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सरकार के दबाव में होने से निष्पक्ष नहीं रही पत्रकारिता: सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश

सूचना आयुक्त गाज़ियाबाद के साहिबाबाद में मोहन नगर स्थित आईटीएस कॉलेज के सभागार में रविवार को विश्व संवाद वैशाली मोहन नगर शाखा के तत्वावधान में आयोजित महर्षि नारद जयंती समारोह में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 19 May 2019 3:15 PM GMT

सरकार के दबाव में होने से निष्पक्ष नहीं रही पत्रकारिता: सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि हर सरकार पत्रकारिता को दबाकर रखना चाहती है, इसलिए आज की पत्रकारिता निष्पक्ष नहीं रही है।

सूचना आयुक्त गाज़ियाबाद के साहिबाबाद में मोहन नगर स्थित आईटीएस कॉलेज के सभागार में रविवार को विश्व संवाद वैशाली मोहन नगर शाखा के तत्वावधान में आयोजित महर्षि नारद जयंती समारोह में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महर्षि नारद जी ने तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए न केवल समाज को दिशा दी, बल्कि समाज की बुराइयों को उजागर करते हुए कुरीतियों को त्यागने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नारद जी ने लोक कल्याण के कार्यों में सहयोग कर अच्छी विचारधारा के प्रचार और प्रसार का काम किया। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता निष्पक्ष नहीं रही है क्योंकि हर सरकार पत्रकारिता को दबाकर रखना चाहती है।

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उन्होंने कांग्रेस व अन्य विरोधी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों विचार धाराएं कभी भी देश के हित में नहीं रही। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तारीफ करते हुए कहा कि वह अच्छी सरकार चला रहे हैं। मोदी सरकार के बारे में उन्होंने कहा कि देश को पहली बार ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो देश का विकास कर रहा है और हर समाज को साथ लेकर चल रहा है।

कार्यक्रम में महानगर संघ चालक मक्खन लाल व महानगर प्रचार प्रमुख धीरज सिंह ने नारद जी को ब्रह्माजी के सात मानस पुत्रों में से एक बताया। जिन्हें ब्रह्माजी ने गृहस्थी बनने के लिये कहा, लेकिन उन्होंने लोक कल्याण की भावना के कारण अविवाहित रहने का व्रत लिया। वह महर्षि ब्यास, महर्षि बाल्मीकि और महर्षि शुकदेव के गुरू बताये जाते हैं तथा उनके भक्तों में सबसे प्रिय ध्रुव, अम्बरीश और प्रहलाद कहलाये। पत्रकारों का काम भी महर्षि नारद की तरह समाज को दिशा देना है और समाज से उन्हें सम्मान मिले या दुत्कार अपना काम समाज व राष्ट्रहित में करना होता है।

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इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने नारदजी को विश्व का पहला पत्रकार बताया। जिन्होंने वेदों का संपादन किया और कंठस्थ कर संजोकर रखी जाने वाली भारतीय संपदा और आध्यात्मिक ज्ञान को लिपिबद्ध किया। इस अवसर पर कुछ पत्रकारों को सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन सरस्वती माता के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी लोगों ने नारद जी को पुष्पांजलि अर्पित अर्पित की और इसके बाद सरस्वती की वंदना से कार्यक्रम आरंभ हुआ। कार्यक्रम का समापन विश्व शांति और सर्व मंगल कारी वेद मंत्र द्वारा की गई।

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