भव्यता की अनूठी मिसाल है रशीद मस्जिद, इसे देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग

भव्यता की अनूठी मिसाल है रशीद मस्जिद, इसे देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग

महेश कुमार शिवा
सहारनपुर : इस्लामिक शिक्षा के केंद्र दारुल उलूम देवबंद की ऐसी प्रसिद्धि है कि इस संस्था से जिस इमारत का भी नाम जुड़ता है वह दुनिया भर में मशहूर हो जाती है। इसी का एक उदाहरण है मस्जिद रशीद जिसे देश में दूसरे ताजमहल के नाम से जाना जा रहा है। इसकी खूबसूरती चर्चाओं में है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।
रशीद मस्जिद की आधारशिला रखने का निर्णय दारुल उलूम देवबंद में 1987 में आयोजित मजलिस-ए-शुरा में लिया था। इस मस्जिद के निर्माण के लिए उस समय पच्चीस लाख रुपये का बजट पास किया गया था जो तीन दशक पहले बड़ी रकम थी।

मस्जिद का नाम मशहूर आलिमे दीन मौलाना रशीद अहमद गंगोही के नाम पर मस्जिद रशीद रखा गया। इसके बाद 1988 में हजरत मौलाना अब्दुल रशीद उर्फ नन्नू मियां, मुफ्ती-ए-आजम हजरत मौलाना मुफ्ती महमूद हसन, जानशीन शेखुल हदीस हजरत मौलाना मोहम्मद तलहा सहित अन्य शुरा सदस्यों ने मस्जिद की नींव रखी। मस्जिद को और अधिक भव्य रूप देने के लिए दो साल बाद मस्जिद के लिए पारित 25 लाख के बजट को बढ़ाकर 65 लाख रुपये कर दिया गया। शुरू में मस्जिद का क्षेत्रफल मौजूदा क्षेत्रफल से काफी छोटा था, परंतु निर्माण शुरू होने के बाद लोगों की मदद से इसका क्षेत्रफल बढ़ा दिया गया। क्षेत्रफल बढऩे के साथ ही इस मस्जिद के निर्माण का बजट बढ़ता गया और वर्तमान में यह बजट करोड़ों में पहुंच चुका है और अभी भी मस्जिद में निर्माण कार्य चल रहा है।

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इस मस्जिद का मुख्य द्वार 102 फीट चौड़ा व 50 फीट ऊंचा बनाया गया है। मुख्य द्वार में मस्जिद के अंदर प्रवेश करने के लिए पांच दरवाजे बनाए गए है जिसमें से मध्य में स्थित बड़े द्वार की चौड़ाई 20 फीट है। मस्जिद के द्वार के बाद एक बड़ा सेहन है जिसकी लंबाई 180 फीट और चौड़ाई 128 फीट है। सेहन के चारों ओर 16 फीट चौड़ा जालियों व पत्थरों से बना हुआ बरामदा है जिसके उत्तर व दक्षिण छोर पर एक-एक प्रवेश द्वार है तथा सेहन के बिल्कुल सामने मस्जिद की आलीशान तीन मंजिला इमारत बनी है। इस तीन मंजिला इमारत के बिल्कुल बीचोंबीच बेहद खूबसूरत व भव्य गुंबद बनाया गया है जिसकी चौड़ाई 60 गुणा 60 फीट और ऊंचाई 120 फीट है जिसके भीतर कम से कम 200 लोग आराम से नमाज अदा कर सकते हैं। मस्जिद के दोनों छोर पर दो भव्य व गगनचुंबी आलीशान मीनार बनाए गए है। मीनारों के बीच में खूबसूरत सीढिय़ां बनाई गई है जो कि मीनार के अंत तक पहुंचती है।

नमाजियों की सुविधा के लिए भव्य तहखाना
मस्जिद के नीचे नमाजियों की सुविधा के लिए एक भव्य तहखाना बनाया गया है तथा मस्जिद के मुख्य द्वार से दोनों ओर से तहखाने को जोडऩे के लिए जमीन के भीतर से रास्ता भी बनाया गया है जिसमें छात्रों के रहने के लिए कमरे भी बनाए गए है जिसके चलते मस्जिद के नीचे दारुल उलूम में पढऩे वाले छात्रों की एक बड़ी बस्ती आबाद है। राजस्थान से खासतौर पर मंगाए गए मकराना के सफेद संगमरमर व पत्थरों की बारीक नक्काशी से बनाई गई विश्वविख्यात मस्जिद रशीद सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में मस्जिद की खूबसूरती और बढ़ जाती है। इसके अलावा यह मस्जिद विख्यात दारुल उलूम देवबंद के दामन में बनी होने के कारण हर समय हजारों नमाजियों से आबाद रहती है। मस्जिद रशीद आजादी के बाद हिंदुस्तान में बनाई गई सभी मस्जिदों में सबसे भव्य, मजबूत और खूबसूरत बताई जा रही है। इसकी न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी खूब चर्चा है। इसे देखने के लिए भारी संख्या में टूरिस्ट यहां पहुंचते हैं।

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