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Varanasi News: बीमारी से गरीब महिला की मौत, पड़ोसियों ने चंदा लगा कर किया अंतिम संस्कार
Varanasi News: 45 वर्षीय महिला सुनिता देवी पत्नी धर्मेंद्र गजापुर निवासिनी जो बेघर थी, कचनार गांव में किराए के मकान में रहकर आसपास के लोगों के यहां घरेलू काम करती थी।
बीमारी से गरीब महिला की मौत (photo: social media )
Varanasi News: राजातालाब थाना व तहसील और विकास खंड आराजी लाइन से सटे कचनार गांव में बीमारी से एक गरीब महिला की मौत हो गई। इस महिला के पास सरकारी राशन पाने के लिए राशन कार्ड भी नही था। महिला ने अपना राशन कार्ड स्थानीय प्रशासन से बनवाने के लिए कई बार मांग की थी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज मंगलवार को महिला की मौत हो गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक 45 वर्षीय महिला सुनिता देवी पत्नी धर्मेंद्र गजापुर निवासिनी जो बेघर थी, कचनार गांव में किराए के मकान में रहकर आसपास के लोगों के यहां घरेलू काम करती थी। इस महिला का पति नशेढ़ी था और कोई काम धंधा भी नहीं करता था। इस महिला के तीन बच्चे शनि 8 , सत्या 7, साहिल 6 वर्ष जिसके साथ वह रहती थी। इसके अलावा उसका इस दुनिया में कोई नहीं है। महिला जबतक स्वस्थ रही आसपास के घरों में घरेलू कामकाज कर राशन लाकर किसी तरह से अपना गुजारा कर रही थी, लेकिन एक महीने पहले वह बीमार पड़ गई। इसके बाद महिला ना तो काम कर पा रही थी, और ना ही ग़रीबी के चलते कहीं अस्पताल जाने की हिम्मत उसके अंदर बची थी। बीमार महिला एक महीने से इस हालत का सामना कर रही थी। महिला के बेटे दूसरों के यहां मजदूरी कर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे थे। लेकिन उसकी मजदूरी माँ के इलाज के लिए काफी नहीं थी।
बाजार और पड़ोसियों ने चंदा कर हुआ महिला का अंतिम संस्कार
महिला की मौत के बाद कचनार ग्राम प्रधान उर्मिला देवी अपने पुत्र विशाल पटेल, रानी बाजार ग्राम प्रधान अनिल मोदनवाल सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता और माइकल सोनकर के सूचना देने पर महिला के घर पहुंचे। दोपहर तक कोई सरकारी मदद नहीं मिलने पर ग्राम प्रधान कचनार व रानी बाजार और पड़ोसियों ने चंदा कर महिला का अंतिम संस्कार दोपहर बाद किया। महिला की मौत के बाद उसके बच्चे अकेले रह गए है। बच्चों का देखभाल के लिए पड़ोसियों के पास रखा है।
बता दें कि जब सुनिता का ससुराल में कोई घर मकान नहीं था, बेघर होने के चलते पास के गांव कचनार चली गई थी। यहां दस सालों से आसपास के घरों में घरेलू कामकाज कर एक दूसरे का सहारा बने और जिंदगी जीने लगी। लेकिन माँ की मौत के बाद बच्चे अकेले ही रह गए, उनका रो-रोकर बुरा हाल है।