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UP Election 2022: बीजेपी से मुकाबले के लिए विपक्ष का 'मुस्लिम सियासत' से किनारा, ओवैसी को मिला अवसर

अगर आप कांग्रेस, सपा, बसपा और आरएलडी के चुनावी शंखनाद पर नजर डालें तो साफ़ होता है कि सभी ने नवरात्र में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है।

Rahul Singh Rajpoot

Rahul Singh RajpootReport Rahul Singh RajpootDivyanshu RaoPublished By Divyanshu Rao

Published on 14 Oct 2021 12:23 PM GMT

UP Election 2022: बीजेपी से मुकाबले के लिए विपक्ष का मुस्लिम सियासत से किनारा, ओवैसी को मिला अवसर
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राजनैतिक दलों के नेताओं की तस्वीर 

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UP Election 2022: लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव (UP Election 2022 Today News) में अब कुछ ही महीने बचे हैं। 2022 में कुर्सी पाने के लिए सभी दल चुनावी रण में कूद भी पड़े हैं। भारतीय जनता पार्टी जहां सत्ता में वापसी के लिए अपने तरकश के तीर चलाने लगी है तो वहीं विपक्षी दल उसे कुर्सी से बेदखल करने के लिए मोर्चा खोल चुके है। बीजेपी के सबसे मजबूत पक्ष हिंदुत्व की धमक इस बार के चुनाव में भी देखने को मिल सकती है। लेकिन विपक्षी पार्टियां जो खुद को सेक्युलर होने का दावा करती हैं, वह यूपी चुनाव में इस बार खुलकर मुस्लिम कार्ड खेलने से संकोच करते दिखाई दे रहे हैं। विपक्षी पार्टियों की बैठकों से लेकर चुनावी रैलियों पर गौर करेंगे तो आपको कुछ ऐसे ही प्रतीत होगा। हालांकि एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों को अपने पाले में करने के लिए खुलकर बैटिंग करनी शुरू कर दी है।

नवरात्रि में विपक्षी दलों का चुनावी शंखनाद

Uttar Pradesh Assembly election - अगर आप (UP Me AAP Ka Vote Bank) कांग्रेस (UP Me Congress Ka Vote Bank) , सपा (UP Me SP Ka Vote Bank) , बसपा (UP Me BSP Ka Vote Bank) और आरएलडी (UP Me RLD Ka Vote Bank) के चुनावी शंखनाद (UP Election Kab Hai) पर नजर डालें तो साफ़ होता है कि सभी ने नवरात्र में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। कांग्रेस महासचिव प्रियंगा गांधी ने जहां भोले की नगरी काशी से चुनावी बिगुल फूंका। तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कानपुर से रथयात्रा (Akhilesh Yadav Ki Rath Yatra) की शुरुआत की। मायावती (Mayawati Today News) ने लखनऊ से दम दिखाया । तो जयंत चौधरी ने जाटों और गुर्जरों के गढ़ से हुंकार भरी है। सभी नेताओं ने अपने-अपने अंदाज में चुनाव का आगाज कर दिया है। लेकिन सभी के मंचों से अगर कोई नदारद रहा तो वह है मुस्लिम चेहरा। पहले जहां इन विपक्षी दलों के मंचों पर प्रमुखता से मुस्लिम नेता दिखाई देते थे । वहीं इस बार अभी तक अगर इनके कार्यक्रमों को देखेंगे तो लगभग मुस्लिम नेता गायब हैं।

प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi UP daura) ने तो वाराणसी में भरे मंच से बाबा विश्वनाथ के चंदन के साथ पहले दुर्गा सप्तशती के मंत्र का उच्चारण किया । उसके बाद रैली को संबोधित किया। जिससे उन्होंने अपने हिंदू होने की प्रतिबद्धता को जनता के बीच छोड़ने की कोशिश की है।

प्रियंका गांधी की तस्वीर

अखिलेश की बात करें तो अब तक सपा के कार्यक्रम या पोस्टर में जाली वाली टोपी पहने नेता दिखाई देते थे । लेकिन अब उनकी जगह लाल टोपी ही नजर आती है। मायावती ने भी मुस्लिमों को साधने की भरसक कोशिश की है। लेकिन मुस्लिम चेहरा उनके आस-पास भी नहीं दिखाई दिया। वहीं आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने अपने दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जन्मस्थली हापुड़ के नूरपुर से जन आशिर्वाद यात्रा शुरू की है।

क्या यूपी में घट रही मुस्लिम सियासत (UP Me Muslim Siyasat)

अब तक इन बड़ी पार्टियों के चुनावी शंखनाद को देखकर यह कहा जा सकता है कि क्या बीजेपी की राह पर विपक्षी दल भी चल पड़े हैं। क्योंकि इनके चुनावी मंचों से मुस्लिम सियासत घटती नजर आईं। न तो मायावती के चुनावी मंच पर कोई मुस्लिम नेता दिखा और न ही अखिलेश यादव के विजय रथ पर कोई मुस्लिम सारथी बना। पश्चिम यूपी में जन आशिर्वाद लेने निकले जयंत चौधरी के साथ भी कोई मुस्लिम नेता नजर नहीं आ रहा है। प्रियंका गांधी के काशी रैली के मंच पर जरूर कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद नजर आए। लेकिन वह भी उनसे काफी दूर बैठे दिखे।

यूपी में मुस्लिम बाहुल्य सीटें (UP Me Muslim Vote Bank)

यूपी में करीब 18!फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जो सूबे की कुल 143 सीटों पर अपना असर रखते हैं। इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी बीस से तीस फीसद के बीच है। 73 सीटें ऐसी हैं, जहां मुसलमान तीस फीसद से ज्यादा है। सूबे की करीब तीन दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज कर सकते हैं , जबकि करीब 107 विधानसभा सीटें ऐसी हैं , जहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी नतीजों को खासा प्रभावित करते हैं। इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तराई वाले इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश की हैं।

मुस्लिमों को रिझाने में जुटे ओवैसी (UP Me Asaduddin Owaisi)

यूपी की ये बड़ी पार्टियां भले ही खुले तौर पर नहीं परोक्ष रूप से मुस्लिमों से किनारा कर रही हों । लेकिन असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi Today News) को इसमें अवसर नजर आ रहा है। यही वजह है कि वह चाहे बाहुबली मुख्तार अंसारी हों या फिर अतीक अहमद उनसे परहेज नहीं कर रहे हैं। ओवैसी ने जहां अतीक के परिवार को पार्टी में शामिल कर उनका टिकट पक्का कर दिया है तो वहीं मायावती द्वारा मुख्तार को पार्टी से निकालने के चंद मिनट बाद ही ओवैसी की पार्टी ने उन्हें निमंत्रण भेज दिया। ओवैसी जानते हैं कि हिंदू वोट उन्हें ना के बराबर ही मिलेंगे।. ऐसे में वह मुस्लिम कार्ड खेलकर महाराष्ट्र और बिहार का फॉर्मूला यूपी में लागू कर मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर यूपी में अपनी धमक दिखाने आ गए हैं।

Divyanshu Rao

Divyanshu Rao

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