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पुलवामा आतंकी हमला: शहीद श्याम बाबू की पत्नी की ये बातें हर किसी को कर देंगी भावुक...

शहीद श्याम की पत्नी रूबी बोली की उनके पति जल्दी आने का वादा कर के गए थे और आए भी तो इस तरह से। वह लोगों से अपने पति का चेहरा दिखाने की मांग कर रही थी। वह बार -बार एक ही बात कह रही थी कि “कोई एक बार ताबूत को खोलकर एक बार उनके पति का चेहरा तो दिखा दो।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 16 Feb 2019 10:47 AM GMT

पुलवामा आतंकी हमला: शहीद श्याम बाबू की पत्नी की ये बातें हर किसी को कर देंगी भावुक...
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कानपुर: शनिवार को शहीद श्याम बाबू का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पंहुचा। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए कई गांवों के लोग उनके गांव नोनारी पहुंचे। चारों तरफ ‘श्याम बाबू अमर रहे’ के नारे लग रहे थे। वहीं शहीद का परिवार पार्थिव शरीर देख कर रो पड़ा। ये देख वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भर आई। जब शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया तो पत्नी ने ताबूत खोल कर पति का चेहरा देखने की मांग कर दी।

शहीद श्याम की पत्नी रूबी बोली की उनके पति जल्दी आने का वादा कर के गए थे और आए भी तो इस तरह से। वह लोगों से अपने पति का चेहरा दिखाने की मांग कर रही थी। वह बार -बार एक ही बात कह रही थी कि “कोई एक बार ताबूत को खोलकर एक बार उनके पति का चेहरा तो दिखा दो। जब घर से गए थे तब देखा था मुझे नहीं पता था कि अंतिम बार देख रही हूं। अब बेटा लकी किससे फोन पर बात करेगा दो दिन से कह रहा है, पापा से बात कराओ”। पत्नी की यह बातें सुनकर हर किसी का दिल बैठ गया। सभी की आंखों से सिर्फ आंसू और चारों तरफ खामोसी छा गई। लेकिन उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो सकी। ताबूत का ढक्कन नहीं खोला गया।

वहां पर केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद थी। उन्होंने शहीद के परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि पुलवामा हमले के दोषी छोड़े नहीं जायेंगे। शहीद के परिवारों के साथ आज पूरा देश एक जुट हो कर खड़ा है। शहीदों के साथ सभी की संवेदनाए जुडी है। आज देश का हर नागरिक इस हमले से दुखी है। इसका जवाब आंतकवादियों और उनके आकाओं जरुर दिया जाएगा। शहीद श्याम बाबू को पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ़ ऑनर देकर सलामी दी गई। उसके बाद श्याम बाबू के छोटे भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी।

बता दे कि जनपद कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र के नोनारी गांव में रहने वाले श्याम बाबू पुलवामा आतंकवादी अटैक में शहीद हो गए थे। उनकी शहादत की खबर मिलने के बाद से पूरा परिवार और नोनारी गांव गम डूबा हुआ है। गांव के लोग इस कदर दुखी है कि उनके घरों में दो दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है।

श्याम बाबू अपने परिवार में भाई बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता राम प्रसाद किसान है। पूरे परिवार को उन पर शुरू से ही नाज था कि उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है। श्याम बाबू की शादी 6 साल पहले रूबी से हुई थी। उनका 4 साल का बेटा और 6 माह की बेटी है।

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