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UP Election 2022: पहले चरण के मतदान वाली सीटों पर चुनाव प्रचार पर लगा ब्रेक, इन सीटों पर रहेगा रोचक मुकाबला

UP Election 2022: सात चरणों में होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के लिए वोट 10 फरवरी को डाले जाएंगे। इस चरण में वेस्ट यूपी की 58 विधानसभा सीटें हैं।

Krishna Chaudhary
Written By Krishna ChaudharyPublished By Vidushi Mishra
Updated on: 2022-02-09T12:29:03+05:30
UP Election 2022
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UP Election 2022: देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में सियासी दलों के इम्तिहान का वक्त आ चुका है। सात चरणों में होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के लिए वोट 10 फरवरी को डाले जाएंगे। इस चरण में वेस्ट यूपी की 58 विधानसभा सीटें हैं। जहां चुनाव प्रचार अब थम चुका है। कोरोना की तीसरी लहर के कारण चुनाव प्रचार काभी प्रभावित रहा। मतदान का समय सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है। कोरोना के खतरे को देखते हुए मतदान के दौरान कोविड प्रोटोकोल का पूरा पालन किया जाएगा। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले विधानसभा सीटों पर सुरक्षा के तगड़े प्रबंध किए गए हैं।

पहले चरण में इन जिलों में होगा मतदान
Voting in first phase

पहले चरण में पश्चिमी यूपी के 11 जिलों में मतदान होना है। जिसमे शामली की तीन, मुजफ्फरनगर की छह, बागपत की तीन, गाजियाबाद की पांच, हापुड़ की तीन, गौतम बुद्ध नगर की तीन, बुलंद शहर, मेरठ और अलीगढ़ की सात-सात, मथुरा की पांच और आगरा की नौ सीटें शामिल हैं।

2017 का परिणाम

2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने प्रथम चरण की 58 सीटों पर विशाल जीत दर्ज की थी। पार्टी ने 58 सीटों में से 53 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल किया था। वहीं सपा – कांग्रेस गठबंधन दो सीटों पर सिमट पर रह गई थी। वेस्ट यूपी में मजबूत माने जाने वाली बसपा भी दो सीटों पर रह गई थी।

वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी यूपी की पार्टी कही जाने वाली राष्ट्रीय लोक दल केवल एक सीट जीत पायी। पार्टी का इकलौता विधायक भी बाद में बीजेपी में चला गया। इस चुनाव में आरएलडी ने 23 जिलों की 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमे केवल एक सीट निकाल पायी।

प्रथम चरण वाली सीटों पर मुद्दे

पहले चरण में पश्चिम उत्तर प्रदेश की 58 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इन सीटों पर जाट मतदाता अच्छा प्रभाव रखते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि किसान आंदोलन में जाटों की कितनी सहभागिता थी। यही वजह है कि इन सीटों पर किसान आंदोलन सबसे बड़ा मुद्दा है। आंदोलन के दौरान मोदी सरकार द्वारा शुरू में अपनाए गए रूख से जाटों के एक बड़े तबके में बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। लखीमपुर खीरी कांड ने किसानों के गुस्से को और बढ़ा दिय़ा है।

इसके अलावा बेरोजगारी, गन्ना किसानों के मुद्दे और बिजली की बढ़ी हुई दरें भी यहां एक बड़ा मुद्दा है। कोरोना के कारण बड़ी संख्या में बेकारी बढ़ी है। लिहाजा रोजगार का मुद्दा भी सत्ताधारी बीजेपी की गले की फांस बन सकता है।

प्रथम चरण की इन सीटों पर रहेगी नजर

पहले चरण के मतदान में कई ऐसी सीटें जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई है। इनमे कई ऐसे सीटें हैं जिनमे योगी सरकार के कद्दावर मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा कई बाहुबली भी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाते हुए नजर रहे हैं। तो आइए एक नजर कैराना, बागपत, सरधना, हस्तिनापुर, लोनी, साहिबाबाद और नोएडा जिले की इन हाईप्रोफाइल विधानसभा सीटों पर नजर डालते हैं –

