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UP Election 2022: सोनभद्र एक उपेक्षित जिला, क्या इस बार चुनाव में मिलेगा इसका हक़, सभी पार्टियां कर रहीं तैयारी

UP Election 2022: उत्तर प्रदेश का जिला सोनभद्र एक उपेक्षित जिला है 2022 का आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर यहां पर प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियां यहां की समस्या को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, देखना है कि यहां किसकी दाल गलती है और कौन विकास करता है।

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Sonbhadra News: सोनभद्र एक आदिवासी बहुल क्षेत्र (Sonbhadra a tribal dominated area) है जहां की आबादी में करीब 22% अनुसूचित जनजातियां तथा 24% अनुसूचित जाति में शामिल हैं। सोनभद्र जिला उत्तर प्रदेश का सबसे पिछड़ा जिला माना जाता है। सोनभद्र जिले की सीमाएं 5 प्रदेशों से लगती हैं और यहां सोन, कर्मनाशा, चंद्रप्रभा रिहाण्ड, कन्हार,रेणु, घाघर और बेलन नदियां बहती हैं। इस जिले में गरीबी एक विकट समस्या (Poverty in Sonbhadra) है।

इस जिले में फैक्ट्रियां और कोयले की खदान बहुतायत हैं जबकि इसका लाभ स्थानीय निवासियों को नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों को खदानों या कारखानों में रोज़गार नहीं मिलता, जबकि बाहर से आए लोग इसमें ठेकेदारी करते हैं एवं कार्यरत हैं। सोनभद्र एक उपेक्षित जिला (Sonbhadra a neglected district) है। 2012 में जब नया परिसीमन लागू हुआ तब 4 विधानसभाएं बनीं। उसके पूर्व में यहां केवल ढाई विधानसभाएं थीं।

रॉबर्ट्सगंज, दुत्थी और राजगढ़ विधानसभा (Rajgarh Assembly) का आधा हिस्सा सोनभद्र में और आधा हिस्सा मिर्जापुर (mirzapur) में था। परिसीमन के पश्चात जो चार विधानसभाओं का गठन हुआ वह हैं- वरावल,राबर्ट्सगंज,ओबरा और दुत्थी। इनमें से दूत्थी और ओबरा की सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है जबकि वरावल और रॉबर्ट्सगंज सामान्य सीटें हैं।

सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चुनाव लड़ने की तैयारी में बसपा

सुखी यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है और यहां अनुसूचित जातियों और जनजातियों की आबादी अधिक है, पता है यहां से बहुजन समाज के हितों की बात करने वाली पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) (Party Bahujan Samaj Party) मायावती (Mayawati) के 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' के नारे और सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। बसपा नेता इंद्रदेव सिंह (BSP leader Inderdev Singh) ने पार्टी के चुनावी तैयारियों के सवाल पर कहा, "हम सोशल इंजीनियरिंग के तहत समाज की सभी जातियों को भाईचारे से जोड़ने का काम कर रहे हैं। जो पार्टियां धरने और प्रदर्शन कर रही हैं वह दिखावा मात्र कर रही हैं। बसपा चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर कार्यरत है।"

सोनभद्र के चर्चित उभार कांड (Ubhar Kand) में प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) सोनभद्र आई और धरने पर बैठी थी तथा पार्टी के शीर्ष और स्थानीय नेताओं के साथ जुटी रहीं। इन सब के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी की स्थिति जिले में और आप दिखाई देती है। जमीनी स्तर पर चयन का के आने पर धरना प्रदर्शनों का कोई विशेष लाभ नहीं मिला और कांग्रेस अपने वोट ग्राफ को बढ़ाने में नाकाम सिद्ध हुई। यूपी पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) में मूर्तियां जिला पंचायत क्षेत्र के उसी गांव में जहां उभार कांड हुआ, वहां से कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 40 मत ही मिले और उस सीट पर बसपा प्रत्याशी रिकॉर्ड मतों से विजई हुआ। भाजपा को भी बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था।

सोनभद्र में भारतीय जनता पार्टी से ब्राह्मणों नाराज

भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के प्रति यहां के ब्राह्मणों में रोष है जो कि बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है। बसपा सतीश मिश्रा के नेतृत्व में ब्राह्मण सम्मेलनों का आयोजन कर रही है और ब्राह्मणों को अपनी और लुभाने का प्रयास कर रही है। इंद्रदेव सिंह ने कहा,"ब्राह्मणों में भाजपा के प्रति नाराज़गी है। जो ब्राह्मण समाज भाजपा की ओर चला गया था, वह वापस बसपा की ओर लौट रहा है।

दलित आंदोलन (Dalit Movement) में नायक बनकर उभर रहे चंद्रशेखर (chandrashekhar) के आने और युवाओं में उनकी बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद सोनभद्र के दलित वोटों पर उसका कोई असर नहीं दिखाई पड़ता है।

2017 विधानसभा चुनाव (UP Election 2022 ) में भाजपा ने महंगाई, भ्रष्टाचार, कालाधन और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाया था लेकिन वह इन मुद्दों पर नाकाम दिखी। ज़मीनी स्तर पर विकास नहीं दिखाई देता है। सोनभद्र के वर्तमान भाजपा विधायकों ने 2017 विधानसभा चुनाव में नारा लगाया था, "गिट्टी बालू सस्ता होगा,हर गरीब का मकान पक्का होगा।" लेकिन आज तक एक भी बालू की साइट नहीं खुली और सोनभद्र में झारखंड और छत्तीसगढ़ से गिट्टी बालू मंगाना पड़ता है जो कि काफी महंगा पड़ता है।

महंगाई को लेकर जनता में सरकार के प्रति नाराजगी

बढ़ती महंगाई विशेषकर पेट्रोल-डीजल, सरसों तेल, घरेलू गैस की कीमतों में उछाल से स्थानीय जनता में सरकार के प्रति नाराजगी है। जिस का स्पष्ट प्रभाव आगामी विधानसभा चुनाव में दिखेगा और यह आगामी चुनाव में एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। बढ़ती महंगाई के कारण भाजपा को यहां नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की पार्टी और ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) की सुहलदेव पार्टी के बीच गठबंधन से सोनभद्र में कोई प्रभाव या गठबंधन को कोई लाभ मिलता दृष्टिगोचर नहीं होता क्योंकि यहां राजभर जाति की आबादी लगभग नगण्य है।

2022 में मुद्दा क्या होगा?

न्यूज़ ट्रैक के सवाल कि 2022 में मुद्दा क्या होगा के सवाल पर इंद्रदेव सिंह ने कहा कि भाजपा और सपा दोनों पार्टियां हिंदू-मुस्लिम करके ध्रुवीकरण (Hindu-Muslim polarization) की राजनीति करने की कोशिश करेंगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाल ही के बयान- जिन्ना अगर देश के प्रधानमंत्री होते तो देश का बंटवारा नहीं होता का उदाहरण भी अपनी बात को समर्थन देने के लिए दिया। उन्होंने कहा कि सोनभद्र में बसपा मजबूत स्थिति में है और आगामी चुनाव में जीत दर्ज करेगी।

यहां बसपा की बढ़त है

कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि आदिवासी और अनुसूचित जाति की आबादी अधिक होने के कारण यहां बसपा की बढ़त है। महंगाई के कारण परेशान आम जनता भाजपा को छोड़ बसपा के साथ जा सकती है, जैसा कि हाल के ही पंचायत चुनाव में यहां पर हुआ था।

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Shashi kant gautam

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