दरवाजे पर खड़े साहब इंतजार कर रहे कोरोना का, आप तो नहीं है इनमें शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेतावनी के बावजूद हम इस खतरनाक वायरस के प्रति बेपरवाह हैं। ऐसे नहीं हो जाएगा कोरोना, कोई चिपक नहीं जाएगा, कोरोना जैसे जुमले बोल रहे हैं। हमें नहीं होगा कोरोना। मास्क नहीं लगा रहे हैं। दोस्तों के साथ झुंड बनाकर गली, मोहल्लों के नुक्कड़ घरों के बाहर, चौराहों पर अड़ी पंचायत लगाने की अपनी आदत को नहीं छोड़ पा रहे हैं।

लखनऊः कोरोना वायरस लगातार फैल रहा है। सिर्फ हमारी लापरवाही से इस वायरस को फैलने का स्पेस मिल रहा है। या ये कहें हम इस वायरस को अपने घर में दावत उड़ाने का पैगाम लेकर घूम रहे हैं। ये नहीं सोच पा रहे हैं कि हम खुद अपने परिवार के दुश्मन बन गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेतावनी के बावजूद हम इस खतरनाक वायरस के प्रति बेपरवाह हैं। ऐसे नहीं हो जाएगा कोरोना, कोई चिपक नहीं जाएगा, कोरोना जैसे जुमले बोल रहे हैं। हमें नहीं होगा कोरोना। मास्क नहीं लगा रहे हैं। दोस्तों के साथ झुंड बनाकर गली, मोहल्लों के नुक्कड़ घरों के बाहर, चौराहों पर अड़ी पंचायत लगाने की अपनी आदत को नहीं छोड़ पा रहे हैं।

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बाजार में जहां लोग मास्क लगाकर अपनी रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने आ रहे हैं। हम वहां गोल बनाकर खड़े होकर दुनिया जहान में कहां कोरोना कितना फैला। कितना खतरा बढ़ा की चिंता छोड़कर बगल के मोहल्ले में पड़ोस की गली में किसके लाठी पड़ी कौन दौड़ाया गया जैसे किस्से सुना रहे हैं।

हम बड़े बहादुर चार डंडे खाए, फिर मैदान में आ गए

बिना किसी काम के चौराहों पर लॉकडाउन का नजारा देखने खड़े हो रहे हैं। पुलिस को आते देखकर भागते हैं टकराते हैं गिरते हैं फिर पुलिस के जाते ही सड़क पर खड़े हो जाते हैं दूसरे को डंडे पड़ने की घटना के चश्मदीद बनकर चटकारे लेकर सुनाते हैं। अपनी बिना डंडा खाए भाग आने की बहादुरी के किस्से सुनाते हैं।

पुलिस के आते ही सिर पर पैर रखकर भागते हैं इस दौरान बुजुर्गों महिलाओं को धक्का मारकर गिराने में हमें संकोच नहीं होता। और पुलिस के जाते ही फिर सड़क पर आ जाते हैं।

इस दौरान लोगों की जरूरत का सामान बेच रहे ठेले वाले भी मार खाते हैं क्योंकि वह थोड़ा दूरी पर ठेला न लगाकर एक ही जगह सारे ठेले लगाकर खड़े हो जाते हैं।

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महिलाएं सामान खरीदने दो-तीन के झुंड में जा रही हैं। सब्जी लेते या सामान लेते समय इनके सिर जुड़े रहते हैं। सामान एक को लेना होता है दूसरी साथ देने को सामान खरीदवा रही होती है।

ये दे रहे हैं कोरोना को न्योता

अगर आप नहीं चेतेंगे अनजान लोगों को अपने घरों में टिकाएंगे तो कोरोना को दावत दे रहे हैं। जमातियों की जमात अलग कोरोना फैलाने में लगी है। लोग जानबूझकर गली मोहल्लों में थूक रहे हैं। पान पान मसाले खैनी पर रोक के बावजूद लोग ब्लैक में खरीदकर खा रहे हैं और जगह जगह थूक रहे हैं।

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अगर हम न चेते तो आने वाले समय में दाने दाने को मोहताज हो जाएंगे। कोरोना ऐसे कभी नहीं जाएगा। अभी देर नहीं हुई है आज ही से शपथ लें घर की लक्ष्मण रेखा न लांघें। रात नौ बजे दिये जलाकर कोरोना के खिलाफ अपनी संकल्पबद्धता को मजबूती दें। कोरोना को हराने के प्रति एकजुटता दिखाएं।

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