कैराना
Kairana

भाजपा के दिग्गज गुर्जर नेता रहे दिवंगत हुकूम सिंह का ये गढ़ रहा है। कैराना पलायन के मुद्दे को लेकर चर्चा में रहा है। बीजेपी इस मुद्दे को यहां जोर शोर से उठाती रही है। गृहमंत्री अमित शाह ने कैराना से ही विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरूआत की थी। हुकूम सिंह यहां से विधायकी औऱ सांसदी का चुनाव जीत चुके हैं। 2014 में उनके सांसद चुने जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमे उनकी बेटी मृगांका सिंह को शिकस्त का सामना करना। औऱ ये सीट सपा के खाते में चली गई।

सपा की तरफ से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नाहिद हसन इस सीट से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। एकबार फिर सपा ने उन्हें मैदान में उतारा है। जबकि मृगांका भी तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में देखना रोचक होगा कि क्या मृगांका सिंह जेल में बंद सपा प्रत्याशी नाहिद हसन को हराकर अपने पिता के खोए गढ़ को वापस ले पाती हैं।

लोनी
Loni

अली और बजरंगबली के नारे को लेकर गाजियाबाद का लोनी विधानसभा क्षेत्र (Loni Assembly Constituency) राष्ट्रीय मीडिया के सुर्खियों में रहा। भाजपा विधायक औऱ मौजूदा प्रत्याशी नंदकिशोर गुर्जर इन नारों के लेकर खासे चर्चा में रहे। सपा रालोद गठबंधन की तरफ से इस बार उनके सामने बाहुबली मदन भैया मैदान में हैं।

आरएलडी के सिंबल पर लड़ रहे मदन भैया को जहां जाट – मुस्लिम गठजोड़ के बदौलत चुनावी नैया पार होने का भरोसा है। वहीं बीजेपी उम्मीदवार नंदकिशोर गुर्जर को लगता है कि जनता हिंदुत्व औऱ अच्छी कानून व्यवस्था के कारण उन्हीं दोबार जीताकर विधानसभा भेजेगी।

साहिबाबाद
Sahibabad

गाजियाबाद जिले की साहिबाबाद विधानसभा सीट (Sahibabad assembly seat) भी चर्चित सीटों में शुमार है। 2017 में बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा सबसे अधिक मतों से यहां चुनाव जीतने में सफल रहे थे। उन्होंने कांग्रेस के अमरपाल शर्मा को डेढ़ लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया। बसपा के टिकट पर यहां से विधायक रह चुके अमरपाल आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं। फिलहाल जमानत पर बाहर आए अमरपाल को इस बार सपा ने अपना सिंबल दिया है। ऐसे में इस सीट पर एक बार फिर सुनील कुमार शर्मा बनाम अमरपाल शर्मा होता नजर आ रहा है।

हस्तिनापुर
Hastinapur

मेरठ की हस्तिनापुर(आरक्षित) सीट भी अपने हाईप्रोफाइल उम्मीदवारों के चलते चर्चा में है। बीजेपी ने जहां इस सीट से योगी सरकार में मंत्री दिनेश खटीक को चुनाव मैदान में उतारा है वहीं समाजवादी पार्टी ने योगेश वर्मा को टिकट दिया है। 2019 में प्रदेशभर में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ हिंसा भड़क गया था। दलित बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में भी हिंसा फैल गई थी। उस दौरान योगी सरकार ने योगेश वर्मा को हिंसा फैलाने के आरोप में जेल में डाल दिया था। योगी सरकार के इस फैसले को लेकर दलिता में काफी आक्रोश बताया जा रहा है।

सरधना
Sardhana

बीजेपी के सबसे फायरब्रांड नेता और योगी सरकार में मंत्री संगीत सोम सरधना से एकबार फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण को लेकर विवादों में आए संगीत सोम के सामने एकबार फिर सपा ने अतुल प्रधान को उतारा है। प्रधान 2017 में भी संगीत सोम के हाथों चुनाव हार चुके थे।

थानाभवन
Thanabhawan

गन्ने के लिए प्रसिध्द शामली जिले का थानाभवन विधानसभा सीट प्रदेश के हाईप्रोफाइल सीटों में शुमार है। यहां से सूबे के गन्ना मंत्री सुरेश राणा एकबार फिर चुनाव मैदान में हैं। मुस्लिम बहुल इस सीट से सुरेश राणा दो बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार उनके सामने सपा के अशरफ अली मैदान में हैं। सियासी जानकारों की मानें तो यहां के चुनाव नतीजों की धमक लखनऊ तक सुनाई देती है।

