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Sonbhadra News: परिवहन विभाग में 17.37 लाख के गबन मामले ने मचाई खलबली, बैंककर्मी पर FIR से उलझी गुत्थी

Sonbhadra: 17.37 लाख के गुलगपाड़े का ठीकरा संबंधित बैंक की महिला कर्मी के सिर फोड़ने और इसको लेकर दर्ज कराई गई एफआईआर को लेकर तेजी से चर्चाएं शुरू हों गई हैं।

Kaushlendra Pandey
Published on: 1 Dec 2022 2:10 PM GMT
Sonbhadra News In Hindi
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lakhs rupees embezzlement (photo: social media )

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Sonbhadra News: ओवरलोड में सीज किए गए वाहनों को थानों से छोड़ने के लिए जारी हुए कथित फर्जी रिलीज आर्डर (fake release order) और वाहन चालकों से जमा कराई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रकरण के खुलासे के बाद, जमा कराने के कथित मामले को लेकर चर्चा में आया परिवहन महकमा एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार कार्यालय के प्रधान सहायक द्वारा जांच में सामने आए 17.37 लाख के गुलगपाड़े का ठीकरा संबंधित बैंक की महिला कर्मी के सिर फोड़ने और इसको लेकर दर्ज कराई गई एफआईआर को लेकर तेजी से चर्चाएं शुरू हों गई हैं।

प्रधान सहायक का दावा है कि उसने काउंटर पर ले जाकर धनराशि जमा की लेकिन उसे रसीद नहीं दी गई। फरवरी और मार्च में एक-एक दिन की राशि का जिक्र करते हुए कुल 17.37 लाख के गबन का आरोप लगाया गया है। वहीं संबंधित बैंक प्रबंधन ने ऐसी किसी बात से इंकार किया है और एफआईआर को विभागीय गड़बड़ियों पर पर्दा डालने से जुड़ी कवायद करार दिया है।

ये है प्रधान सहायक का दावा

प्रधान सहायक विनोद श्रीवास्तव का दावा है कि कार्यालय में कर्मियों की संख्या कम होने के कारण उसे चार कर्मियों का कार्य आवंटित किया गया था। उसके साथ कैश अनुभाग का भी काम आवंटित था। गत 17 फरवरी को 13,26,029 और गत 11 मार्च को 4,11,783 रूपये बैंक में जाकर जमा किया गया। यह वहां के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है।

आरोप है कि कैश काउंटर की बैंक कर्मी ने रूपया जमा कराने के लिए लेकर अपने पास रख लिया लेकिन अगले दिन जमा पर्ची नहीं दी गई। इस पर राबर्टसगंज कोतवाली में धारा 409 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर छानबीन भी शुरू कर दी गई है। उधर, संबंधित बैंक के प्रबंधक का कहना है कि संबंधित महिला कर्मी ने मई माह तक अपने टेबल का कार्य किया। इसके बाद अंडर सर्किल ट्रांसफर में रिलीव होकर पटना चली गई।

इस दौरान न तो प्रधान सहायक ने न ही विभाग के किसी अन्य व्यक्ति ने उन्हें या उनके बैंक के किसी जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी दी। महिला कर्मी के यहां से स्थानांतरित होने के बाद जून में अचानक से उनके सामने मामला लाया गया, जिसको लेकर विभागीय जांच भी की जा चुकी है। कहा जा रहा है कि जमा राशि का जहां अगले दिन चालान बिल के साथ कैश बुक में इंट्री का नियम है। वहीं, संबंधित एआरटीओ उसे ओके करते हैं और रोजाना उपर के अफसरों को इसकी रिपोर्ट देने के साथ, हर माह की क्लोजिंग में इसकी जांच भी की जाती है, बावजूद मई माह तक किसी की नजर इस पर क्यूं नहीं पड़ी? इसका जवाब फिलहाल अनुत्तरित है।

फर्जी रिलीज आर्डर का हुआ खुलासा

बताते चलें कि जिले के एआरटीओ दफ्तर का फर्जी रिलीज आर्डर बनाने का मामला विभागीय जांच में गत पांच जून को सामने आया था। उस समय जांच में फरवरी और मार्च में अलग-अलग तिथियों में 17,37,812 के रकम की मिसिंग ने मिर्जापुर से लेकर जोन कार्यालय वाराणसी तक खलबली मचा दी थी। आनन-फानन में यह रूपये बैंक में जमा कर, प्रकरण को शांत करने की कथित कोशिश भी सामने आई थी। डीएम चंद्रविजय सिंह की सख्ती के बाद, 56 वाहन स्वामियों-चालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।

तत्कालीन एआरटीओ और कार्यालय के प्रधान सहायक की भूमिका पर उठाए सवाल

तत्कालीन एआरटीओ और कार्यालय के प्रधान सहायक की भूमिका पर सवाल उठाए गए। इसको लेकर वाहन एसोसिएशन से जुडे़ लोगों ने जिले से लेकर निदेशालय तक के अधिकारियों के यहां शिकायत भी भेजी। वहीं फरवरी और मार्च माह की एक-एक दिन की रकम जमा न करने को लेकर जांच भी बैठाई गई। फर्जी रिलीज आर्डर के कुल कितने मामले हैं, इसके सत्यापन-तहकीकात के लिए भी टीम गठित हुई है लेकिन अब तक जांच पूरी न होने को लेकर जहां तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, दर्ज कराई गई एफआईआर का हवाला देकर, परिवहन महकमे के अफसरों द्वारा साधी जा रही चुप्पी को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।

Deepak Kumar

Deepak Kumar

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