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Sant Kabir Nagar: संतकबीरनगर बिजली के निजीकरण के खिलाफ विरोध, कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

Sant Kabir Nagar: प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों ने बिजली के निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध दिवस विशेष रूप से राज्य के सभी जिलों में आयोजित किया गया।

Amit Pandey
Published on: 10 Jan 2025 8:50 PM IST
Employees protest against privatization of Sant Birnagar electricity
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संतकबीरनगर बिजली के निजीकरण के खिलाफ विरोध, कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन- (Photo- Social Media)

Sant Kabir Nagar News: उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर, प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों ने बिजली के निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध दिवस विशेष रूप से राज्य के सभी जिलों में आयोजित किया गया, जिसमें संतकबीरनगर जनपद में भी एक महत्वपूर्ण विरोध सभा का आयोजन किया गया।

कर्मचारियों ने 13 जनवरी को काली पट्टी बांधने और विरोध सभा करने का ऐलान किया है। संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय में शाम 5 बजे से यह सभा आयोजित की गई। इस विरोध सभा में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय और जिला स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें इं. मनोज कुमार, ई. राजेश कुमार, ई. मुकेश गुप्ता, राघवेन्द्र सिंह, शैलेन्द्र यादव, सुनील कुमार प्रजापति, भास्कर पाण्डे, योगेंद्र चौहान, आशीष कुमार, प्रदुम्न कुमार, रमेश प्रजापति, मनोज यादव, और रहमान अंसारी जैसे प्रमुख कर्मचारी उपस्थित रहे।

निजीकरण के खिलाफ संघर्ष

संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में, अवकाश के दौरान बिजली कर्मचारी आम उपभोक्ताओं के बीच जनजागरण अभियान चलाएंगे। यह अभियान रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के माध्यम से ग्राम पंचायतों और शहरों में पहुंचाया जाएगा, ताकि लोग निजीकरण से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक हो सकें।

राजधानी लखनऊ में स्थित शक्ति भवन पर भी विरोध सभा आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में बिजली कर्मचारी शामिल हुए। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को निजी हाथों में सौंपा जाता है, तो जल्द ही पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था का निजीकरण हो जाएगा, जिससे आम उपभोक्ता और बिजली कर्मचारी दोनों प्रभावित होंगे।

निजीकरण का प्रभाव

संघर्ष समिति के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निजीकरण का सबसे बड़ा असर गरीब और किसान वर्ग पर पड़ेगा, जो पहले से ही बिजली के बढ़ते बिलों से परेशान हैं। उन्होंने मुंबई का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बिजली निजीकरण के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 17-18 रुपये की दर से बिजली मिलती है। इसलिए समिति ने एक योजना बनाई है, जिसके तहत निजीकरण के प्रभाव को दिखाने के लिए बिजली टैरिफ चार्ट को घर-घर वितरित किया जाएगा।

इसके अलावा, समिति ने यह भी बताया कि निजीकरण से लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों और 26 हजार नियमित कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। विशेष रूप से अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों की पदावनति और छंटनी की आशंका जताई गई है, जैसा कि अन्य स्थानों पर देखा गया है।

प्रदेशभर में विरोध

राजधानी लखनऊ के अलावा प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों जैसे वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अयोध्या, देवी पाटन, सुल्तानपुर, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, मथुरा, झांसी और बांदा में भी विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों का यह आंदोलन निजीकरण के खिलाफ एक मजबूत संदेश दे रहा है और इस संघर्ष के अगले कदम 13 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।



Shashi kant gautam

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