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राजस्व परिषद के सदस्यों को राज्यों के चुनाव में ड्यूटी पर भेजने को चुनौती

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 29 Oct 2018 2:50 PM GMT

राजस्व परिषद के सदस्यों को राज्यों के चुनाव में ड्यूटी पर भेजने को चुनौती
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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उ.प्र. राजस्व परिषद के न्यायिक सदस्यों को पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में बतौर पर्यवेक्षक भेजे जाने के खिलाफ याचिका पर निर्वाचन आयोग व राज्य सरकार से जानकारी तलब की है और याचिका को सुनवाई हेतु 13 नवम्बर को पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति भारती सप्रू तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खण्डपीठ ने बार एसोसिएशन आफ रेवेन्यू के महासचिव बालकृष्ण पाण्डेय की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता मनीष पाण्डेय चुनाव आयोग के अधिवक्ता बी.एन.सिंह व राज्य सरकार की तरफ से निमाई दास व बी.पी.सिंह कछवाहा ने बहस की। याची का कहना है कि 8 अक्टूबर 18 व 17 अक्टूबर 18 के आदेश से राज्य सरकार ने राजस्व परिषद के न्यायकि सदस्य राजेश कुमार, श्याम सुन्दर शर्मा व हरिशंकर उपाध्याय को चुनाव ड्यूटी पर भेजा जा रहा है। राजस्व परिषद के सदस्यों को चुनाव पर्यवेक्षक बनाने से परिषद का न्यायिक कार्य पूरी तरह से ठप हो जायेगा। राज्य सरकार को न्यायिक कार्य ठप करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना वादकारियों के हित के खिलाफ है। कोर्ट ने विपक्षियों से याचिका में उठाये गये मुद्दों पर जानकारी मांगी है। सुनवाई 13 नवम्बर को होगी।

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कोर्ट की अन्‍य खबरें:

यादव सिंह के बेटे की जमानत अर्जी खारिज

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के चीफ इंजीनियर यादव सिंह के बेटे शमी यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन पर आय से अधिक सम्पत्ति मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद द्वारा दोबारा दाखिल जमानत अर्जी खारिज करने पर हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गयी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति डी.के.सिंह की खण्डपीठ ने दिया है। सीबीआई के अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने यह कहते हुए अर्ज की पोषणीयता पर आपत्ति की कि सुप्रीम कोर्ट जमानत पर रिहा करने का आदेश देने से इंकार करते हुए अर्जी खारिज कर चुकी है। कोर्ट ने याची पर लगे आरोपों को देखते हुए कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया।

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सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले ही होंगे बेदखल-ध्वस्त करने पर होगी व्यवस्था

प्रयागराज: इलाहाबाद के संगम क्षेत्र मलिन बस्ती संघ की याचिका पर कुम्भ मेलाधिकारी ने कोर्ट को बताया कि सड़क चैड़ीकरण की जद में आ रहे अवैध अतिक्रमण ही हटाये जा रहे हैं। यदि अन्य किसी उद्देश्य से मलिन बस्ती को उजाड़ा जायेगा तो उन्हें शिफ्ट किया जायेगा। अभी बस्ती को उजाड़ा नहीं जा रहा है। प्रशासन की इस जानकारी के बाद याची अधिवक्ता के.के.राय ने भी आपत्ति नहीं की किन्तु कहा कि बस्ती के लोगों की शिकायत पर मेलाधिकारी नियमानुसार निर्णय ले। कोर्ट ने सरकारी वकील की सहमति को देखते हुए कहा है कि यदि बस्ती के लोग अर्जी दे तो मेलाधिकारी मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर नियमानुसार निर्णय ले। कोर्ट ने अन्तरिम आदेश विखण्डित करते हुए अवमानना याचिका को आठ हफ्ते बाद पेश करने को आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया है। कोर्ट के इस आदेश से सड़क चैड़ीकरण की बाधाएं समाप्त हो गयी है।

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सीएम कार्यालय के ओएसडी कोर्ट में हाजिर

प्रयागराज: मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कार्याधिकारी अजय कुमार सिंह ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्होंने अनाधिकृत अतिक्रमण हटाने का ही पत्र लिखा है। कोर्ट ने पूछा कि यही केवल एक ही पत्र लिखा है। इसके बाद कोर्ट ने मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी व नगर आयुक्त प्रयागराज से भी हलफनामा मांगा है। मामले की सुनवाई 13 नवम्बर को होगी। न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने मित्रा प्रकाशन के कब्जे में उदासीन पंचायती अखाड़ा भवन को ध्वस्त कर दिया गया। यह भवन हाईकोर्ट की अभिरक्षा में था। ओएसडी के आदेश पर नगर आरयुक्त ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। यह आदेश अखाड़ा के महंत की अर्जी पर दिया गया। भवन से लाखों की चोरी कर ली गयी। जिसकी प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। कोर्ट की अनुमति बगैर भवन ध्वस्त करने पर कड़ी आपत्ति की और ओएसडी को तलब कर हलफनामा मांगा है।

सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर-अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता को गैर जमानती वारंट

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिंचाई विभाग लखनऊ के इंजीनियर इन चीफ, अलीगढ़ के नलकूप विभाग के अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने संबंधित सीजेएम को इन अधिकारियों को कस्टडी में लेकर 15 नवम्बर तक पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने 11 अक्टूबर को दो हजार का हर्जाना जमा कर माफी मांगी गयी जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने या हाजिर होने का निर्देश दिया था। इसका पालन नहीं किया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने द्वारिका प्रसाद की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता बी.एन.सिंह ने बहस की। याची पार्टटाइम ट्यूबबेल आपरेटर था। सभी को कोर्ट आदेश से नियमित किया गया और याची को हटा दिया गया। बिना सेवा समाप्त किये काम करने से रोक दिया गया। कोर्ट ने इसी पर कानून की जानकारी मांगी थी।

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