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20 साल की सजा: खत्म हुआ विष्णु का सब कुछ, फिर साबित हुआ निर्दोष, दर्द की दास्तां

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के सिलावन गांव निवासी विष्णु तिवारी को हाईकोर्ट ने 20 साल बाद बलात्कार व हरिजन एक्ट के मामले में निर्दाेष साबित किया है। अब जेल से रिहा हुए इस अकेले बचे इंसान के पास अपना कुछ भी नहीं बचा है। इन 20 सालों में विष्णु अपने दो बड़े भाइयों व मां-बाप सहित चार सदस्यों को खो चुका है।

Vidushi Mishra

Vidushi MishraBy Vidushi Mishra

Published on 4 March 2021 6:31 PM GMT

20 साल की सजा: खत्म हुआ विष्णु का सब कुछ, फिर साबित हुआ निर्दोष, दर्द की दास्तां
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बृहस्पतिवार को जेल से छूटने के बाद जब विष्णु अपने गांव पहुंचा तो परिवार के लोगों समेत गांव वालों ने उसका खुशी से स्वागत किया और गले लगाया। 
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ललितपुर। उत्तर प्रदेश के ललितपुर में रहने वाले कारीगर विष्णु तिवारी जिसने अपना सब कुछ खो दिया। जिंदगी के 20 साल जहां विष्णु ने जेल केे काटे, वहीं इस दरमियां उसके परिवार के कई लोग खत्म हो गए। अब जेल से रिहा हुए इस अकेले बचे इंसान के पास अपना कुछ भी नहीं बचा है। बृहस्पतिवार को जेल से छूटने के बाद जब विष्णु अपने गांव पहुंचा तो परिवार के लोगों समेत गांव वालों ने उसका खुशी से स्वागत किया और गले लगाया।

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गांव वालों ने उसका स्वागत किया

जिले के सिलावन गांव निवासी विष्णु तिवारी को हाईकोर्ट ने 20 साल बाद बलात्कार व हरिजन एक्ट के मामले में निर्दाेष साबित किया है। 20 सालों में विष्णु अपने दो बड़े भाइयों व मां-बाप सहित चार सदस्यों को खो चुका है। बृहस्पतिवार को जब वह जेल से रिहा होकर गांव पहुंचा तो परिवार वालों समेत गांव वालों ने उसका स्वागत किया व गले मिलकर खुशी व्यक्त की।

अपनी जेल की सजा के बारे में विष्णु ने बताया कि अगर वह कुछ दिन और रिहा नहीं होता, तो आत्महत्या कर लेता। क्योंकि जेल में रहते-रहते उसके मन ने जेल की जिन्दगी से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या करने का मन बना लिया था।

गुरूवार को आगरा सेंट्रल जेल से छूटे विष्णु तिवारी ने बीस साल ललितपुर के ग्राम सिलावन अपने घर पहुंचे। जहां गांव वालों व परिजनों ने विष्णु को गले से लगा लिया। सुबह से देर रात तक विष्णु से मिलने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहा।

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रेप के मामले में

अपने बारे में 20 साल की सजा काट चुके विष्णु ने बताया कि जो जुर्म उसने किया नहीं था, उसमें उसे उस समय के भ्रष्ट सिस्टम के चलते जेल जाना पड़ा और सजा भी मिल गयी। उसकी कोई भी सुनवाई नहीं हुई, जबकि वह कहता रहा कि वह 17 साल का है वह बालिग नहीं है और न ही उसने ऐसा कोई कृत्य किया है।

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आगे बताते हुए बस पशुओं को लेकर थोड़ी बहुत पीड़ित पक्ष से बहस हुई थी। इतनी सी बात को लेकर विपक्षी ने थाने में शिकायत दर्ज की लेकिन मामला झूठा होने के चलते तीन दिन तक पुलिस ने मामला नहीं लिखा। बाद में दबाव के चलते पुलिस ने उस पर रेप व एससी-एसटी एक्ट का मामला लिख लिया और उसे पकड़कर जेल भेज दिया।

परिवार का हाल बताते हुए विष्णु तिवारी बताते हैं वर्ष 2003 में जेल में रहने के दौरान पता चला कि उसे रेप के मामले में दस वर्ष व एससीएसटी एक्ट के मामले में बीस वर्ष की सजा हुई है। उसके पिता ने जमानत के लिए जमीन बेची व पैसा लगाया।

आगे उन्होंने बताया कि जमानत नहीं मिली तो पिता को लकवा मार गया और वर्ष 2013 में उसकी मौत हो गयी और 2014 में उसकी मां की भी मौत हो गयी ओर कुछ वर्षों बाद उनके बड़े भाई रामकिशोर तिवारी व दिनेश की भी मौत हो गयी।

jail फोटो-सोशल मीडिया

हाईकोर्ट ने उसे निर्दाेष साबित किया

इस पर विष्णु बताते हैं कि 2005 के बाद उससे मिलने के लिए 12 वर्षों बाद कोई उसके पास नहीं पहुंचा। वर्ष 2017 में छोटा भाई महादेव मिलने पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके मां-बाप और भाइयों की मौत हो गयी है। वर्ष 2018 में जेल में रहते विधिक सेवा अन्तर्गत आये वकील ने उसकी सुनवाई की और केस हाईकोर्ट में लड़ा, जहां से हाईकोर्ट ने उसे निर्दाेष साबित किया।

बीस सालों तक जेल में रहकर निर्दाेष साबित होकर घर पहुंचे विष्णु तिवारी सरकार से मदद की गुहार लगाकर कह रहे हैं कि आज उसके पास कुछ नहीं बचा, न रहने के लिए घर और जमीन भी उसकी बिक गयी है। ऐसे में सरकार उसकी मदद करे, उसे रहने के लिए प्रधानमंत्री आवास दे और ऐसा काम दे जिससे वह काम कर सके और उसे रोजगार मिल सके।

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Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

Desk Editor

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