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UP Election 2022: पिता की कर्मभूमि से किस्मत आजमाएंगे अखिलेश, मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु का भी है रिश्ता

UP Election 2022: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अपने पिता और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के राजनीतिक गुरु स्व० नत्थू सिंह (Late Nathu Singh) की सैफ़ई से सटे मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगे।

Uvaish Choudhari
Published on 21 Jan 2022 11:55 AM GMT
UP Election 2022: पिता की कर्मभूमि से किस्मत आजमाएंगे अखिलेश, मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु का भी है रिश्ता
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UP Election 2022: उत्तर प्रदेश इटावा- सैफ़ई के लाल और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) सैफ़ई से सटे मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए उतरेंगे मैदान में। पिता मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने शिक्षा का दीप जलाया जहां से चार बार मुलायम सिंह यादव सांसद रहे मोजूदा वक्त में भी वह सांसद हैं। वहां से अब सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं।

मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु स्व० नत्थू सिंह ने भी इसी सीट से लड़ा था चुनाव

सैफ़ई सीमा से 4 किलोमीटर सटे मैनपुरी जनपद के करहल विधानसभा से अखिलेश यादव ने 2022 विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बना लिया हैं । औपचारिक घोषणा होना बाकी है। पिता मुलायम सिंह यादव राजनीति से पहले जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे राजनीति में आने के बाद लोकसभा में पहली बार 1996 में इसी मैनपुरी सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु स्व० नत्थू सिंह जोकि सैफ़ई के सहसारपुर गांव के निवासी थे और करहल विधानसभा से चुनाव जीते थे। सैफ़ई द्वत्तीय से नत्थू सिंह (Late Nathu Singh Yadav) के भतीजे अरविंद यादव जिला पंचायत सदस्य और सैफ़ई है।


सपा प्रमुख के कहरल (Karhal Assembly seat) से चुनाव लड़ने के एलान के बाद सूबे की इस विधानसभा सीट पर अब राजनीतिक दलों में चर्चा का विषय बन गयी हैं। कभी इस सीट से अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु रहे नत्थू सिंह भी विधायक रह चुके हैं। अब इसी सीट से अखिलेश यादव भी किस्मत आजमाएंगे।

पिता मुलायम और बेटे आखिलेश को नत्थू सिंह की सीट का सहारा राजनीतिक पहचान के लिए लेना पड़ा है।मुलायम सिंह यादव 1967 में पहली बार जसवंतनगर विधानसभा से चुनाव लड़ कर के निर्वाचित हुए हो तब उनका वह पहला चुनाव था लेकिन अखिलेश यादव साल 1999 में कन्नौज संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हो चुके थे।


अखिलेश यादव पहली बार लड़ रहे हैं विधानसभा चुनाव

असल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं। इसलिए यह सीट प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पहले इस बात की जानकारी सामने आई कि अखिलेश यादव पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की किसी सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे । इसके साथ ही कन्नौज, गुन्नौर और मैनपुरी विधानसभा सीट से अखिलेश यादव के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन चर्चाओं पर विराम लगते हुए अखिलेश यादव ने करहल सीट से चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया।

सैफ़ई परिवार की भरोसेमंद जनपद बना मैनपुरी

समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के भरोसेमंद लोग इस बात की जानकारी देते हैं। कि मैनपुरी जनपद के कई नेता अखिलेश यादव को मैनपुरी सदर सीट से चुनाव मैदान में उतरने की मांग कर रहे थे लेकिन अखिलेश यादव ने अपने बेहद करीबी माने जाने वाले विधान परिषद सदस्य अरविंद यादव के प्रस्ताव को स्वीकार कर करहल से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। एक नई राजनीति को जन्म दे दिया है।

अखिलेश यादव के पिता नेता जी मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav's political mentor Nathu Singh Yadav) की विधानसभा सीट रही है। राजनीति के जानकार उदयभान सिंह यादव ऐसा बताते हैं कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश मैनपुरी जिले की जिस करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे है कभी इस सीट से उनके पिता मुलायम सिंह यादव के राजनैतिक गुरु नत्थू सिंह चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे।

सैफ़ई के सहसारपुरा निवासी नत्थू सिंह यादव के बारे में ऐसा कहा जाता है की 1957 का विधानसभा चुनाव उन्होंने करहल विधानसभा सीट से लड़ा था लेकिन 1962 का चुनाव जसवंतनगर सीट से किस्मत आजमाए जिसमें नत्थू सिंह को कामयाबी हासिल हुई।


वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर सीट को नत्थू सिंह ने छोड़ कर मुलायम सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया था। इस तरह पहली बार मुलायम सिंह यादव 1967 में विधायक बन करके विधानसभा में पहुंचे थे।

करहल विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक

करहल विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है। करहल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का सात बार से कब्जा रहा है। इस विधासभा सीट से 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी के बाबूराम यादव, 1989 और 1991 में समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) और 1993, 1996 में सपा के टिकट पर बाबूराम यादव विधायक निर्वाचित हुए । 2000 के उपचुनाव में सपा के अनिल यादव, 2002 में बीजेपी और 2007, 2012 और 2017 में सपा के टिकट पर सोवरन सिंह यादव विधायक चुने गए।

मैनपुरी की करहल सीट यादव बाहुल्य है और 2002 को छोड़ दिया जाए तो पिछले करीब 32 साल से इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है। 2002 में सोवरन सिंह ने यह सीट बीजेपी की झोली में डाली थी, जो बाद में सपा में शामिल हो गए।


मैनपुरी से सैफ़ई परिवार का राजनीतिक व पारिवारिक रिश्ता

मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के संरक्षक नेता जी मुलायाम सिंह यादव पहली बार 1996 में लोकसभा पहुंचे 2004 में मुलायम फिर से जीते, उसके बाद उप चुनाव में उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव 2004 में मैनपुरी से सांसद बने, 2009 में मुलायम ने मैनपुरी से जीत दर्ज की। 2014 के लोकसभा में मुलायम पुनः काबिज हुए और अपने नाती तेज प्रताप सिंह के लिए सीट छोड़ी और 2014 में उपचुनाव में मैनपुरी से चुनाव जीतकर लोकसभा गए।

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