरकार को बदनाम करने की साजिश करार देते हुए बताया कि विभाग के ऑनलाइन आँकड़ों को प्रथम दृष्टया देखकर गड़बड़ी नही पकड़ी जा सकी लेकिन जब कई केंद्रों के आंकड़ों का मिलान किया गया तो सामने आया कि आसपास के केन्द्रों पर एक ही किसान की दो दो जगह खरीद को दर्शाया गया है।

काफी बड़ी संख्या में मध्यम श्रेणी के और छोटे किसानों के किसान कोड के जरिए दो लाख, तीन लाख और उससे भी ज्यादा रुपये के गेहूं की खरीद दिखाया गया है। प्रथम दृष्टया आँकड़ो को देखने के बाद भ्रष्टाचार की इस कहानी में दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए जिलाधिकारी और शासन को मैंने साक्ष्य के साथ पत्र भेज दिया है।

क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी

जिले में गेहूं खरीद के हुए घोटाले पर उप संभागीय खाद्य व विपड़न अधिकारी निश्चल आनन्द ने बताया कि मामले की शिकायत के बाद एडीएम ने जांच सौंपा है। गड़बड़ी किसके द्वारा की गई और कैसे की गयी इसकी छानबीन करायी जा रही है । किसान या कर्मचारी जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्यवाही होगी , मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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