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इंसेफ्लाइटिस से दम तोड़ता बचपन, 24 घंटे में 7 मासूमों की मौत

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Published on 14 Aug 2016 6:53 AM GMT

इंसेफ्लाइटिस से दम तोड़ता बचपन, 24 घंटे में 7 मासूमों की मौत
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गोरखपुर: इंसेफ्लाइटिस की चपेट में मासूमों का बचपन दम तोड़ रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले 24 घंटे में 7 मासूमों की मौत हो गई। इस साल एक दिन में सबसे ज्यादा मौतों का यह आकड़ा है। इंसेफ्लाइटिस का शिकार होने वाले इन 7 बच्चों में 3 गोरखपुर, 2 देवरिया, 1 महाराजगंज और 1 बिहार का था। इस साल अब तक यह बीमारी 135 मासूमों की जान ले चुकी है।

शनिवार को भी 16 नए मरीज बीआरडी में भर्ती कराए गए हैं। बीते 23 दिनों में इंसेफ्लाइटिस से 238 मासूमों को शिकार बनाया है जिनमें से 55 की मौत हो गई। 2016 में अब तक 525 मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो चुके हैं जिनमें 88 का बाल रोग विभाग में इलाज चल रहा है।

कैसे होती है बिमारी

-यह बिमारी जहां मच्छरों के काटने से होती है वहीँ दूषित पानी भी इसके होने का कारण है।

-इसके लिए खुले में शौच न करने, एक जगह पानी न इकठ्ठा होने, शौच के बाद हाथ सफाई से धोने के लिए जागरुक किया जा रहा है साथ ही -सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करने सलाह दी जा रही है। क्योंकि इसका प्रकोप ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई देता है।

मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य राजीव मिश्रा ने बताया कि

-इंसेफ्लाइटिस का हमला तेज हो गया है, लोगों को जागरूक करने के लिए रैलियां आयोजित की जा रही हैं।

-जागरुकता अभियान के लिए नुक्कड़ नाटकों की टीम चयनित करने के लिए विज्ञापन दिया गया है।

-इंसेफ्लाइटिस के मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज और बेड की व्यवस्था है।

इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन अभियान के चीफ ने क्‍या कहा

इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन अभियान के चीफ कैंपेनर डा. आर एन सिंह ने इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन के लिए बने राष्ट्रीय कार्यक्रम को रिलीज करने और उस पर प्रभावी अमल कराने की बात कही। इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन अभियान और पूर्वाञ्चल के आम जन इंसेफ्लाइटिस के 2014 में ही बन चुके नेशनल प्रोग्राम फार प्रिवेन्शन एंड कंट्रोल को रिलीज करने बात कही है। इसके लागू हो जाने से हर साल हजारों मासूमों को इंसेफ्लाइटिस से बचाया जा सकेगा।

कहां फैला है इंसेफ्लाइटिस

इंसेफ्लाइटिस पूर्वांचल के अलावा बिहार, असम, पश्चिमी बंगाल सहित कुल 19 प्रांतों की आधी आबादी में फैला है। हर साल हजारों मासूम इससे जान गंवा देते हैं। यह महामारी नेशनल प्रोग्राम के जरिये प्रिवेन्ट की जा सकती हॆ।

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