सोनभद्र का ऐसा रहस्य: स्वर्ण भंडार के पीछे छिपी है अनोखी प्रेम कहानी

यूपी के सोनभद्र में मिले सोने के भंडार का पता तो चल गया लेकिन इसके पीछे की प्रेम कहानी अभी दुनिया के सामने नहीं आ पायी है।

मनीष श्रीवास्तव

 

लखनऊ। यूपी के सोनभद्र में मिले सोने के भंडार का पता तो चल गया लेकिन इसके पीछे की प्रेम कहानी अभी दुनिया के सामने नहीं आ पायी है। लोरिक और मंजरी की दसवीं सदी की यह प्रेम कहानी आज भी उत्तर भारत के आदिवासी समाज के जीवन का हिस्सा है। वो इस प्रेम कहानी से न सिर्फ प्रेम करना सीख रहा है बल्कि अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति जवाबदेह भी बना हुआ है।

लोरिक का मासूम चेहरा और बलशाली भुजाएं

इस प्रेम कहानी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गौरा के रहने वाले वीर लोरिक ने 200 किमी. दूर सोनभद्र के अगोरी स्टेट की रहने वाली मंजरी को अपना प्रेम प्रस्ताव दिया ,तो मंजरी कई रातों तक सो नहीं सकी थी। मगर मंजरी को देखने के बाद लोरिक ने सोच लिया था कि वो मंजरी के अलावा किसी से ब्याह नहीं करेगा, उधर मंजरी के ख्यालों में भी दिन रात केवल लोरिक का मासूम चेहरा और बलशाली भुजाएं थी।

राजा मोलागत की थी मंजरी पर बुरी निगाह

आदिवासियों के नायक लोरिक की कथा से सोनभद्र के ही एक अगोरी किले का गहरा सम्बन्ध है, यह किला आज भी मौजूद तो है मगर बहुत ही जीर्ण शीर्ण अवस्था में है। ईसा पूर्व निर्मित इस किले का दसवीं शती के आस पास खरवार और चन्देल राजाओं ने पुनर्निर्माण कराया था। दरअसल मंजरी अगोरी के रहने वाले मेहर नाम के ही एक अहीर की बेटी थी, जिस पर अगोरी के बेहद अत्याचारी राजा मोलागत की निगाह थी। जब मेहर को बेटी के प्यार का पता चला तो वो भयभीत हो गया क्योंकि उसे मोलागत के मंसूबों का पता था। मेहर ने लोरिक से तुरंत संपर्क किया और मंजरी से जिसका घर का नाम चंदा था तत्काल ब्याह करने को कहा।

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भीषण युद्ध और रक्तपात से बना रुधिरा नाला

माँ काली के भक्त लोरिक की शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी तलवार 85 मन की थी। युद्ध में वे अकेले हजारो के बराबर थे। लोरिक को पता था कि बिना मोलागत को पराजित किये वह मंजरी को विदा नहीं करा पायेगा। युद्ध की तैयारी के साथ बलिया से बारात सोन नदी तट के तक आ गयी ।

राजा मोलागत ने तमाम उपाय किये कि बारात सोन को न पार कर सके, लेकिन बारात नदी पार कर अगोरी किले तक जा पहुंची, भीषण युद्ध और रक्तपात हुआ। इतना खून बहा कि अगोरी से निलकने वाले नाले का नाम ही रुधिरा नाला पड़ गया और आज भी इसी नाम से जाना जाता है। मोलागत और उसकी सारी सेना और उसका अपार बलशाली इंद्रावत नामक हाथी भी इस युद्ध में मारा गया आज भी हाथी का एक प्रतीक प्रस्तर किले के सामने सोंन नदी में दिखता है।

हाथ नहीं लग पाया खजाना

लोरिक के साथ मोलागत और उसके कई मित्र राजाओं से हुए युद्ध के प्रतीक चिह्न किले के आस पास मौजूद है। कहा जाता है कि मोलागत का वध करने के बाद उसके खजाने को सोनभद्र में ही छुपा दिया गया। सोने की लालच में सोनभद्र पर कई विदेशी आक्रमकारियों ने भी आक्रमण किया पर कभी उनके हाथ खजाना नहीं लग पाया।

तलवार के एक ही वार से दो भागो में विभक्त कर दी विशाल चट्टान

मंजरी की विदाई के बाद डोली मौजूदा वाराणसी शक्तिनगर मार्ग के मारकुंडी पहाडी पर पहुंची। जहां पर नवविवाहिता मंजरी ने लोरिक के अपार बल को एक बार और देखने के लिए चुनौती दी और कहा कि कि कुछ ऐसा करो जिससे यहां के लोग याद रखें कि लोरिक और मंजरी कभी किस हद तक प्यार करते थे।

लोरिक ने पूछा कि बोलो मंजरी क्या करूं ? मंजरी ने लोरिक को एक विशाल चट्टान दिखाते हुए कहा कि वो अपनी तलवार से इस चट्टान को एक ही वार में दो भागो में विभक्त कर दें। लोरिक ने ऐसा ही किया और अपनी प्रेम परीक्षा में पास हो गए। माना जाता है कि इस अद्भुत प्रेम का प्रतीक वो खंडित शिलाखंड आज भी मौजूद हैं।

यादव सेना ने किया स्वर्ण भंडार पर दावां 

सोनभद्र में मिले स्वर्ण भंडार पर राष्ट्रीय यादव सेना ने दावां करते हुए कहा है कि यह खजाना यदुवंशी राजा लोरिक का है। यादव सेना सोमवार को इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल करेगी। यादव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज यादव ने रविवार को इस संबंध में जारी बयान में कहा है कि सोनभद्र पर हमेशा से ही यदुवंशियों का ही राज रहा है।

यादव सेना अध्यक्ष ने कहा कि अब सरकार को लोरिक का खजाना मिला है तो पहले लोरिक के वंशजों को को हिस्सा दिया जाए ताकि इस धनराशि से यूपी में यदुवंशी योद्धा वीर राजा अहीर लोरीक की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाए तथा यादव समाज के गरीब बच्चो के लिए निशुल्क शिक्षा, पुस्तकालय हॉस्पिटल, रोजगार उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि सोनभद्र में राजा वीर लोरिक से संबंधित स्थान जैसे अघोरी किला,वीर लोरिक स्टोन,मंजरी का महादेव मंदिर,वीर लोरिक जी का मां भवानी का प्राचीन मंदिर अब जर्जर हालत में है,सरकार इन ऐतिहासिक स्थल के रखरखाव पर ध्यान नहीं देती जिनके कारण दिन पर दिन यह ध्वस्त हो रहे है।

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