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Sonbhadra News: एक ऐसी अदालत, जहां एक झटके में जुड़ गए वर्षों से बिछड़े परिवार, अलग रह रहे 12 जोड़े आए साथ, पौधा भेंट कर सुखमय जीवन का दिया संदेश

Sonbhadra News: लोक अदालतें सामान्यतः सुलह-समझौते के जरिए वादों का निबटारा करने के लिए अपनी बड़ी पहचान रखती हैं। वहीं, लोक अदालत वर्षों से अलग-अलग रहे जोड़ों को भी एक करने का माध्यम बनने लगी है।

Kaushlendra Pandey
Published on: 8 March 2025 6:30 PM IST
Sonbhadra News
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Sonbhadra News (Image From Social Media)

Sonbhadra News: लोक अदालतें सामान्यतः सुलह-समझौते के जरिए वादों का निबटारा करने के लिए अपनी बड़ी पहचान रखती हैं। वहीं, लोक अदालत वर्षों से अलग-अलग रहे जोड़ों को भी एक करने का माध्यम बनने लगी है। शनिवार को जिला कचहरी परिसर में आयोजित लोक अदालत में 12 दंपतियों ने सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक रहने का फैसला ले लिया। आगे चलकर उनका जीवन खुशियों से भरा रहा, इसके लिए उन्हें पौधे भेंटकर, पौधे की तरह, वैवाहिक जीवन के भी देखभाल का संकल्प दिलाया गया।

बताते चलें कि जिला कचहरी में विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें कई आपराधिक एवं अन्य वाद निस्तारित किए गए। वहीं, इस दौरान वर्षों से एक दूसरे से अलग रह रहे, 12 जोड़ों को एक साथ रहने के लिए तैयार कर, पौधों की तरह, वैवाहिक जीवन को भी हरा-भरा रखने की बड़ी सीख दी गई। सुबह 10 बजे शुरू हुए लोक अदालत का शुभारंभ प्राधिकरण के अध्यक्ष/जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी बीएन सिंह एसपी अशोक कुमार मीणा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कहा कि लोक अदालतें, पक्षकारों के बीच सुलह-समझौता कराने के साथ उनके बीच की कटुता-वैमनस्यता को भी समाप्त कराने में अहम भूमिका निभाती है। कहा कि यह एक ऐसी अदालत है जहां किसी की हार नहीं होती बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है।

- परिवार न्यायालय का मानवीय चेहरा, एक हो गए 12 जोड़ेः

लोक अदालत ने जहां अन्य अदालतों की पहल खासी सराहनीय तो रही ही, परिवार न्यायालय का भी बड़ा मानवीय चेहरा सामने आया। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राजेंद्र सिंह की पहल पर यहां आए एक दर्जन विवाहित जोड़े चल रही मुकदमेबाजी को समाप्त कर, एक रहने को राजी हो गए। किसी ने बच्चों के भविष्य की खातिर एक होने का फैसला लिया तो किसी ने आगे का दांपत्य जीवन सुखमय तरीके से गुजारने के लिए एक होने की हामी भरी। ऐसे सभी दंपतियों को न्यायाधीश ने पौधा भेंट कर, जीवन को पौधे की तरह ही सहेज कर रखने का संदेश दिया। सुलह-समझौते के बाद न्यायालय में ही दंपतियों ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाई और वहीं न्यायाधीश ने पौधा भेंट किया। पति-पत्नी बेटी के साथ खुशी-खुशी घर के लिए रवाना हो गए।

Ramkrishna Vajpei

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