धूल फांकेगा चीनः केजीएमयू के डॉक्टर ने 200 रुपये में बना दी ऐसी डिवाइस

कोरोना वायरस के तेजी से फैलने की रफ्तार को देखते हुए इस समय दांत के मरीजों का उपचार करना कठिन हो गया है क्योंकि हर वक्त डॉक्टर के संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में हाई वैक्यूम इवैक्यूएटर मशीन की मांग काफी बढ़ गई है। क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा कम रहता है।

चीनी टेक्नॉलॉजी को बाय-बाय। लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज के प्रोस्थोडांटिक्स विभाग के एक डॉक्टर ने ये करिश्मा कर दिखाया है और केवल दो सौ रुपये में डेंटल डिवाइस तैयार कर दी है। चीन के तेवर दिखाने के बाद ये पहला मौका है जब 15-20 हजार में बिक रही चीनी डिवाइस को बाहर का रास्ता दिखा कर बड़ा झटका दिया गया है।

इस पूर्णतः स्वदेसी इंट्रा ओरल हाई वैक्यूम इवैक्यूएटर (आइओ-एचवीई) को पेटेंट का टंपरेरी नंबर भी मिल गया है। जालंधर की एक कंपनी इस डिवाइस को तैयार कर रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इस डिवाइस का प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसका मरीज के दांत के प्रोसीजर के वक्त ट्रायल किया जाएगा। यदि इस दौरान इसमें किसी सुधार की आवश्यकता हुई तो कंपनी को बता दिया जाएगा। इसके बाद डिवाइस बाजार में बिक्री के लिए आ जाएगी।

कोरोना वायरस के तेजी से फैलने की रफ्तार को देखते हुए इस समय दांत के मरीजों का उपचार करना कठिन हो गया है क्योंकि हर वक्त डॉक्टर के संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में हाई वैक्यूम इवैक्यूएटर मशीन की मांग काफी बढ़ गई है। क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा कम रहता है। चूंकि ये मशीन चीन से आती है इसलिए इस दौरान इसकी कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं और चीनी कंपनियां तगड़ा मुनाफा पीट रही हैं।

कोरोना संक्रमण से भी बचाएगी

हाई वैक्यूम इवैक्यूएटर मशीन मरीज के मुंह से उड़ने वाले एयर सोल को एब्जॉर्व व तरल पदार्थ को भी सक कर लेती है। ऐसे में डॉ. लक्ष्य कुमार द्वारा तैयार ये इंट्रा ओरल हाई वैक्यूम इवैक्यूएटर (आइओ-एचवीई) काफी कीमती है। इस डिवाइस की कीमत दो सौ रुपये के लगभग बताई जा रही है।

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इस मशीन को एडजेस्टिंग डेंटल चेयर में ही लगाया जा सकेगा। प्रोसीजर के वक्त मरीज का मुंह बार-बार खोलना नहीं पड़ेगा। इस डिवाइस को लगाने के बाद मरीज का मुंह खुला रहेगा। इसमें एलईडी लाइट भी लगी होगी जिससे मुंह के अंदर देखना आसान होगा। इसके अलावा इस डिवाइस को विसंक्रमित कर दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।