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मुजफ्फरनगर स्टिंग : विधानसभा में प्रस्ताव- स्टे पर पुनर्विचार करे SC

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AdminBy Admin

Published on 8 March 2016 12:38 PM GMT

मुजफ्फरनगर स्टिंग : विधानसभा में प्रस्ताव- स्टे पर पुनर्विचार करे  SC
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लखनऊ: मुजफ्फरनगर स्टिंग प्रकरण में यूपी विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट से सदन की कार्यवाही स्थगित करने के फैसले पर विचार करने का प्रस्ताव पारित हुआ। इससे एक बार फिर न्यूज चैनल आज तक के आरोपी जर्नलिस्टों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। विधानसभा में इस संबंध में लाया गया प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला उचित प्रतीत नहीं होता

-प्रस्ताव में कहा गया है कि विधानसभा देश के सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करती है।

-लेकिन केस संख्या 138 सुप्रिय प्रसाद बनाम राज्य सरकार के मामले में चार मार्च को ​सुप्रीम कोर्ट का दिया गया फैसला उचित प्रतीत नहीं होता है।

सदन की संप्रभुता पर प्रतिबंध लगाना ठीक नहीं

-प्रस्ताव में कहा गया है कि संविधान में विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियों को विशिष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

-सदन की संप्रभुता पर प्रतिबंध लगाना संवैधानिक रूप से ठीक नहीं है। सदन द्वारा गठित जांच समिति द्वारा आरोपियों को दोषी पाया गया है।

-उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत होकर अपना अभिमत व्यक्त करना है। ऐसे में सदन की कार्यवाही को स्थगित करना उचित प्रतीत नहीं होता है।

स्थगन के फैसले पर किया जाए पुर्नविचार

-प्रस्ताव में कहा गया है कि सु​प्रिय प्रसाद और अन्य मामले में सदन की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन दिया है।

-उस स्थगन के फैसले पर पुर्नविचार किया जाए।

सदन की कानूनी वैधता के साथ भाजपा पर दंगों के प्रकरण से अलग

-सदन में अपना पक्ष रखते हुए बीजेपी के सुरेश खन्ना ने कहा कि सदन अपने आप में सर्वोच्च् है। सुप्रीम कोर्ट का सम्मान है।

-विधानसभा की कार्यवाही में किसी तरह की हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। जिस संदर्भ में यह आदेश आया है।

-बीजेपी उससे पहले ही असहमति व्यक्त कर चुकी है और अपने को अलग कर चुकी है। बीजेपी लीगलटी में सदन के साथ है, लेकिन दंगों के प्रकरण में अलग है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

-सुप्रीम कोर्ट ने चार मार्च को फर्जी स्टिंग ऑपरेशन मामले में टीवी टुडे के पत्रकारों को विधानसभा में पेश होने के आदेश पर रोक लगा दी।

-यूपी सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में चार सप्ताह में जवाब मांगा।

-जर्नलिस्टों को 26 फरवरी को सदन में पेश होने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन लोगों की तरफ से सदन में पेश होने के लिए कम समय दिए जाने का हवाला दिया गया था।

-इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे ने आरोपियों को चार मार्च को सदन में पेश होने का आदेश दिया था।

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