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Sonbhadra News: बुखार के कहर से मृतकों की संख्या पहुंची 19, मासूम की मौत, भड़के कांग्रेसियों का प्रदर्शन

Sonbhadra News : ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने भी लगातार मौतों के लिए जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

Kaushlendra Pandey

Kaushlendra PandeyReport Kaushlendra PandeyShraddhaPublished By Shraddha

Published on 24 Nov 2021 12:57 PM GMT

सोनभद्र जिले में मलेरिया के बचाव के लिए किया जा रहा निरीक्षण
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सोनभद्र जिले में मलेरिया के बचाव के लिए किया जा रहा निरीक्षण 

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Sonbhadra News : म्योरपुर ब्लॉक (Mayorpur Block) के मकरा में मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार की देर रात एक और मासूम अंकुश (3) पुत्र राजनारायण खरवार की जिला अस्पताल (district hospital) जाते समय मौत हो गई। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। उधर, कांग्रेसियों ने लगातार मौत को लेकर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य महकमे पर हमला बोला है और म्योरपुर मलेरिया निरीक्षक (Mayorpur Malaria Inspector) सहित अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (All India People Front) ने भी लगातार मौतों के लिए जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है। वहीं, लापरवाही को लेकर दुद्धी एसडीएम रमेश कुमार (Duddhi SDM Ramesh Kumar) की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए डीएम टीके शिबू ने संबंधितों से जवाब तलब कर लिया है। साथ ही मकरा गांव में 24 घंटे कैंप, साफ-सफाई, तत्काल शुद्ध पेयजल व्यवस्था के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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हर पांचवां मरीज पाया जा रहा मलेरिया पीड़ित

म्योरपुर ब्लॉक के सिंदूरा (मकरा) गांव (Mayorpur Block Sindoora Village) में होती लगातार मौतों से पूरा जिला सकते में है। यहां की ब्लड टेस्टिंग पर नजर डालें तो हर पांचवां मरीज मलेरिया पीड़ित मिल रहा है। तीन दिन पूर्व तक मकरा, आस-पास में 132 लोगों की मलेरिया जांच की गई थी जिसमें 22 पॉजिटिव पाए गए थे। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को 40 में से आठ मंगलवार को 12 में से चार मरीज मलेरिया पॉजिटिव मिले। बुधवार की सुबह पांच मरीजों में तीन मलेरिया पीड़ित पाए गए। ज्यादातर मरीज मलेरिया के सबसे खतरनाक स्वरूप 'पीएफ' से पीड़ित बताए जा रहे हैं।

मलेरिया नियंत्रण के लिए दिखी तेजी, कई टीमें की गईं सक्रिय

डीएम के निर्देश के बाद मलेरिया नियंत्रण के लिए तेजी दिखनी शुरू हो गई है। एसडीएम दुद्धी रमेश कुमार ने बताया कि मकरा गांव में ही 24 घंटे के लिए स्वास्थ्य कैंप क्रियाशील कर दिया गया है। म्योरपुर सीएचसी प्रभारी राजीव रंजन को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रभावित इलाके के प्रत्येक व्यक्ति की ब्लड टेस्टिंग के निर्देश दिए गए हैं। जब तक आरओ प्लांट या पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक नजदीकी परियोजनाओं के ग्रामीण विकास अनुभाग के जरिए टैंकर से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू करा दी गई है। झाड़ियों की कटान, साफ-सफाई, फागिंग, मच्छरदानी वितरण आदि का भी काम युद्धस्तर पर जारी है।

कांग्रेसियों ने प्रदर्शन कर जताई नाराजगी, सीएमओ के स्थानांतरण और मलेरिया निरीक्षक के बर्खास्तगी की मांग

सोनभद्र। मकरा में हो रही अप्रत्याशित मौतों से आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला सचिव शत्रुंजय मिश्रा की अगुवाई में बढ़ौली चौराहे पर प्रदर्शन कर सीएमओ को हटाने और मलेरिया निरीक्षक पीके सिंह को बर्खास्त करने की मांग की।

शत्रुंजय मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष जगदीश मिश्रा, जिला सचिव ऊषा चौबे, जिला कोषध्यक्ष फरीद ने कहा कि मकरा में लगातार हो रही मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। मलेरिया निरीक्षक अपने प्रभार क्षेत्र में न जाकर, सीएमओ की परिक्रमा करने में लगे हुए हैं। स्वास्थ्य महकमा मरीजों के उपचार पर ध्यान देने की बजाय भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। जितेंद्र पासवान, राजबली पांडेय,राजीव त्रिपाठी, सूरज यादव, अमरेश देव पांडेय, निगम मिश्रा, कोशलेश पाठक, प्रमोद पांडेय, सेराज हुसैन, चंपा देवी, आकृति निर्भया, नीलम, पार्वती, रजवंती, चंदा आदि ने भी स्वास्थ्य महकमे पर निशाना साधा।

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आदिवासी बहुल इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था हो मजबूत, मृतक आश्रितों को मिले मुआवजाः आइपीएफ

सोनभद्र। मकरा ग्राम पंचायत में हो रही मौतों को लेकर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने जहां प्रदूषित पानी के सेवन को बड़ा कारण बताते हुए प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य महकमे पर हमला बोला। वहीं आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने और हर ग्रामीण को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और मृतक आश्रितों को मुआवजा देने की मांग की।

रासपहरी में जारी धरने में जिला संयोजक कृपा शंकर पनिका, मजदूर किसान मंच जिलाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, मंगरू प्रसाद गोंड़, मनोहर गोंड़, ज्ञानदास गोंड़ आदि ने कहा कि यदि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और शुद्ध पीने का पानी मिलता तो मकरा में इतनी बड़ी संख्या में मौतें न होतीं। कहा कि आइपीएफ ने शासन और प्रशासन से लगातार इसकी मांग की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप कभी मकरा में, कभी बेलहत्थी के रजनी टोला में, कभी सोढ़ो, परनी, गडिया गांवों में ग्रामीण बेमौत मरने को विवश हैं।

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