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UP में बिजली संकट: कोयला संकट से जूझ रहा यूपी, 17 परियोजनाओं में से 15 के पास तीन दिन से भी कम का कोयला

कोयला संकट से जूझ रहीं यूपी की 17 परियोजनाएं हैं, जिनमें से 15 के पास तीन दिन से भी कम का कोयला बचा है।

Kaushlendra Pandey

Kaushlendra PandeyReport Kaushlendra PandeyRagini SinhaPublished By Ragini Sinha

Published on 12 Oct 2021 10:46 AM GMT

Sonbhadra lates news
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Sonbhadra: 15 परियोजनाओं के पास तीन दिन से भी कम का कोयला, बढ़ेगा बिजली संकट

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UP Me Bijali Sankat: कोयला मंत्रालय (Minister of Coal) के बेहतरी दावे के बावजूद उत्तर प्रदेश (Coal crisis in Uttar Pradesh) सहित पूरे देश में कोयला संकट (Coal sankat today News) की स्थिति गंभीर रूप में बनी हुई है। हालिया हालात यह है कि उत्तर प्रदेश के 19 तापीय बिजली घरों (Bijli Ghar) में से कोयले के मुहाने पर स्थित एनटीपीसी (NTPC) रिहंद और एनटीपीसी सिंगरौली को छोड़ दें तो शेष सभी परियोजनाएं कोयला संकट (Coal crisis) से जूझ रही हैं। 15 ऐसी परियोजनाएं हैं, जहां का कोयला भंडारण तीन दिन की जरूरत से भी नीचे पहुंच गया है। उसमें भी अधिकांश परियोजनाओं में एक से दो दिन का कोयला स्टाक बचा है। तीन परियोजनाएं ऐसी हैं जहां का स्टॉक करीब-करीब खत्म होने की स्थिति में आ गया है। इसके चलते जहां उत्पादन पर चल रही हरदुआगंज के दो, रोजा की एक, ललितपुर (Lalitpur) की एक, परीक्षा की एक, ऊंचाहार की एक इकाई बंद करनी पड़ी है। वहीं अनपरा सहित कई बिजली घरों की विद्युत उत्पादन इकाइयां कम लोड पर चलाई जा रही हैं। यह स्थिति तब है, जब विभिन्न परियोजनाओं की कुल 2000 मेगावाट (2000 MW solar power plant) क्षमता की पांच इकाइयां अन्य कारणों से बंद चल रही हैं।


ललितपुर में पांच दिन का स्टॉक है (Lalitpur Me Bijali Sankat)

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की तरफ से दर्शाए गए कोल स्टाक पर नजर डालें तो निजी क्षेत्र की परियोजना लैंको में तीन दिन, बरखेड़ा में दो दिन, मकसूदपुर में एक दिन, प्रयागराज (prayag me bijali sankat) में एक दिन, रोजा में तीन दिन, अप्रैल में एक दिन के कोयले का स्टॉक बचा है। ललितपुर में पांच दिन का स्टॉक शेष है। खंबारखेड़ा और कुडार्की में स्टाक करीब-करीब खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है। राज्य सेक्टर के अनपरा परियोजना में दो दिन, ओबरा में तीन दिन, हरदुआगंज में दो दिन, और परीक्षा में एक दिन का कोयला स्टॉक शेष है। ताजा हालात ये है, जब ओबरा की दो इकाइयां पहले से बंद हैं। हरदुआगंज की दो और पारीक्षा की एक इकाई कोयला संकट से निपटने के लिए बंद कर दी गई है। इसी तरह मेजा परियोजना में भी महज दो दिन का स्टॉक बचा है। केंद्र सेक्टर की दादरी तापीय परियोजना का स्टॉक खत्म होने के करीब पहुंच गया है। टांडा में एक दिन और ऊंचाहार में दो दिन का कोयला शेष बताया जा रहा है।



19 बिजली घरों में केंद्र सेक्टर के दो ही बिजली घर के पास कोयला बचा (coal crisis in india)

