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वैदिक कालीन है परिक्रमा मार्ग, जिसे कड़ी मशक्कत कर खोजा गया: अखाड़ा परिषद

पंचकोसीय यात्रा के अन्तिम दिन 9 फरवरी को सुबह प्रारम्भ होकर महर्षि भारद्वाज के अभिषेक से होगा। सुबह करीब दस बजे गंगाजल से भरा कलश लेकर साधू संत व श्रद्धालु की शोभायात्रा संगम से भारद्वाज आश्रम के लिए प्रस्थान करेगी।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 7 Feb 2019 10:56 AM GMT

वैदिक कालीन है परिक्रमा मार्ग, जिसे कड़ी मशक्कत कर खोजा गया: अखाड़ा परिषद
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आशीष पाण्डेय,

कुंभ नगर: प्रयागराज तीर्थों का राजा है और यहां वैदिक काल से ही पंचकोसीय परिक्रमा प्रचलित थी लेकिन 1942 में इसे बंद करा दिया गया था। उक्त परिक्रमा को लेकर छह माह पूर्व अखिल भरतीय अखाड़ा परिषद ने महामंत्री हरि गिरी की सक्रियता और संतों के मार्ग दर्शन पर इस मार्ग को खोज निकाला और परिक्रमा की थी।

यह बातें प्रयागराज पंचकोषीय परिक्रमा के प्रारम्भ होने से पूर्व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कही। उन्होंने कहा कि यह परिक्रमा मेला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा संतों के सानिध्य में प्रारम्भ की जा रही है। जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

गंगा पूजन कर मांगा परिक्रमा का आर्शीवाद

मेले के प्रशासनिक अधिकारियों एवं संतों ने विधि विधान से संगम नोज पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा की पूजा अर्चना की और दूध से अभिषेक कर गंगा आरती की। इसके बाद वहां मीडिया से बात करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से यह परिक्रमा आज से प्रारम्भ हो रही है। यह तीन दिवसीय परिक्रमा है। जो प्रत्येक वर्ष यहां पर होगी। इससे हमे धार्मिक क्षेत्रों को देखने का अवसर प्राप्त होता है और प्रयाग की महिमा के दर्शन होते हैं।

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अवधेशानन्द के मार्ग दर्शन में अक्षयवट दर्शन से शुरू हुई परिक्रमा

संतों की प्रयागराज की पंचकोसीय परिक्रमा का प्रारम्भ मण्डलायुक्त डा. आशीष कुमार गोयल, अपर पुलिस महानिदेशक सत्य नारायण साबत, पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल, एसएसपी कुंभ मेला कवींद्र प्रताप सिंह, मेलाधिकारी विजय किरन आनंद की अगुवाई और जूना पीठाधीश्वर के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि के मार्ग दर्शन में अक्षयवट दर्शन एवं सरस्वती कुण्ड का दर्शन करने पहुंचे।

पहले दिन की परिक्रमा का यह है मार्ग

अक्षयवट दर्शन एवं सरस्वती कुण्ड दर्शन के बाद मोटर बोट से बनखण्डी महादेव, तक्षक तीर्थ से मौजगिरी बाबा घाट पर स्थित मौजगिरी मंदिर, भृगु ऋषि आश्रम दर्शन, के बाद मोटर बोट से ही सूर्य टंकेश्वर मंदिर, चक्रमाधव, गदा माधव, पर्णास ऋषि के आश्रम क्षेत्र और सोमेश्वर महादेव मंदिर।

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इसके बाद वहां से वीआईपी पीपा पुल पार कर झूंसी के शंख माधव के दर्शन के बाद दुर्वाशा ऋषि आश्रम के बाद संगम के सेक्टर 16 स्थित पंचदशनाम जूना अखाड़े में भंडारे के साथ पहले दिन की परिक्रमा पूरी होगी। उक्त अवसर पर जगदगुरू रामानन्दाचार्य नरेन्द्राचार्य, श्रीमहंत ज्ञानदेव, स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती, श्रीमहंत नृत्यगोपालदास, सहित भारी संख्या में संत मौजूद रहे।

दूसरे दिन की परिक्रमा

दूसरे दिन की परिक्रमा संगम हनुमान मंदिर, दत्तात्रेय मंदिर, जूना अखाड़े के चेतनपुरी की समाधी, पड़िला महादेव के दर्शन, नागवासुकी मंदिर, दशाश्वमेध मंदिर, वेणीमाधव मंदिर के बाद दूसरे दिन भी श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े में भोजन, भजन कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।

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समापन महर्षि भारद्वाज के अभिषेक से होगा

पंचकोसीय यात्रा के अन्तिम दिन 9 फरवरी को सुबह प्रारम्भ होकर महर्षि भारद्वाज के अभिषेक से होगा। सुबह करीब दस बजे गंगाजल से भरा कलश लेकर साधू संत व श्रद्धालु की शोभायात्रा संगम से भारद्वाज आश्रम के लिए प्रस्थान करेगी। वहां महर्षि भारद्वाज का अभिषेक होगा। इसके बाद शाम 5 बजे संगम तट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का अयोजन होगा। जिसमें कुछ विभूतियों को महर्षि, भृगु मुनि, पर्णास ऋषि एवं दुर्वासा ऋषि की स्मृति में सम्मानित किया जा सकता है।

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