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मदनी का सवाल- 457 दंगों के बाद भी मुलायम मुसलमानों के मसीहा कैसे ?

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NewstrackBy Newstrack

Published on 19 April 2016 12:07 PM GMT

मदनी का सवाल- 457 दंगों के बाद भी मुलायम मुसलमानों के मसीहा कैसे ?
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लखनऊ: राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के चेयरमैन मौलाना आमिर राशिद मदनी ने दंगों की संख्या से पीएम नरेंद्र मोदी और सपा सुप्रीमो की तुलना करते हुए सवाल उठाए हैं। मदनी ने यूपी में हुए दंगों को लेकर सपा सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने सपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे सीएम अखिलेश मुस्लिमों को केवल वोट बैंक तक ही सीमित रखते हैं।

सिर्फ एक दंगे से मोदी बने मुसलमानों के दुश्मन

मदनी ने दंगों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि गुजरात में एक दंगा होने के बाद से नरेंद्र मोदी को मुसलमानों का दुश्मन माना जाता है। जबकि मुलायम सिंह और उनके बेटे अखिलेश के राज में यूपी 457 बड़े दंगों के दौर से गुजरा है।

‘मुल्ला मुलायम’ खुद को साबित करें

इतने दंगों के बाद भी ‘मुल्ला मुलायम’ अपने आपको मुसलमानों का मसीहा साबित करने पर आमादा हैं। मदनी ने सभी पॉलिटिकल पार्टीज पर सेकुलरिज्म और कम्युनलिज्म के नाम मुसलामानों को ठगने का आरोप लगाया।

बीजेपी के नाम पर डराती हैं सभी पार्टियां

मदनी ने कहा कि कई सालों से पॉलिटिकल पार्टीज केवल बीजेपी के नाम पर मुसलमानों के मन में खौफ पैदा कर रही है। अपना वोट बैंक साधने में लगी हुई हैं।

अब नहीं बनेगा मुसलमान वोट बैंक

मदनी ने यह ऐलान किया कि अब मुसलमान ऐसी मौकापरस्त पॉलिटिकल पार्टीज के झांसे में आकर वोट बैंक नहीं बनेगा। इस दौरान मदनी ने नारा दिया कि अब 'मुसलमान दरबार में नहीं सरकार में रहेगा'। उन्होंने कहा कि ऐसी पार्टियां और नेता कभी मुसलमानों के सच्चे हमदर्द हो ही नहीं सकते हैं।

यादवों पर भारी पड़ेगी मुस्लिम-हिन्दू एकता

मदनी ने कहा अब तक हिंदू-मुस्लिम एकता का नारा चलता आया है, लेकिन अब मुस्लिम-हिंदू एकता का नारा लगेगा। उन्होंने अपील की, कि अगर मुसलमान, ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत सभी संगठित हो जाएं तो उन्हें कोई नहीं हरा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर ऐसा हुआ तो यह यादवों पर बहुत भारी पड़ेगा।

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