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Unnao News: साक्षी बोले- अखिलेश को कुंभ नहीं कुंभ में 2027 दिखाई दे रहा, 2025 के कुंभ मे 2027 के परिणाम का दर्द?
Unnao News: साक्षी महाराज ने कहा, "जिनके पास कोई मुद्दा नहीं है, इसी प्रकार अनर्गलप्रलाप करते हैं, उसमें से अखिलेश हैं। उनको कुंभ नहीं दिखाई दे रहा, कुंभ में 2027 दिखाई दे रहा है।
Sakshi Maharaj (photo; social media )
Unnao News: देश का सबसे बड़ा आयोजन महाकुंभ का समापन 26 फरवरी को हो गया है। पर राजनीतिक बयान बाजी अभी भी जारी है। प्रयागराज में हो रहे महाकुंभ पर सवाल खड़े करने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर साक्षी महाराज ने करारा जवाब दिया है। साक्षी महाराज ने कहा, "जिनके पास कोई मुद्दा नहीं है, इसी प्रकार अनर्गलप्रलाप करते हैं, उसमें से अखिलेश हैं। उनको कुंभ नहीं दिखाई दे रहा, कुंभ में 2027 दिखाई दे रहा है। क्योंकि 2025 के कुंभ ने 2027 का परिणाम सुनिश्चित कर दिया। वह कुछ और ही सपने देख रहे थे। 2025 के कुंभ ने 2027 का परिणाम घोषित कर दिया, उनका दर्द यह है।
भारतीय संस्कृति में और सनातन परंपरा में 2025 का कुंभ महापर्व एक इतिहास बनाकर आज जा रहा है। लगभग 67 करोड़ लोगों के द्वारा आज तक स्नान विश्व में ऐसा कहीं नहीं हुआ , हिंदुस्तान में भी आज तक ऐसा कहीं नहीं हुआ। यह कुंभ महापर्व एकता का संदेश देकर के गया है। देश एकता के रास्ते पर चल पड़ा है। सभी धर्म के लोगों ने एक अलग रास्ता पकड़ लिया है। 65 बरस तक पूरे हिंदुस्तान में पुष्टिकरण की राजनीति होती रही। इस हिंदुस्तान में मुसलमान को डराया धमकाया जाता रहा। भय दिखा भयभीत किया जाता रहा लेकिन पीएम मोदी ने सबके साथ सबके विकास के महामंत्र के साथ जो सारे देश में विकास किया उससे प्रेम का सो सौहार्द और वातावरण बना, और यह कुंभ सोने में सुहागा हो गया। जो कुंभ में स्नान करने ना आया हो, कम से कम उसके मन में पछतावा होगा कि हम क्यों नहीं पहुंच पाए। कुछ लोगों के सामने तो समस्या थी। 67 करोड़ का कुंभ में स्नान करना बहुत बड़ी बात है।
नाच ना आवे आंगन टेढ़ा
कुंभ का जिन लोगों ने विरोध किया वह विरोध आगे भी करेंगे। उन्हें गंगा मैया और सद्बुद्धि प्रदान करें। अखिलेश यादव के लिए कुछ कहना ठीक नहीं है ,इसलिए कहते हैं ना 'नाच ना आवे आंगन टेढ़ा' । जब वह सत्ता में थे तब वह इतना बड़ा आयोजन कर सकते थे किसने रोका था, लेकिन आज जब इतना बड़ा आयोजन मोदी और योगी के कृपा से हो गया है, एकता का इतना बड़ा संदेश चला गया है विभिन्न विरोधी दल राजनीतिक पार्टी की जमीन खिसक गई है। इसलिए ऊल जलूल बातें कर रहे हैं जिसका कोई तर्क नहीं है।