Top

यूपी के किसी भी चुनाव में मायावती की इतनी खराब हालत कभी नहीं हुई

aman

amanBy aman

Published on 11 March 2017 6:50 AM GMT

यूपी के किसी भी चुनाव में मायावती की इतनी खराब हालत कभी नहीं हुई
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

लखनऊ: यूपी में विधानसभा चुनाव के परिणाम बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती को गहरा सदमा दे गए हैं। उनका दलित वोट बैंक जिस पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करती थीं, अब दरक गया। उनका दलित-मुस्लिम गठजोड का गणित भी काम नहीं आया।

मायावती ने ये सोचकर 100 से ज्यादा मुस्लिमों को टिकट बांटे कि दलित, मुस्लिम का एकमुश्त वोट उन्हें सत्ता की चाबी सौंप सकता है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्योंकि मायावती ने सिर्फ इसका गणित लगाया।मुस्लिमों को बसपा से जोड़ने के लिए जमीं पर कोई काम नहीं किया। मायावती को संभवत: ये लगा था कि दलित और मुस्लिमों के मत प्रतिशत उसे सत्ता तक पहुंचा देंगे, लेकिन चुनावी गणित का खेल नहीं नजर आया।

बसपा: लोकसभा चुनाव में अब तक

बसपा को लोकसभा चुनाव में पहली बार सफलता 1989 के चुनाव में मिली थी। तब उसके 4 प्रत्याशी जीते थे। 1991 के लोकसभा चुनाव में 3 तो 1996 के चुनाव में वह पहली बार दोहरे अंक में पहुंची थी। पहली बार बसपा को 11 सीटें हासिल हुई। 1998 के लोकसभा चुनाव में बसपा के 5 सदस्यों को जीत मिली, तो 1999 में यह आंकडा 14 तक पहुंच गया। लोकसभा के 2004 के चुनाव में बसपा को 19 तो 2009 के चुनाव में सबसे ज्यादा 21 सीटें मिली। लोकसभा के 2014 के चुनाव में मोदी लहर चली और बसपा कोई सीट नहीं जीत सकी।

आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी खबर ...

बसपा: विधानसभा चुनाव में अब तक का सफर

इसी तरह 1993 के विधानसभा चुनाव में बसपा-सपा ने गठजोड कर चुनाव लड़ा और 67 सीटें जीती। बाद में ये गठबंधन 1995 में हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद टूट गया। विधानसभा के 1996 के चुनाव में भी बसपा को 67 सीट ही मिली।

विधानसभा के 2002 के चुनाव में बसपा को 98 सीटें मिली, जबकि 2007 के चुनाव में मायावती ने 206 सीट जीतकर यूपी में बहुमत से सरकार बनाई। विधानसभा के 2012 के चुनाव में बसपा को 80 सीटें ही मिल पाई। लेकिन वर्तमान विधानसभा चुनाव में उसे 20 से भी कम सीटें मिलती दिख रही है।

aman

aman

अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

Next Story