Top

Sonbhadra News: जिले की सियासत में महिलाओं का दखल बढ़ा, ब्लॉक प्रमुख और प्रधान की अधिकतर सीटें महिलाओं के हाथ

Sonbhadra News: सोनभद्र में आर्थिक और शैक्षिक दोनों दृष्टि से पिछड़े जनपदों में शुमार सोनभद्र की सियासत में हाल के वर्षों में नारी सशक्तिकरण के नारों के बीच महिलाओं का दखल तेजी से बढ़ा है।

Kaushlendra Pandey

Kaushlendra PandeyReport Kaushlendra PandeyDivyanshu RaoPublished By Divyanshu Rao

Published on 22 July 2021 5:45 AM GMT

Sonbhadra News: जिले की सियासत में महिलाओं का दखल बढ़ा, ब्लॉक प्रमुख और प्रधान की अधिकतर सीटें महिलाओं के हाथ
X
 शपथ लेती हुईं महिला
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सोनभद्र (Sonbhadra) जिले में आर्थिक और शैक्षिक दोनों दृष्टि से पिछड़े जनपदों में शुमार सोनभद्र की सियासत में हाल के वर्षों में नारी सशक्तिकरण के नारों के बीच महिलाओं का दखल तेजी से बढ़ा है। चूल्हा-चौका और घर के दहलीज तक सीमित रहने वाली महिलाओं ने 2021 के पंचायत चुनाव में धमाकेदार इंट्री दर्ज कराई है।

सामान्य सीट होने के बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर महिला उम्मीदवार राधिका पटेल ने तो कब्जा जमाया ही, पांच ब्लॉक प्रमुखों और 265 ग्राम पंचायतों की भी प्रधान महिला ही चुनी गई हैं। जहां पहले पुरुषों की हुकूमत चलती थी। वहां अब महिलाएं सरकार चलाती और पुरुष प्रधान समाज में नारी सशक्तिकरण की नई इबारत रचती नजर आएंगी।

आंकड़े बताते हैं जिले में महिलाओं का कब्जा

आंकड़े बताते हैं कि 629 ग्राम पंचायतों में से 265 ग्राम पंचायतों में प्रधान के पद पर महिलाओं ने कब्जा जमाया है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जहां पिछले चुनाव के मुकाबले गांव की सरकार में 15 फीसद से अधिक महिलाओं का दखल बढ़ा है। वहीं 49 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पुरुषों से सीधी टक्कर लेकर महिलाएं प्रधान निर्वाचित हुई हैं। इसमें ज्यादातर महिलाओं की सियासत में पहली इंट्री है। आगे के 5 सालों में उनकी दक्षता और कार्यकुशलता की परीक्षा भी होनी है। इसमें से कितनी अपनी सियासी पारी को बेहतर कार्यों के साथ आगे बढ़ा पाती हैं, यह तो वक्त बताएगा? लेकिन इतना तो तय है कि पुरुषों को भी महिलाओं के सियासी दबदबे को स्वीकार करने की आदत अभी से डालनी पड़ेगी।

प्रत्येक ब्लॉक क्षेत्र में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो चोपन ब्लॉक में 36 ग्राम पंचायतों में से 15, नगवां ब्लॉक में 48 ग्राम पंचायतों में 24, बभनी ब्लॉक में 40 ग्राम पंचायतों में 17 दुद्धी ब्लाक में 58 ग्राम पंचायतों में 24, रावटसगंज ब्लॉक में 113 ग्राम पंचायत में 50, घोरावल ब्लॉक में 108 ग्राम पंचायतों में 54, चतरा ब्लॉक में 60 ग्राम पंचायतों में 35 म्योरपुर ब्लॉक में 72 ग्राम पंचायतों में 35, करमा ब्लॉक में 63, ग्राम पंचायतों में 37, कोन ब्लॉक में 31 ग्राम पंचायतों में 23 महिला प्रधान निर्वाचित हुई हैं।


2021 में 265 महिलाएं ग्राम प्रधान बनी

यह आंकड़ा तब है जब वर्ष 2015 में हुए चुनाव के मुकाबले 2021 के चुनाव में प्रधानी की आठ सीटें कम हो गई थीं। इसी तरह पिछले बार के चुनाव में 230 महिला प्रधान चुनी गई थी। वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 265 हो गई। बता दें कि 2015 में 637 ग्राम पंचायतों में निर्वाचन की प्रक्रिया अपनाई गई थी लेकिन इस बार दो नई नगर पंचायतों के अस्तित्व में आने के कारण आठ ग्राम पंचायतें नगर पंचायत में विलीन हो गईं।

निर्वाचित महिला प्रत्याशी को गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित करते हुए

ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में साबित हुआ आधा हक महिलाओं का है

ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव में साबित किया कि आधी आबादी तो आधा हक है 10 सीटों वाले ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में पांच ब्लॉकों की ब्लॉक प्रमुख सीटों पर महिलाओं ने जीत हासिल कर साबित किया कि उनके आधी आबादी है तो वह आधे पर काबिज होने का भी हौसला रखती हैं। बता दें कि कोन महिला, चोपन अनुसूचित जनजाति महिला, करमा अनुसूचित जाति महिला, चतरा पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित थी। वहीं बभनी सीट सामान्य थी जहां की प्रमुखी भी महिला के नाम रही।

Divyanshu Rao

Divyanshu Rao

Next Story