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up zila panchayat chunav 2021: बीजेपी ने रखा 65 प्लस का लक्ष्य, वरिष्ठ नेता करेंगे निगरानी

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी ने 65 प्लस सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। इसमें जीत बीजेपी और योगी सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।

Rahul Singh

Rahul SinghWritten By Rahul Singh

Published on 10 Jun 2021 8:16 AM GMT

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी ने रखा 65 प्लस का लक्ष्य, वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी
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सीएम योगी, स्वतंत्र देव  सिंह, सुनील बंसल, साभार-सोशल मीडिया

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उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव होना है। इन चुनावों की तारीखों का ऐलान जल्द हो सकता है। चुनाव की तारीख अभी भले ही फाइनल नहीं हुई है लेकिन बीजेपी अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। बुधवार शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में कोर कमेटी की बैठक में चुनाव तैयारियों की समीक्षा की गई। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और संगठन महामंत्री सुनील बंसल मौजूद रहे।

सीएम योगी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में बीजेपी ने 65 प्लस सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। बता दें यूपी के 75 जिलों में जिला अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने हैं। इसमें जीत बीजेपी और योगी सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। नेताओं और विजयी डीडीसी प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए कोर कमेटी की बैठक में फैसला हुआ है कि हर जिले में एक वरिष्ठ नेता को तैनात कर उनके दिशा निर्देशन में चुनाव लड़ा जाएगा। वोटों की खींचतान में विपक्ष द्वारा माहौल खराब करने की आशंका को देखते हुए प्रत्येक जिले में एक वरिष्ठ मंत्री को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

प्रत्याशी के चयन में जातीय समीकरण

बीजेपी जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशियों के चयन में जातीय समीकरण बैठा रही है। क्योंकि अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसे ध्यान में रखते हुए वह किसी को नाराज नहीं करना चाहती है। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में काफी पैसे भी खर्च होते हैं इसे भी ध्यान रखकर पैसों से मजबूत प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी जाती है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी ने लगभग 60 उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिए हैं, लेकिन चुनाव की तारीख का इंतजार है। जैसे तारीख तय हो जाएगी सभी प्रत्याशियों का नाम घोषित कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि अगले सप्ताह चुनाव कार्यक्रम घोषित हो सकते हैं। पार्टी की ओर से सभी पदाधिकारियों को एकजुटता से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करने को निर्देशित किया गया।

सपा ने 2015-16 में 62 सीटें जीती थी

सपा शासनकाल में 2015-16 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 75 में से 62 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसे भी ध्यान में रखते हुए बीजेपी भी कुछ ऐसी ही रणनीति तैयार कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा जिला पंचायत अध्यक्ष उसकी पार्टी के जीतें। इसके साथ ही ब्लॉक प्रमुखों का चुनाव भी होना है। इसके लिए भी बीजेपी रणनीति तैयार कर चुकी है। सीएम योगी की बैठक में रिक्त पड़े आयोगों और निगमों के अध्यक्षों व सदस्यों के नामों पर भी विचार किया गया।

जिला पंचायत क्या कार्य करता है?

73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जिले स्तर पर पंचायत के गठन का प्रावधान किया गया है। राज्य के प्रत्येक जिले में एक जिला पंचायत होती है,जिसका नाम उस जिले के नाम पर रखा जाता है। जिला पंचायत पूरे जिले से आने वाली समस्याओं और आवश्यकताओं पर समीक्षा कर प्राथमिकताओं के आधार पर एक जिला योजना तैयार करती है, और जिला योजना में स्वीकृत कार्यों या योजनाओं का क्रियान्वित किया जाता है। एक सासंद और विधायकों की निधि से ज्यादा जिला पंचायत का बजट होता है और यह पूरे जिले के विकास कार्य को कराती है।

जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव

जिला पंचायत के चुनाव हेतु जिला पंचायत को छोटे-छोटे निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड संख्या) के रूप में विभाजित किया गया है। जिला पंचायत के सदस्यों का चुनाव मतदाता करते हैं और इसमें जो विजयी होता है वह जिला पंचायत अध्यक्ष को चुनता है। जिला पंचायत सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए, इसके साथ ही प्रत्याशी का नाम उस निर्वाचन जिले की मतदाता सूची में होना चाहिए।

Rahul Singh

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