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Sonbhadra News : यूपी का एक ऐसा थाना, जहां वीडियो बनाना अपराध, थानेदार ने दिखाई दबंगई, तीन पत्रकारों पर केस
Sonbhadra News: सोनभद्र के आखिरी छोर पर स्थित शक्तिनगर थाने के थानेदार (प्रभारी निरीक्षक) ने कुछ ऐसी दबंगई दिखाई है कि हर कोई हैरान हो उठा है।
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Sonbhadra News: यूपी के आखिरी छोर पर स्थित सोनभद्र के आखिरी छोर पर स्थित शक्तिनगर थाने के थानेदार (प्रभारी निरीक्षक) ने कुछ ऐसी दबंगई दिखाई है कि हर कोई हैरान हो उठा है। दबंगई भरे अंदाज को लेकर तैनाती के समय से ही चर्चित रहने वाले, इस थानाध्यक्ष ने पहले अपने ही थाने पर तैनात, होमगार्ड से तहरीर लेकर केस दर्ज किया। आरोप है कि इसके बाद आरोपी बताए जा रहे पत्रकार को थाने पर बुलाकर मोबाइल भी छिन ली गई। जब इस पर पत्रकार संगठनों ने एतराज जताया तो गोपनीयता की दुहाई दी जाने लगी।
बताया जा रहा है कि शक्तिनगर थाना क्षेत्र में एक हत्या के मामले में एक थाने के कार्यालय में बैठाए रखा था। किसी ने इस दौरान अखबार पढ़ते हुए उसकी वीडियो बना ली और उसे वायरल कर दिया। जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, इंस्पेक्टर की तैयारियां चढ़ गई। थाने पर तैनात होमगार्ड बालगोविंद से तहरीर लेकर मंगलवार की सुबह लगभग आठ बजे शक्तिनगर क्षेत्र के तीन पत्रकारों पर बीएनएस की धारा 221, 132 बीएनएस और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर लॉज कर दिया। आरोप है कि इसके बाद आरोपी बनाए गए तीन में से एक पत्रकार को थाने बुलाकर, उसका मोबाइल लेकर रख लिया गया।
दो दिन पूर्व भी एक पत्रकार को लपेटे में लेने की हुई थी कोेशिश
बताते चलें कि इसी तरह उपरोक्त घटना के दो-तीन दिन पूर्व दुधीचुआ स्थित जिला पंचायत बैरियर पर मारपीट का मामला सामने आया था। आरोप है कि रास्ते से गुजर रहे जिस पत्रकार ने पुलिस को मारपीट की सूचना दी और अपने पत्रकारिता कर्तव्य का निर्वहन करते हुए, मारपीट की वीडियो बनाई, उसे भी अदब में लेने की कोशिश की गई। आरोपों के मुताबिक स्वयं प्रभारी निरीक्षक ने संबंधित पत्रकार को फोन कर मारपीट के उकसाने के आरोप में तहरीर पड़े होने की जानकारी दी और थाने बुलाया। बाद में पता चला कि ऐसा कुछ नहीं है। इस घटनाक्रम को बमुश्किल 48 घंटे बीत पाए थे कि एक दूसरे मामले में, तीन पत्रकार आरोपी बन गए। हालांकि आरोपी बने पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने कोई वीडियो ही नहीं बनाई।
जानिए, क्या कहता है गोपनीयता एक्ट
बताते चलें कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 के अनुसार पुलिस स्टेशनों में वीडियो और तस्वीरें लेना अपराध नहीं है। इसको लेकर पूर्व में बांबे हाईकोर्ट का आया एक निर्णय खासा चर्चा में रह चुका है। हालांकि क्षेत्राधिकारी पिपरी अमित कुमार का फोन पर कहना था कि जिस जगह वीडियो बनाई गई है। वह कार्यालय की जगह है और वह गोपनीयता से जुडी हुई जगह है। इसलिए वहां किसी तरह के फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की इजाजत नहीं दी जा सकती। सिर्फ थाना परिसर में ही इसकी इजाजत है। जो आरोपी हैं उन्हें पहले भी वीडियो बनाने को लेकर चेताया गया था। इस घटना क्रम के दो दिन पूर्व भी, एक पत्रकार को अदब में लेने की कोशिश पर कहा कि वह दूसरा मामला था। सवाल उठता है कि अगर प्रभारी निरीक्षक की नियत सही है तो उनकी तरफ से बार-बार पत्रकारों को अदब में लेने की कोशिश क्यूं की जा रही है?