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मऊरानीपुर: जीत का सेहरा सर्वाधिक छह बार रहा कांग्रेस के नाम

झांसी का मऊरानीपुर विधानसभा सीट जहां कि सियासत में हमेशा रहा है कांग्रेस पार्टी का दबदबा वहीं भाजपा तीन, सपा बसपा एक- एक जीत दर्ज कर चुकी है।

Bishwa Maurya
Published on 23 Jan 2022 4:40 PM GMT
मऊरानीपुर: जीत का सेहरा सर्वाधिक छह बार रहा कांग्रेस के नाम
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UP Assembly Election

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झाँसी। जिले की मऊरानीपुर सीट सीट पर टिकट के लिए समाजवादी पार्टी छोड़कर रश्मि आर्य (Rashmi Arya) ने भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) का दामन थामा। वहीं पूर्व विधायक प्रागीलाल अहिरवार (Pragilal Ahirvar) व वर्तमान विधायक बिहारीलाल आर्य (Biharilal Arya) भाजपा के टिकट की जोर आजमाइश में थे लेकिन एक झटके में ही तीनों के भारतीय जनता पार्टी से चुनाव लड़ने के अरमानों पर पानी फिर गया। टिकट घोषित होते-होते यह सीट रोक दी गई और बगैर किसी घोषणा के इस सीट को भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) के अपना दल (Apna Dal) के हवाले कर दी गईं। 1980 से भारतीय जनता पार्टी के गठन से अब तक पहली बार मऊरानीपुर सीट (Mauranipur Assembly Seat) पर जनता के सामने न तो भारतीय जनता पार्टी मैदान में होगी और ना ही उसका कमल देखेगा।

जनता पार्टी के बिखराव के बाद 1980 में भारतीय जनता पार्टी का मुंबई अधिवेशन में गठन किया गया था और अटल बिहारी वाजपेई (Atal Bihari Bajpai) इसके अध्यक्ष बनाए गए थे ।1980 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने कमल से लड़ा था ।उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के 11 विधायक पहली बार विधानसभा में जीत कर पहुंचे थे। 1980 में भारतीय जनता पार्टी ने झांसी नगर निगम की पूर्व मेयर किरण वर्मा के ससुर भाजपा नेता राजू बुक सेलर के पिता हरदास बुक सेलर बुक पहली बार चुनाव में उतारा। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी लगातार चुनाव लड़ती रही है।

भारतीय जनता पार्टी को पहली बार भारतीय जनता पार्टी के प्रागी लाल अहिरवार ने जीत दिलाई थी। हालांकि भारतीय जनसंघ के प्रेम नारायण अहिरवार 1969 एवं 1977 में दो बार विधायक बन गए थे। भाजपा जनसंघ का ही परिवर्तित नाम है। प्रागीलाल अहिरवार 1989 1991 व 2002 का चुनाव जीतकर तीन बार विधायक रहे। 1991 से मऊरानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा से प्रागी लाल तथा कांग्रेस से बिहारी लाल आर्य परंपरागत प्रतिद्वंदी रहे। ऐसा कोई चुनाव नहीं रहा जिसमें दोनों प्रत्याशी आमने-सामने ना हो। अंतर से बना रहा प्रागी लाल अहिरवार जहां भारतीय जनता पार्टी से चुनावी मैदान में उतरते रहे वही बिहारी लाल आर्य कांग्रेसी से।पिछली बार 2017 के चुनाव में प्रागी लाल अहिरवार ने बसपा से चुनाव लड़ा वही बिहारी लाल मौका देखकर कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और विधायक बन गए।

मऊरानीपुर विधानसभा का इतिहास अगर देखा जाए तो 1957, 1962, 1967 तथा 1979 में कांग्रेस की बेनी भाई विधायक रहीं। 1669 में जनसंघ से प्रेम नारायण अहिरवार 2 बार चुनाव जीते। 1977 में भी जनता पार्टी की लहर में प्रेम नारायण अहिरवार विधायक बने। 1980 व 1985 में कांग्रेस के भागीरथ चौधरी विधायक बने। 1989 और 1991 में भाजपा के प्रागी लाल 1993 और 1996 में कांग्रेस के बिहारी लाल लाल विधायक बने। 2002 में भाजपा के टिकट पर प्रागी लाल अहिरवार तीसरी बार विधायक बने। 2007 में बहुजन समाज पार्टी के भगवती सागर ने बसपा का नीला झंडा फहराया। मायावती सरकार में मंत्री भी रहे।

2012 में पहली बार समाजवादी पार्टी की रश्मि आर्य ने जीत हासिल की। 2017 में बिहारी लाल आर्य भाजपा के टिकट पर विधायक का चुनाव जीतने में कामयाब रहे। भारतीय जनता पार्टी 1980 से लगातार चुनाव में भाजपा और कमल निशान दिखाई देते रहे परिणाम चाहे जो रहा हो लेकिन भाजपा ने मैदान नहीं छोड़ा। यह पहली बार हो रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को मऊरानीपुर सीट अपना दल को देना पड़ी।अपना दल ने अभी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। यह भी संभव है कि भाजपा का ही कोई नेता अपना दल के टिकट पर चुनावी समर में उतरे।

Bishwa Maurya

Bishwa Maurya

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