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ख्वाब हमारे, गीत तुम्हारे: सरकारी योजनाओं पर पार्टियों में घमासान

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NewstrackBy Newstrack

Published on 2 May 2016 11:56 AM GMT

ख्वाब हमारे, गीत तुम्हारे: सरकारी योजनाओं पर पार्टियों में घमासान
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लखनऊ: चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सत्ता में बैठी पार्टियां अपनी सरकार के दौरान हुए कामों को गिनाकर वोटरों को लुभाने का काम कर रहे हैं। वहीं विपक्षी पार्टियां भी पीछे नहीं हैं। वे किसी भी योजना को अपनी पूर्ववर्ती सरकार का प्रोजेक्ट बताकर सत्तानशीं पार्टियों के दावों की हवा निकाल रही हैं।

कुछ ऐसा ही दावा बसपा सुप्रीमों मायावती भी बीते 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दिन कर चुकी हैं। उनके निशाने पर समाजवादी सरकार थी।

यह भ्‍ाी पढ़ें... बलिया में बोले अखिलेश- उज्ज्वला योजना से बड़ी है समाजवादी पेंशन योजना

उज्ज्वला योजना यूपीए-2 सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था

बीते एक मई को यूपी के बलिया जिले से लांच हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को भले ही मोदी सरकार दलित पिछड़े और बेहद गरीब परिवार के लिए वरदान होने का दावा कर रही हो, लेकिन पूर्व में केंद्रीय सत्ता में रही कांग्रेस का कहना है कि उज्ज्वला योजना यूपीए-2 सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसकी शुरुवात भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत यूपी के दो जिलों में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री जितिन प्रसाद ने एक लाख से ज्यादा कनेक्शन बांट कर दी थी।

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मायावती भी अखिलेश यादव को घेर चुकी हैं

यह पहला मौका नहीं हैं, इससे पहले अंबेडकर जयंती के मौके पर आगामी विधानसभा चुनाव की हुंकार भरने वाली बसपा सुप्रीमों मायवती ने भी अखिलेश सरकार की योजनाओं पर उन्हें जमकर घेरा। बसपा सुप्रीमों मायवती ने कहा था कि सपा सरकार जिस एक्सप्रेस वे और लखनऊ मेट्रो को अपनी उपलब्धि बता रही है। इन दोनों योजनाओं पर बसपा सरकार के कार्यकाल में काम शुरू हो गया था।

यह भ्‍ाी पढ़ें... जानिए, क्या है मोदी की उज्ज्वला योजना, कैसे करें APPLY ?

चुनाव तक बढ़ जाएगा इन मुद्दों पर घमासान

वरिष्ट पत्रकार रतन मणि लाल का कहना है कि अभी यह आरंभिक दौर है। आगे चलकर यह घमासान और तेज हो सकता हैं। चुनाव के समय सरकारों को अपने काम दिखाने पड़ेंगे। भारतीय राजनीति कि यह संस्कृति है जो दिखता है वही टिकता है।

रूलिंग पार्टी को मिलता है क्रेडिट

इस बारे मे बताते हुए वरिष्ट पत्रकार रतन मणि लाल ने कहा कि जब भी कोई योजना कागज पर और विचारों में जन्म लेती है तो उसे जमीन पर आने में वक़्त लगता है। विचार आने के बाद प्रोजेक्ट बनता है फिर इन्फ्रास्ट्रक्चर उसके बाद योजना को अंजाम देने वाले अधिकारी, तब जाकर योजनायें धरातल पर आती हैं।

जब कोई योजना सफल होती है तो उसका क्रेडिट हमेशा रूलिंग पार्टी को ही मिलता हैं। हां भारतीय राजनितिक संस्कृति में किसी असफल योजना का क्रेडिट कोई नहीं लेता। उन्होंने कहा कि भले ही कांग्रेस यह दावा करे लेकिन उसे यह भी बताना होगा कि 2010 के बाद के पांच सालों में यह योजना कितने लोगों तक पहुंची।

क्या कहती है बीजेपी

कांग्रेस के दावे पर बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि कांग्रेस का यह दावा हास्यास्पद है। इस योजना में देश की जनता बधाई की पात्र है। जिसने अपनी सब्सिडी छोड़ी जिससे सरकार ने गरीबों के घर तक इस एलपीजी के सिलेंडर पहुंचाए। उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना का सारा पैसा जनता द्वारा छोड़ी गई सब्सिडी का है।

कांग्रेस बताए कि सब्सिडी छोड़ने की योजना की शुरुवात उनके किस नेता ने की थी। जिससे वह इस योजना का श्रेय लेना चाहते हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य जनता तक हमारी योजनाएं पहुंचे। बाक़ी सब तय करना जनता का काम है।

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