उत्तर प्रदेश (coal crisis in up) के 19 बिजली घरों में केंद्र सेक्टर के दो ही बिजलीघर ऐसे हैं, जहां कोयला भंडारण की स्थिति बेहतर है। जनपद स्थित एनटीपीसी सिंगरौली में कोयला की आपूर्ति सुधरी है। इससे यहां का स्टाक 35% से बढ़कर 41% हो गया है। जरूरत के हिसाब से यह कोयला छह दिन के लिए पर्याप्त है। स्टॉक बढ़ने के साथ ही यहां परियोजना क्रिटिकल की सूची से बाहर हो गई है। एनटीपीसी रिहंद के पास भी आठ दिन का कोयला स्टॉक बचा हुआ है। जानकारों का कहना है कि अगर शीघ्र कोयला आपूर्ति नहीं बढ़ी तो महंगी बिजली आगे भी खरीदने का क्रम तो बना ही रहेगा, बिजली कितनी उपलब्ध हो पाएगी? यह कह पाना मुश्किल होगा।

मेगावाट की करनी पड़ी आपात कटौती (UP Me Bijali Sankat)

नार्दन लोड डिस्पैच सेंटर से मिली जानकारी के मुताबिक महंगी बिजली खरीदने के बावजूद पीक आवर में यूपी के सिस्टम कंट्रोल को 1310 मेगावाट बिजली की आपात कटौती (bijali katauti) करनी पड़ी। वही अधिकतम मांग के समय ग्रिड की स्थिति नियंत्रित रखने के लिए सिस्टम कंट्रोल को 870 मेगावाट के आपात कटौती का सहारा लेना पड़ा। यह स्थिति तब है जब हालिया बिजली संकट की स्थिति को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में पांच से सात घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 13 घंटे की रोस्टरिंग कराई जा रही है।

बिजली की मांग ने बढ़ाई मुश्किल (Uttar Pradesh Electricity)

अक्टूबर माह का पहला पखवाड़ा बीतने को है लेकिन पसीना छुड़ाने वाली गर्मी और उमस की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते बिजली की मांग में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। मानसून के समय अधिकतम बिजली की मांग का जो आंकड़ा 15 से 16000 मेगावाट चल रहा था। वह पिछले एक सप्ताह से 19000 मेगावाट के पार पहुंच रहा है। इसके चलते राज्य को जहां ₹16 प्रति यूनिट से भी अधिक में बिजली खरीदनी पड़ रही है। वही कोयला संकट के चलते मांग के मुकाबले पर्याप्त बिजली न मिल पाने की दशा में अच्छी खासी आपात कटौती का भी सहारा लेना पड़ रहा है।

केंद्र और प्रदेश दोनों सरकारें, करें त्वरित प्रयास, तभी जल्द राहत संभव

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दूबे (Shailendra Dubey, President of All India Power Engineers Federation) कहते हैं कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में कोयला संकट की स्थिति बनी हुई है। देश भर में कोयले से चलने वाले कुल 135 पॉवर प्लांट है, उनमें से आधे से ज्यादा ऐसे हैं, जहां कोयला स्टॉक समाप्त होने के कगार पर है। वह कहते हैं कि कोयला संकट का बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोकिंग कोल की कीमत में भारी इजाफा होना भी है। इसके चलते भारत में उत्पादित कोयले पर ही बिजली उत्पादन पूरी तरह से निर्भर हो गया है। इससे जहां कोल परियोजनाओं पर ज्यादा आपूर्ति का दबाव बढ़ गया है वहीं बकाया वाली परियोजनाओं को कम मिलती आपूर्ति भी बिजली संकट का बड़ा कारण बन गई है। वह कहते हैं कि इसका फायदा उठा कर निजी घरानों ने एनर्जी एक्सचेंज में लूट मचा रखी है । एनर्जी एक्सचेंज (Energy exchange) में पिछले कई दिनों से बिजली (Bijli ki kimat) की कीमत ₹9 से ₹21 प्रति यूनिट (Per Unit) तक चल रही है जो खुली लूट है। राज्यों के पास इतनी महंगी बिजली खरीदने के लिए आवश्यक धनराशि का जुगाड़ एक बड़ी चुनौती है। अगर राज्य इतनी महंगी बिजली खरीद भी ले तो अंततः इसका भार आम जनता को ही सहना पड़ेगा। इस संकट से निपटने के लिए जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें त्वरित प्रयास करें ताकि सस्ती बिजली देने वाली परियोजनाओं में पर्याप्त स्टाक और पूरी क्षमता से उत्पादन सुनिश्चित हो सके।

Ragini Sinha

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