SSP प्रयागराज व दहेज उत्पीड़न केस की विवेचक तलब, 6 अप्रैल को सुनवाई

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के एसएसपी के दहेज उत्पीड़न के मामले में महिला थाना की महिला पुलिस द्वारा विवेचना करने के आदेश के चलते विवेचना रुकी होने को गंभीरता से लिया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के एसएसपी के दहेज उत्पीड़न के मामले में महिला थाना की महिला पुलिस द्वारा विवेचना करने के आदेश के चलते विवेचना रुकी होने को गंभीरता से लिया है और एसएसपी व धूमनगंज में दर्ज दहेज उत्पीड़न के मामले के विवेचनाअधिकारी को 16 अप्रैल को रिपोर्ट के साथ तलब किया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने सुनीता उपाध्याय की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि एसएसपी इलाहाबाद के 8 जून 18 के आदेश में दहेज उत्पीड़न मामले महिला थानहले में दर्ज होंगे और महिला पुलिस द्वारा विवेचना करनेके रिपोर्ट पेश होगी।

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धूमनगंज पुलिस विवेचना नहीं कर रही है। महिला थाना में विवेचना अधिकारियों की कमी के कारण विवेचना पूरी करने में असमर्थ हैं। कोर्ट ने कहा कि एसएसपी इलाहाबाद ने आदेश तो दे दिये किन्तु मैनपावर व सुविधाएं उपलब्ध नहीं करायी वह विवेचना कराने के बजाय अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 16 अप्रैल को रिपोर्ट के साथ तलब किया है।

वाराणसी व मेरठ के नगर आयुक्त तलब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शहर से बाहर पशु कालोनी बनाने के मामले में नगर आयुक्त वाराणसी व मेरठ को 16 अप्रैल को हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने विजय कुमार चैधरी की जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका की सुनवाई खंडपीठ के एक न्यायमूर्ति के अलग होने के कारण नहीं हो सकी। आशुतोष द्विवेदी नगर आयुक्त वाराणसी व मनोज कुमार चैहान नगर आयुक्त मेरठ कोर्ट में हाजिर थे। उन्होंने अनुपालन हलफनामा दाखिल किया।

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मालूम है कि 1998 में सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों नगर आयुक्तों आवास विकास परिषदों को आदेश दिया है कि शहरों से बाहर पशुओं की कालोनी बना कर पशुओं को शिफ्ट करने का कार्य किया जाए। पालन न होने के कारण कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।