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कूज मुनिस्वामी से लेकर वीरप्पन तक का सफर दिखाएगी ये फिल्म

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Published on 13 May 2016 8:34 AM GMT

कूज मुनिस्वामी से लेकर वीरप्पन तक का सफर दिखाएगी ये फिल्म
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लखनऊः फिल्म रंगीला, सरकार, शिवा, भूत जैसी फिल्मों के डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा लगभग 7 साल बाद आज नवाबों के शहर लखनऊ में आए। उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म वीरप्पन के बारे में लोगों से बातचीत की।

डाकू वीरप्पन की है कहानी

राम गोपाल वर्मा ने newztrack को बताया कि ये तो हम सभी जानते हैं कि वीरप्पन एक खूंखार डाकू था लेकिन ये फिल्म दिखाएगी कि आखिर वो क्यों कूज मुनिस्वामी विरप्पा गोड़न से वीरप्पन बना और कैसे पुलिस ऑफिसर्स के ग्रुप ने उसे पकड़ा और कैसे वो मारा गया।

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प्रोडूसर बने पुलिसवाले

-इस फिल्म के प्रोडूसर सचिन जोशी इसमें पुलिस ऑफिसर की भी भूमिका निभा रहे हैं।

-उन्होंने बताया कि फिल्म के डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने उनसे कहा कि फिल्म में पुलिस ऑफिसर के किरदार के लिए उनकी पर्सनैलिटी फिट बैठती है।

-उसके बाद उन्हें इस फिल्म में पुलिस ऑफिसर का रोल मिल गया।

फैमिली फिल्म बनाने में नहीं है इंट्रेस्ट

-फैमिली ड्रामा क्यों नहीं बनाते हैं पूछने पर कहा कि मुझे फैमिली फिल्में बनाने में इंट्रेस्ट नहीं है।

-फैमिली फिल्में बनाने के लिए तो बहुत से लोग हैं और मैं इनसे अलग हूं।

-अभी वह फिल्म सरकार 3 पर काम कर रहे हैं।

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कौन था वीरप्पन?

-वीरप्पन का जन्म कर्नाटक में हुआ था उसका पूरा नाम कूज मुनिस्वामी विरप्पा गोड़न था।

-मात्र 18 साल की उम्र में ही वो एक खूंखार डाकू वीरप्पन बन गया।

-उसका मानना था कि उसकी बहन मारी और भाई अर्जुनन की हत्या के पीछे पुलिस जिम्मेदार है।

-उसने अपनी ही नवजात बेटी हत्या कर दी थी।

-उसे डर था कि उस नवजात के रोने की आवाज से पुलिस उसे पकड़ लेगी।

-वीरप्पन फेमस लोगों की हत्या और किडनैप कर अपनी मांगे रखने के लिए प्रसिद्ध था।

-उसने ना जाने कितने ही पुलिस ऑफिसर्स की हत्या कर दी।

-वीरप्पन ने लगभग 2000 हाथियों की भी हत्या कर दी थी।

-लगभग बीस साल बाद वीरप्पन को पुलिस पकड़ पाई थी।

-तमिलनाडु में 18 अक्टूबर 2004 में उसे मार दिया गया।

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