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UP Election 2022: अमित शाह के कैराना दौरे पर टिकीं नजरें, पलायन फिर बन सकता है बड़ा मुद्दा

UP Election 2022: अमित शाह कैराना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह के समर्थन में घर-घर जाकर प्रचार करेंगे।

Anshuman Tiwari
Published on 21 Jan 2022 12:14 PM GMT
Amit Shah
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अमित शाह (photo : social media ) 

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UP Election 2022: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (UP Vidhan Sabha Chunav 2022) की घोषणा के बाद कल पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) यूपी के सियासी रण में कूदेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माने जाने वाली कैराना विधानसभा सीट (Kairana assembly seat) पर भाजपा के प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के बाद कैराना से हिंदुओं का पलायन (hinduon ka palayan) बड़ा मुद्दा बन गया था। यही कारण है कि प्रचार अभियान की शुरुआत के लिए कैराना को चुना जाना सियासी नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।

अमित शाह कैराना विधानसभा (Kairana assembly seat) क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह (BJP candidate Mriganka Singh) के समर्थन में घर-घर जाकर प्रचार करेंगे। वे शामली और बागपत में कार्यकर्ताओं की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इसके बाद अमित शाह का मेरठ जाने का भी कार्यक्रम है जहां वे प्रतिष्ठित नागरिकों के साथ चुनावी चर्चा करेंगे। उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति बनाने में अमित शाह की प्रमुख भूमिका रही है और ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का उनका दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिंदुओं का पलायन बना था मुद्दा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैराना का मुद्दा भाजपा की सियासी रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कैराना से हिंदुओं परिवारों का पलायन बड़ा मुद्दा बना था। भाजपा नेताओं की ओर से आरोप लगाया गया था कि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद कैराना से काफी संख्या में हिंदुओं को पलायन के लिए विवश किया गया। कैराना कस्बे से हिंदुओं का पलायन काफी संवेदनशील मुद्दा रहा है और इसी इलाके से अमित शाह भाजपा के प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे।

माना जा रहा है कि शाह के इस प्रचार अभियान से पलायन के मुद्दे को एक बार फिर हवा मिलेगी। मुजफ्फरनगर जिले में 40 फ़ीसदी से अधिक मुस्लिमों की आबादी है और 2017 के विधानसभा चुनाव में पलायन का मुद्दा उछलने से ध्रुवीकरण में मदद मिली थी। इस बार भी यह मुद्दा अपना रंग दिखा सकता है।

इस मुद्दे को उठाते रहे हैं शाह और योगी

केंद्रीय गृह मंत्री शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने भाषणों में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से सपा उम्मीदवार नाहिद हसन जीत हासिल करने में कामयाब हुए थे जबकि भाजपा की उम्मीदवार मृगांका सिंह दूसरे नंबर पर रही थीं। इस बार सपा की ओर से टिकट दिए जाने के बाद नाहिद हसन विवादों में घिर गए थे। भाजपा ने इस मुद्दे को खूब उछाला है और पार्टी की ओर से इस बार फिर मृगांका सिंह को ही चुनाव मैदान में उतारा गया है।

नामांकन के बाद ही नाहिद गिरफ्तार

सपा उम्मीदवार नाहिद हसन की ओर से नामांकन दाखिल किए जाने के एक दिन बाद ही उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है। नाहिद हसन की गिरफ्तारी गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई है। सपा की ओर से उन्हें टिकट दिए जाने के मुद्दे को भाजपा ने अपराधियों को संरक्षण देने वाला कदम बताया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अमित शाह के चुनाव प्रचार में उतरने के बाद भाजपा इस मुद्दे को और तेजी से उछालेगी। नाहिद हसन की जमानत अर्जी खारिज की जा चुकी है और अब उनकी बहन इकरा हसन उनके पक्ष में खड़ी हो गई हैं। उनका कहना है कि वे अपने भाई को बचाने के लिए कोई भी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।

हुकुम सिंह की बेटी हैं भाजपा प्रत्याशी मृगांका

दूसरी ओर भाजपा की ओर से उम्मीदवार बनाई गई मृगांका सिंह दिवंगत नेता हुकुम सिंह की बेटी हैं। हुकुम सिंह ने 1974 में पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की थी और उन्हें इलाके में काफी मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में चार बार कैराना सीट पर जीत हासिल की और 2014 में संसदीय चुनाव भी जीता। अब भाजपा की ओर से उनकी बेटी को एक बार फिर चुनाव मैदान में उतारा गया है और माना जा रहा है कि अमित शाह के चुनाव प्रचार में उतरने के बाद भाजपा के पक्ष में गोलबंदी तेजी से होगी।

Monika

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