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एक RTI, सात साल, बदले कई सूचना आयुक्त, पर अब तक नहीं आया जवाब

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Published on 22 March 2016 6:43 AM GMT

एक RTI, सात साल, बदले कई सूचना आयुक्त, पर अब तक नहीं आया जवाब
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लखनऊ: आरटीआई एक्ट 2005 जब लागू हुआ तो आम जनता को सरकारी फाइलों में दफन जनहित की सूचनाएं मिलने की राह खुली। उम्मीद जगी कि अब भ्रष्टाचार पर रोक लग सकेगी। पर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल जुदा निकली। आलम यह है कि सूचना के इंतजार में कई साल गुजर जाते हैं और इस बीच दफ्तरों के चक्कर काट कर थक चुके आवेदक को मांगी गई सूचना का मतलब भी बेमतलब सा लगने लगता है।

ऐसे ही एक मामले में एक आरटीआई आवेदक सूचना के इंतजार में सात साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। सूचना पाने के लिए आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में अपील भी की। इस बीच कई सूचना आयुक्त बदले भी पर आरटीआई आज भी सूचना के इंतजार में अटकी हुई है।

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क्या है मामला

दरअसल, जौनपुर निवासी महेन्द्र कुमार विश्वकर्मा ने अपने बेटे का जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। उनका कहना है कि वह जाति के शिल्पकार (लोहार) हैं और केंद्र के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (संशोधन)अधिनियम 1956 के क्रम में यूपी सरकार ने भी शिल्पकार जाति को एससी/एसटी जाति में सूचीबद्ध किया है। इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने बेटे का एससी/एसटी जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। पर जब उनका यह प्रमाण-पत्र नहीं बना तो उन्होंने आरटीआई के जरिए 30 जनवरी 2009 को इसका कारण जानना चाहा।

अधिकारियों को लिखे कई रिमाइंडर पत्र

-30 जनवरी 2009 को उन्होंने डीएम आॅफिस के जन सूचना अधिकारी से इस बारे में सूचना मांगी।

-जवाब न मिलने पर उन्‍होंने जन सूचना अधिकारी को कई रिमाइंडर पत्र लिखे।

-जब वहां से सूचना नहीं मिली तो उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील की।

-उनका कहना है कि यहां भी तारीख पर तारीख मिलती रही पर सूचना नहीं मिली।

-इस बीच राज्य सूचना आयोग में कई सूचना आयुक्त बदले और इनका मामला भी अलग-अलग सूचना आयुक्तों के पास सुनवाई के लिए गया।

-मौजूदा समय में इनका मामला राज्य सूचना आयोग के कोर्ट नम्बर 5 में चल रहा है और राज्य सूचना आयुक्त पारस नाथ गुप्ता इसकी सुनवाई कर रहे हैं।

क्या कहते हैं आरटीआई कार्यकर्ता

-राजधानी के अलीगंज निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राम सेवक वर्मा का कहना है कि राज्य सूचना आयोग सिर्फ एक्ट की लकीर पीट रहा है।

-आज भी बड़ी तादाद में सूचना के लिए आवेदन लम्बित हैं। -पर इससे निपटने के लिए अब तक कोई रास्ता नहीं निकाला जा सका है।

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