बाल कल्याण गृह में छात्रों का उपद्रव: संरक्षण आयोग ने ऐसी बात कह सभी को चौंका दिया

बाल कल्याण गृह में उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। हर एक दिन बाद यहां मौजूद छात्र उग्र होते दिख रहे। शुक्रवार को  बाल संरक्षण आयोग की सदस्य सुचिता चतुर्वेदी की मौजूदगी में एक बार फिर छात्रों ने जमकर तोड़फोड़ किया।

रायबरेली: बाल कल्याण गृह में उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। हर एक दिन बाद यहां मौजूद छात्र उग्र होते दिख रहे। शुक्रवार को  बाल संरक्षण आयोग की सदस्य सुचिता चतुर्वेदी की मौजूदगी में एक बार फिर छात्रों ने जमकर तोड़फोड़ किया। सुचिता चतुर्वेदी तीन दिन पूर्व बाल कल्याण अधिकारी की छात्रो द्वारा की पिटाई की जांच करने पहुंची थी।

इस बीच यहां मीडिया कर्मियों से बात करते हुए सुचिता चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह एक बाल गृह को मान्यता मिलती है उस मान्यता के अनुरूप ये बाल गृह नहीं चल रहा है। सुचिता चतुर्वेदी के बयान से बाल गृह प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

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आयोग की सदस्य ने कही ये बड़ी बात

उन्होंने कहा कि जैसा बच्चों से बातचीत की गई और उस दिन का कैमरा देखा गया तो उससे ये लगता है के हां कहीं न कहीं कुछ प्री प्लान था। प्रथम दृश्या ये दिखाई पड़ रहा है, कन्फर्म होकर नहीं बताया जा सकता। हमने कुछ साक्ष्य लिए हैं उसे वापस लखनऊ जाकर देखा जाएगा उसके बाद एक्शन लिया जाएगा।

आयोग की सदस्य ने मानक पर उंगली उठाते हुए कहा कि यहां पर एक भी काउंसलर नहीं है, बालिका गृह में पुरुष काम कर रहे हैं। एक महिला अधीक्षका है, बाक़ी वहां पर लेखा अधिकारी, कंप्यूटर आपरेटर सब पुरुष हैं। वो बालिका गृह में न बैठकर बाल गृह में बैठते हैं लेकिन कहीं न कहीं उसका दुरूपयोग देखने को मिला।

स्टोर में मौजूद चीजें व्यवस्थित नहीं थी। बच्चों को 6 महीने से ब्रश नहीं मिला। इतने बच्चों में एक साबुन दिया जाता है, जबकि नियम ये है के प्रत्येक बच्चों में एक साबुन, एक पेस्ट और एक तेल की शीशी, एक शैम्पू दिया जाए।

बच्चों को शैम्पू दिया नहीं जा रहा और स्टोर में उसे संरक्षित किया गया है। बड़ी बात आयोग की सदस्य में ये सामने आई के अनाथ बच्चों के लिए माता और पिता की भूमिका में कोई जिम्मेदार नजर नहीं आया।

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