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प्रियंका गांधी ने एक भाषण से बदल दी थी रायबरेली में फिज़ा

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 25 Jan 2019 7:56 AM GMT

प्रियंका गांधी ने एक भाषण से बदल दी थी रायबरेली में फिज़ा
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आज प्रियंका गाँधी को कांग्रेस की महासचिव की कमान मिलते ही कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं में ख़ुशी की लहर है... आज पूरा प्रयागराज प्रियंका गाँधी जिंदाबाद के नारों से गूँज उठा..
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शिवमनोहर पांडेय

रायबरेली: वाकया 1999 के लोकसभा चुनाव के प्रचार खत्म होने के एक दिन पहले का है। रायबरेली संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर कैप्टन सतीश शर्मा मैदान में उतरे थे। रायबरेली पारंपरिक तौर पर कांग्रेस की सीट रही है। पर 1999 के पहले के दो चुनावों में कांग्रेस की बहुत ही करारी हार हुई थी। भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह के आगे कांग्रेस को जमानत बचाना मुश्किल हो गया था। लगता था रायबरेली में कांग्रेस का जनाधार खत्म हो गया है।

ऐसे में कैप्टन शर्मा का जीतना संदिग्ध लग रहा था। उनके सामने भाजपा ने अरुण नेहरू को मैदान में उतारा था। दोनों ही प्रत्याशी रायबरेली को अच्छी तरह जानते थे। दोनों में कड़ी टक्कर थी। अरुण नेहरू मतदान के एक दिन पहले तक ज्यादा मजबूत माने जा रहे थे। चुनाव प्रचार खत्म होने के कुछ घंटे पहले शहर के जीआईसी मैदान में प्रियंका गांधी की चुनावी सभा रखी गई थी। भारी भीड़ जुटी। कांग्रेस के कई बड़े नेता भी इक्क_ा थे। नियत समय से कुछ देरी से प्रियंका मंच पर पहुंची।

प्रियंका ने अपना भाषण शुरू किया। प्रियंका ने ढेर सारी राजनीतिक बातचीत के बाद कहा, ‘रायबरेली मेरा घर है। मैं बचपन से ही अपने पिता के साथ रायबरेली आती रही हूं। आखिरी बार मैं अपने पिता से इसी रायबरेली के इसी मंच पर मिली थी। यहीं से वे तमिलनाडु चले गए थे और मैं दिल्ली चली गई थी। तमिलनाडु में उनकी हत्या कर दी गई और मैं फिर उनसे कभी मिली और न मिल पाऊंगी। आप सब मेरे हैं, मैं आपकी बेटी हूं। मगर एक शिकायत आप से करने आई हूं। जिन लोगों के हाथ मेरे पिता की हत्या में थे, उन्हें आपने रायबरेली में घुसने कैसे दिया।’

प्रियंका ने यह भी कहा, ‘मेरी मां ने कहा था कि मैं यह बात यहां न कहूं। परंतु अब मैं बड़ी हो गई हूं, अपना दर्द अपने घरवालों से नहीं कहूंगी तो किससे कहूंगी।’ प्रियंका का इशारा अरुण नेहरू के लिए था। प्रियंका के इसी संबोधन ने सभा का नजारा बदल दिया। कमजोर प्रत्याशी दिख रहे कैप्टन शर्मा ने भारी अंतर से अरुण नेहरू का हरा दिया। कार्यकर्ताओं को जोडक़र रखने की समझ प्रियंका के अंदर है। दरियापुर कृषि फार्म में किसान मेला था। वहां सोनिया गांधी के साथ प्रियंका भी थीं। पार्टी की स्थानीय गुटबाजी के कारण कुछ कार्यकर्ताओं को पास जारी नहीं किए गए थे। ऊंचाहार ब्लॉक का एक पदाधिकारी प्रवेश न मिलने के कारण मायूस खड़ा था। मेले में प्रवेश करते प्रियंका ने उन्हें देखा और गाड़ी रुकवा कर उनके पास आईं। पूछा कि यहां कैसे खड़े हो अंदर चलो। वहां खड़े कुछ अन्य मायूस कार्यकर्ता भी प्रियंका के साथ अंदर चले गए।

2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पांडेय कोठी में कार्यकर्ता एकत्र थे। प्रियंका अंदर मीटिंग में व्यस्त थीं। काफी देर हो चुकी थी। प्रियंका के बाहर निकलते ही मीडिया वालों ने उन्हें घेर लिया। कार्यकर्ताओं को लगा कि अब भी प्रियंका उनसे नहीं मिल पाएंगी। परंतु प्रियंका ने मीडिया को दो टूक जवाब दिया कि पहले मैं अपने कार्यकर्ताओं से मिलूंगी तब उसके बाद आप लोग आइए। यह सुनते ही कार्यकर्ताओं में जोश आ गया और सोनिया-प्रियंका जिन्दाबाद के नारे लगने शुरू हो गए।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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