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Indian Hockey Team: पीलीभीत के लाल सिमरनजीत सिंह के गोल ने Olympic में भारत को दिलाई जीत, घर पर लगा बधाइयों का तांता

पीलीभीत (Pilibhit) जिले के रहने वाले एक हॉकी प्लेयर ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारत को जीत दिलाई है, जिसके बाद प्लेयर के घर पर ही नहीं बल्कि पूरे जनपद में खुशी का माहौल बना हुआ है।

Pranjal Gupata

Pranjal GupataReport Pranjal GupataAshikiPublished By Ashiki

Published on 5 Aug 2021 2:43 PM GMT

hockey player simranjit singh
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 पीलीभीत के लाल सिमरनजीत सिंह ने Tokyo Olympics में भारत को दिलाई जीत

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पीलीभीत: यूपी के पीलीभीत (Pilibhit) जिले के रहने वाले एक हॉकी प्लेयर ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारत को जीत दिलाई है, जिसके बाद प्लेयर के घर पर ही नहीं बल्कि पूरे जनपद में खुशी का माहौल बना हुआ है। टोक्यो ओलंपिक में भारत ने इतिहास रच दिया है। 40 साल के बाद भारतीय हॉकी टीम ने पदक जीत कर देश को गौरवान्वित किया है। इस गौरवान्वित पलों में पूरा देश ही नहीं पीलीभीत जनपद का छोटा सा गांव भी झूम रहा है।

जर्मनी (Germany Hockey Player) के खिलाफ भारतीय हाॅकी टीम ने आज कांस्य पदक (India Won Bronze Medal) जीता है। आपको बता दें कि भारतीय हॉकी टीम की इस जीत में उत्तरप्रदेश के पीलीभीत जनपद के छोटे से गांव के निवासी सिमरनजीत सिंह भी शामिल हैं। भारतीय हॉकी टीम में शामिल पीलीभीत के छोटे से गांव के रहने वाले हॉकी खिलाड़ी सिमरनजीत ने दो गोल किए हैं, जिसके बाद सिमरनजीत के गांव और घर में जश्न का माहौल बना हुआ है।


घर पर बधाई देने पहुंच रहे लोग

यही नहीं आसपास के लोग सिमरनजीत के घर पहुंचकर उनके माता-पिता को बधाइयां भी दे रहे हैं। वहीं हॉकी खिलाड़ी सिमरनजीत सिंह के पिता इकवाल सिंह का कहना है कि गर्व से सीना चौड़ा हो गया है। पीलीभीत जनपद के यूपी उत्तराखंड बॉर्डर स्थित मझोला इलाके के मझारा के रहने वाले इकबाल सिंह के घर में बड़े बेटे के रूप में जन्म लेने वाले सिमरनजीत सिंह की बड़ी ही रोचक कहानी है।


बचपन से ही थी खेलों में रूचि

सिमरनजीत सिंह शुरू से ही खेलों के प्रति अलग ही सोच रखते थे। अपने ताऊ रशपाल सिंह को रोल मॉडल मानते हुए हॉकी में हुनर आजमाने के लिए महज 10 साल की उम्र में सिमरजीत सिंह ने अपने माता पिता को छोड़ पंजाब जाने का फैसला किया। जहां पंजाब की चीमा हॉकी एकेडमी मैं दाखिला लेने के साथ-साथ ताऊ के घर रह कर ही सिमरजीत सिंह ने अपनी शिक्षा दीक्षा पूरी की।

परिजनों की मानें तो सिमरनजीत सिंह ने हॉकी खेलने के बाद कभी पलटकर नहीं देखा। पहले स्टेट लेवल और नेशनल लेवल के कई मैच खेल कर बेहतर प्रदर्शन कर भारतीय हॉकी टीम में अपनी जगह बनाई। अब सिमरनजीत सिंह अपने गांव के आसपास रहने वाले बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कुछ न कुछ करना भी चाहते हैं।


पंजाब में ताऊ के यहां रहकर ली ट्रेनिंग

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बने पीलीभीत के सिमरनजीत के पिता इकबाल सिंह ने खुशी जाहिर की। साथ ही बताया कि छोटी सी उम्र में अपने परिवार से दूर जाकर सिमरनजीत सिंह ने पंजाब में रहने वाले अपने ताऊ रशपाल सिंह के घर रह कर हॉकी की ट्रेनिंग ली। इसके लिए सुरजीत हॉकी एकेडमी जालंधर में दाखिला ले लिया। देखते ही देखते अपने प्रतिभा के बल पर पहले स्टेट और फिर नेशनल हॉकी टीम में अपनी जगह बना ली।

एक तरफ पिता को बेटे की उपलब्धि पर गर्व भी था तो दूसरी तरफ प्यार भी। पिता की माने तो लंबा अरसा बीत जाता है बेटे से मिलने के लिए। घरवालों को अपने बेटे को देखने के लिए तरसना पड़ता है। ऐसे में सिमरनजीत सिंह के मेडल और फोटो के सहारे ही परिवार वाले अपने बेटे को याद करते रहते हैं। सिमरनजीत के पिता का कहना है कि जब भी सिमरनजीत का मैच टीवी पर आता है। तो गांव में एक जश्न का माहौल देखने को मिलता है। गांव के कई लोग उनके घर टीवी पर मैच देखने के लिए भारी मात्रा में जमा हो जाते हैं।


इकबाल सिंह का कहना है कि गुरुवार को मैच खेलने जाने से पहले ही सभी लोग सिमरनजीत सिंह के लिए प्रार्थना कर रहे थे और मैच शुरू होते ही परिवार के लोगों ने टीवी के आगे बैठकर टीवी की ओर निगाहें जमा ली। परिवार के लोगों ने अपने बेटे सिमरनजीत को एक के बाद एक गोल करते देखा। वहीं भारत की जीत के बाद अब हॉकी खिलाड़ी सिमरनजीत के घर में जश्न का माहौल है। भारतीय हॉकी टीम का मुकाबला जर्मनी से था।

सिमरनजीत ने गुरुवार को हुए हॉकी के मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करते हुए दो गोल चटकाए। इसके साथ ही एक पेनल्टी कॉर्नर बनाते हुए भी टीम के खाते में एक और गोल जोड़ दिया, जिसका नतीजा रहा कि भारत ने जर्मनी को 5-4 से मात देते हुए टोक्यो ओलंपिक में लंबे समय बाद जीत हासिल कराई।

Ashiki

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