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सोमवती अमावस्या पर दुर्लभ संयोग में देवताओं का रहेगा संगम में प्रवास

कुंभ नगर में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के अदभुत संगम में न केवल श्रद्धालु बल्कि इस दिन देवता भी संगम में स्नान को आते हैं। इस दिन पुण्य की डुबकी लगाने के बाद दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन अन्न, वस्त्र , फल आदि का दान करना चाहिए।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 3 Feb 2019 9:32 AM GMT

सोमवती अमावस्या पर दुर्लभ संयोग में देवताओं का रहेगा संगम में प्रवास
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आशीष पाण्डेय,

कुंभ नगर: मौनी अमावस्या पर नक्षत्रों की अदभुत जुगलबंदी से सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग होगा जो कि लगभग पांच दशक बाद बन रहा है। तिथि विशेष पर मौन रखकर संगम में डुबकी अथवा गंगा स्नान का विशेष माहात्म्य है। इस दुर्लभ संयोग में संगम में देवता भी स्नान करेंगे।

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माघ का मुख्य स्नान और दुर्लभ तिथि से बढ़ रही स्नानार्थियों की भीड़

माघ मास के द्वितीय शाही स्नान माघी अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस पर इस बार चार सोमवार को पड़ रहा है। माघ की अमावस्या तिथि रविवार 3 फरवरी की रात 11.12 बजे लग रही है, जो कि सोमवार 4 फरवरी को देर रात 1.13 बजे तक रहेगी। इस बार मौनी अमावस्या को सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग है। जो लगभग पांच दशक बाद बन रहा है।

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संयम, समर्पण और त्याग, तपस्या और आध्यात्म के प्रतीक कुंभ का प्रमुख स्नान पर्व भी है। सोमवार का दिन, त्रिग्रहीय योग और नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी से कुंभ में इस बार श्रद्धालुओं पर अमृत वर्षा होगी। तिथि विशेष पर मौन रखकर प्रयागराज त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने का विशेष माहात्म्य है। इस दिन संगम में देवता भी अमृत योग में स्नान करेंगे।

मौन स्नान से मिलता है अनंत पुण्य

प्रयागराज के कुंभ में मुहूर्त के दौरान मौन रखकर संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की कई पीढ़ियां तर जाएंगी। ज्योतिर्विद आचार्य आशुतोष पाण्डेय ने बताया कि अमावस्या तिथि रविवार रात 11.12 बजे लगकर सोमवार रात 01.13 बजे तक रहेगी। सोमवार का दिन, श्रवण नक्षत्र, सिद्धि योग के अलावा मकर राशि में सूर्य, चंद्र व बुध का संचरण होने से त्रिग्रहीय योग का संयोग बन रहा है जबकि वृश्चिक राशि में वृहस्पति का संचरण होने से कुंभ योग बन रहा है।

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मौनी अमावस्या पर दान का भी है विशेष महत्व

कुंभ नगर में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के अदभुत संगम में न केवल श्रद्धालु बल्कि इस दिन देवता भी संगम में स्नान को आते हैं। इस दिन पुण्य की डुबकी लगाने के बाद दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन अन्न, वस्त्र , फल आदि का दान करना चाहिए।

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