नोएडा
Noida

नोएडा विधानसभा सीट गौतमबुध्द नगर जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक हैं। पंकज सिंह 2017 में यहां से पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे होने के कारण ये सीट हाईप्रोफाइल सीटों में शुमार हो गई है। इस सीट से कांग्रेस ने चर्चित चेहरा पंखुड़ी पाठक को टिकट दिया है। तो वहीं सपा से सुनील चौधरी औऱ बसपा से कृपा राम शर्मा उम्मीदवार हैं।

मथुरा
Mathura

धर्मनगरी कहे जाने वाले मथुरा भी सूबे की चर्चित सीटों में शुमार है। यहां से प्रदेश के बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा विधायक हैं औऱ इस बार बीजेप के प्रत्याशी भी। कृष्णनगरी मथुरा बीजेपी के हिंतुत्व के एजेंडे के लिए भी बेहद जरूरी सीट है।

यही वजह है कि पार्टी पूरे दमखम के साथ यहां चुनाव लड़ रही है। मंत्री श्रीकांत शर्मा के सामने जहां सपा ने पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल, कांग्रेस ने प्रदीप माथुर औऱ बसपा ने जगजीत चौधरी को मैदान में उतारा है। कभी मथुरा से सांसद औऱ विधायक रहे रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पुनः इस सीट को गठबंधन की झोली में लाना चाहेंगे।

आगरा रूरल
Agra Rural

देश के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा जब किसी राज्य के गर्वनर को इस्तीफा दिलाकर विधानसभा चुनाव में लड़वाया जा रहा हो। आगरा रूरल से भाजपा प्रत्याशी बेबीरानी मोर्य अभी कुछ दिनों पहले तक उत्तराखंड के राजभवन में विराजमान थीं। जाटव बिरादरी से आने वाली मौर्य को बीजेपी ने मायावती की काट के रूप में प्रस्तुत किया है।

दलित बहुल आगरा रूरल सीट से बीजेपी ने जाटवों को साधने की कोशिश की है। उनके सामने बसपा की किरणप्रभा केसरी और कांग्रेस ने उपेंद्र सिंह मैदान में हैं। तो वहीं सीट पर जाटों के असर को देखते हुए रालोद ने महेश कुमार जाटव को मैदान में उतारा है।

अतरौली
Atrauli

अलीगढ़ जिले की अतरौली विधानसभा सीट से योगी सरकार में मंत्री संदीप सिंह बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं। पूर्व सीएम कल्याण सिंह के नाती और एटा सांसद राजवीर सिंह राजू के बेटे होने के कारण ये सीट भी हाईप्रोफाइल सीटों में शामिल है।

लोध बहुल इससीट पर सपा ने वीरेश यादव, बसपा ने ओमवीर सिंह और कांग्रेस ने धर्मेंद्र कुमार को टिकट दिया है। संदीप सिंह ने 2017 में पहली बार अतरौली सीटे से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इस सीट को उनके परिवार का गढ़ माना जाता है। पूर्व सीएम कल्याण सिंह 9 बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं।

जेवर
Jewar

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण को लेकर दुनियाभर में उसकी चर्चा है। इसबार यहां का विधानसभा चुनाव भी बेहद दिलचस्प होता नजर आ रहा है। कद्दावर गुर्जर नेता औऱ कई दलों का सफर तय कर चुके अवतार सिंह भड़ाना इस बार जेवर से बतौर रालोद उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पिछली बार वो बीजेपी के टिकट पर बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीते थे।

इसबार चुनाव से ऐन पहले गुर्जर सम्मान का बहाना देते हुए उन्होंने बीजेपी छोड़ रालोद ज्वाइन कर ली। गुर्जर-मुस्लिम और दलित वोटों की अच्छी संख्या वाले इस सीट से बीजेपी ने एकबार फिर ठाकुर धीरेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है।

first phase election polling , Shamli, Muzaffarnagar, three in Baghpat, five in Ghaziabad, three in Hapur, three in Gautam Buddha Nagar, seven each in Buland Shahar, Meerut and Aligarh, five in Mathura and nine in Agra.

Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

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