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मुजफ्फरनगर केस में आज तक न्यूज चैनल फर्जी स्टिंग ऑपरेशन दिखाने का दोषी

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AdminBy Admin

Published on 16 Feb 2016 8:09 AM GMT

मुजफ्फरनगर केस में आज तक न्यूज चैनल फर्जी स्टिंग ऑपरेशन दिखाने का दोषी
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लखनऊ: यूपी विधानसभा की सात मेंबर कमेटी ने न्यूज चैनल आज तक को अवमानना और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का दोषी पाया है। चैनल ने कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर फर्जी स्टिंग ऑपरेशन चलाया था। एडिटर सहित कई लोगों के खिलाफ आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

अब क्या होगा?

-सात मेंबर कमेटी के अध्यक्ष एसके निगम ने मंगलवार को 350 पेज की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी।

-अब रिपोर्ट पर सदन में चर्चा होगी। उसके बाद सदन तय करेगा कि न्यूज चैनल पर क्या कार्रवाई की जाए।

-कार्यमंत्रणा समिति तय करेगी कि रिपोर्ट पर चर्चा कब होगी।

स्टिंग से खराब हुआ माहौल

-रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरह से इस खबर को चलाया गया उससे सांप्रदायिक माहौल खराब हुआ है।

-कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, चैनल ने मांगे जाने पर फुटेज नहीं दिए।

-जांच में ये भी पाया गया कि मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर आजम खान के खिलाफ किया गया स्टिंग ऑपरेशन पूरी तरह से फर्जी था।

इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

रिपोर्ट में चैनल के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिया प्रसाद, आउअपुट हेड मनीष कुमार,एसआईटी हेड दीपक शर्मा, हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवर, एडिटर और एंकर पुण्य प्रसून बाजपेई, रिपोर्टर हरीश शर्मा, एंकर गौरव सावंत और पदम्बा जोशी के खिलाफ आइपीसी की धारा 153ए, 295ए, 463, 464, 469, 471, और सीआरपीसी की धारा 200, 202 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। अध्यक्ष एसके निगम के अलावा अन्य सदस्य मोहम्मद इमरान, संग्राम यादव, बृजलाल सोनकर, अमरपाल शर्मा, सुदेश शर्मा और दिलनवाज खान थे।

मीडिया बन गया टीआरपी का खेल

समिति के सभापति सतीश कुमार निगम ने स्टिंग ऑपरेशन संबंधि जांच सदन के पटल पर रखते हुए कहा कि मीडिया टीआरपी का खेल और व्यापार का साधन बन गया है। अपने व्यापार के अति उत्साह और पैसे की खेल में मीडिया के लोग क्या-क्या कर जाते हैं और उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। इसका इनको अहसास नहीं है।

ये लगी हैं धाराएं, इनका है ये मतलब

IPC 295ए- ऐसे काम जिससे किसी वर्ग या धर्म का अपमान हुआ हो या उनकी भावनाएं आहत हुई हों।

IPC 463- फर्ज़ी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉड्‌र्स का इस्तेमाल

IPC 464- फर्जी दस्तावेज तैयार करना

IPC 465- फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले को 2 साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों

IPC 469- किसी की छवि को क्षति पहुंचाने की दुर्भावना से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार कर उसका इस्तेमाल करना। इसमें दोषी होने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है।

IPC 471- फर्जी इलेक्ट्रॉनिक फुटेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना।

CrPc 200, CrPc 202- अभियोजन के लिए परिवादी की उपस्थिति आवश्यक है।

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